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बढ़े प्रतिशत से मुख्यमंत्री की नींद उड़ी

भोपाल 30 नवम्बर 2018 । मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में बढ़े मतदान प्रतिशत का रूझान मतगणना के साथ ही पता चल सकेगा। लेकिन फिर भी इस बढ़े प्रतिशत ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित उनके खास सलाहकारों की नींद उड़ा दी है। मुख्यमंत्री भी बढ़े प्रतिशत से बेचैन है। हालांकि बढ़े मतदान प्रतिशत का मतलब सत्ता विरोधी लहर नहीं होता।
वैसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं इस बार चुनावों में जमकर मेहनत की है। उनके साथ उनके सारथी रहे भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा की मेहनत व मालवा निमाड़ में भाजपा राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की मेहनत को नकारा नहीं जा सकता। दोनों ने राज्य में शिवराज सिंह की सरकार बचाये रखने के लिए जमकर मेहनत की और दिनरात एक कर दिया।
कैलाश विजयवर्गीय तो इसी कारण अपने पुत्र आकाश विजयवर्गीय के प्रचार प्रसार व चुनावी ब्यूहरचना पर ध्यान ही नहीं दे पाये थे, उनके सामने पार्टी को सत्ता में बनाये रखना एक बड़ा लक्ष्य था, लेकिन कुल मिलाकर सही परिणाम तो 11 दिसंबर को ही पता चल सकेगा, लेकिन बढ़े मतदान प्रतिशत से मुख्यमंत्री जी जरूर बेचैन हैं।

रिजल्ट से पहले BJP विधायक का इस्तीफा
भोपाल। पूरा मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के परिणामों का इंतजार कर रहा है और खंडवा में भाजपा की विधायक योगिता बोरकर भाजपा कार्यालय में आईं व अपना इस्तीफा फेंककर चलीं गईं। दरअसल, वो अपनी ही पार्टी से नाराज हैं।
भाजपा विधायक योगिता बोरकर के पति को प्रदेश अध्यक्ष ने विधायक के पति नवल सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इससे नाराज बोरकर जिला कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने जिलाध्यक्ष को फोन करके कार्यालय आकर इस्तीफा लेने के लिए कहा, लेकिन वे नहीं आए। इसके बाद वे सांसद की टेबल पर अपना इस्तीफा फेंक कर चली आई। इस्तीफा देने के बाद विधायक योगिता बोरकर ने कहा, “मेरे पति पर बार-बार हमले हो रहे हैं, उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाए जा रहे हैं। पार्टी के पदाधिकारी कह रहे हैं कि विधानसभा क्षेत्र छोड़कर चले जाओ, जब पदाधिकारी ध्यान नहीं रख सकते तो एेसी पार्टी में रहने से क्या फायदा, इस्तीफा देना ही बेहतर है।”
बीते मंगलवार की रात पिपलोद थाने के ग्राम टाकलखेड़ा में पंधाना सीट से भाजपा प्रत्याशी राम दांगोरे और योगिता के पति नवलसिंह के बीच मारपीट हो गई थी। मामले में पुलिस ने नवल सिंह के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई कर हिरासत में लिया था। जबकि घायल राम दांगोरे को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेजा, जहां तबीयत अधिक खराब हाेने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया। घटना के तत्काल बाद नवलसिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
घटना के दूसरे दिन विधायक योगिता बोरकर अपने गार्ड के साथ खंडवा स्थित पार्टी के कार्यालय पहुंची, यहां कोई भी वरिष्ठ पदाधिकारी नहीं मिला। उन्होंने जिलाध्यक्ष हरीश कोटवाले से मोबाइल पर चर्चा कर इस्तीफा लेने का आग्रह किया, लेकिन वे नहीं आए। आधे घंटे के इंतजार के बाद जब कोई पदाधिकारी नहीं आया तो वे सांसद कक्ष में गई और इस्तीफा टेबल पर रखकर वापस लौट गईं।

BJP नेता बाबूलाल गौर कांग्रेस विधायक से बोले-सरकार तो आपकी ही बन रही है
मध्यप्रदेश में 230 विधानसभा सीटों के लिए वोट पड़ चुके हैं. अब 11 तारीख को परिणाम का इंतजार है. लेकिन उससे पहले ही कयासों का दौर शुरू हो गया है. हर पार्टी अपनी जीत का दावा कर रही है. लेकिन जब एक पार्टी का वरिष्ठ नेता ही दूसरी पार्टी के जीत के दावे करने लगे तो क्या कहा जाएगा. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री रह चुके बाबूलाल गौर ने ऐसा दावा भले मजाक में किया हो, लेकिन इससे सियासी हलकों में हलचल तो शुरू हो ही चुकी है.

दरअसल वोट पड़ने के एक दिन बाद कांग्रेस के विधायक और भोपाल से चुनाव लड़ रहे आरिफ अकील बाबूलाल गौर से मिलने के लिए पहुंचे. यहां पर गौर ने अकील को बधाई दी. इसके साथ ही उन्होंने आरिफ अकील से कहा, कांग्रेस की सरकार आ रही है और आप मंत्री बन रहे हैं.

इस दौरान दोनों के बीच काफी देर तक चर्चा होती रही. यही नहीं बाबूलाल गौर ने तो यहां तक दावा कर दिया कि कांग्रेस ने बहू को टिकिट दिलाने में मेरी मदद की है. बाद में आरिफ अकील से जब इस मुलाकात के बारे में पूछा गया तो उन्होंने एक मंजे हुए नेता की तरह ही जवाब दिया. उन्होंने कहा, मैं गौर साहब से आशीर्वाद लेने आया था.

ज्यादा मतदान पर ये बोले बीजेपी के मंत्री
मध्यप्रदेश में इस बार के मतदान ने पिछली बार के रिकॉर्ड भी तोड़ दिए हैं. इस बढ़ी हुई वोटिंग के बाद ही पक्ष और विपक्ष इस पर अपने अपने दावे कर रहे हैं. मंत्री उमाशंकर गुप्ता का इस पर कहना है कि आरएसएस की वजह से बंपर वोटिंग हुई. उन्होंने कहा, आरएसएस ने लोगों को ज्यादा से ज्यादा वोटिंग करने के लिए कहा था इसकी का परिणाम है.

चुनाव प्रचार करने राजस्थान जाएंगे मध्यप्रदेश के ये दिग्गज नेता

राजस्थान में 200 सीटों के लिए सात दिसंबर को मतदान होना है। इसके लिए सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र जारी किया है। दोनों ही दलों द्वारा किसानों, महिलाओं और युवाओं पर फोकस किया गया है। जीत के लिए बीजेपी-कांग्रेस अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। यहां पार्टियों की जीत से ज्यादा उनके चेहरों का राजनीतिक भविष्य दांव पर है। अगर बीजेपी सत्ता से बेदखल होती है तो 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उसके लिए बड़ा झटका तो होगा ही, उधर राज्य में पार्टी का चेहरा वसुंधरा राजे के लिए राजनीतिक अस्तित्व की चुनौती बढ़ जाएगी।चुंकी राजस्थान मप्र से सटा राज्य है। राजस्थान में 1993 के बाद से हर पांच साल पर सरकार बदलती रही है।

सत्ता की अदला-बदली भाजपा और कांग्रेस के बीच होती रही है। ऐसे में भाजपा-कांग्रेस मध्यप्रदेश के नेताओं को राजस्थान भेजने की तैयारी में है, ताकी अपना पक्ष मजबूत हो सके। एक तरफ भाजपा है जो दूसरी बार सरकार बनाने का दावा कर रही है, वही पांच सालों से सत्ता से बाहर कांग्रेस वापसी के लिए आतूर है। दोनों सियासी दल उन नेताओं का भरपूर उपयोग करेंगे, जिनकी राजस्थान में रिश्तेदारी, संपर्क या लोकप्रियता है। ऐसे में भाजपा-कांग्रेस इन जिलोंं के बड़े नेताओं का उपयोग भी राजस्थान के सियासी समीकरण साधने में करने जा रही हैं।

भाजपा-कांग्रेस इन नेताओं को भेज सकती है राजस्थान

-शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री – आम आदमी की छवि के कारण शिवराज देश के लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों में से एक हैं। वे राजस्थान में पांच स्थानों पर सभाएं ले सकते हैं। उनका गुरुवार को राजस्थान का चुनावी दौरा तैयार हो जाएगा।

-नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री – राजपूत वोट बैंक साधने के लिए तोमर को राजस्थान भेजा जाएगा। तोमर के पुत्र देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर रामू का विवाह जयपुर में हुआ है।

-यशोधरा राजे सिंधिया, मंत्री- राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, यशोधरा की बड़ी बहन हैं। यशोधरा हर चुनाव में अपनी बहन के लिए प्रचार करने जाती हंै। इस बार भी वे प्रचार करने जाएंगी।

-डॉ. नरोत्तम मिश्रा- राजस्थान मेंं रिश्तेदारी है। मैनेजमेंट में माहिर और अच्छे वक्ता हंै।

-थावरचंद गेहलोत- राजस्थान में रिश्तेदारी, उदयपुर, चित्तौडगढ़़ और बांसवाड़ा में वर्चस्व है।

-विधायक : यशपाल सिसोदिया मंदसौर, ओमप्रकाश सखलेचा जावद, दिलीप सिंह परिहार नीमच, चंदर सिंह सिसोदिया गरोठ, चेतन काश्यप रतलाम और राजेंद्र पाण्डे जावरा।

-सांसद : चिंतामण मालवीय उज्जैन, सुधीर गुप्ता मंदसौर, रोडमल नागर राजगढ़ और मनोहर ऊंटवाल शाजापुर।

-ज्योतिरादित्य सिंधिया – कांग्रेस का बड़ा चेहरा। ग्वालियर-चंबल से जुड़े राजस्थान के इलाके में लोकप्रियता, सचिन पायलट से निकटता।

-दिग्जिवय सिंह- राजस्थान में रिश्तेदारी और अच्छा संपर्क।

-रामनिवास रावत – कोटा, सवाई माधोपुर में अच्छा संपर्क।

-कांतिलाल भूरिया – राजस्थान से सटे इलाके में बड़ा आदिवासी चेहरा। बांसवाड़ा, कोटा और उदयपुर में संपर्क।

-जीतू पटवारी – राजस्थान में रिश्तेदारी और युवा चेहरा।

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