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CM कमलनाथ को मिल चुकी थी MLAs के बगावत की चेतावनी

भोपाल 13 मार्च 2020 । मध्य प्रदेश में चले सियासी ड्रामे से पहले विधायकों में अंसतोष की जानकारी मुख्यमंत्री कमलनाथ को दी गई थी. सूत्रों ने एनडीटीवी को बृहस्पतिवार को बताया कि मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस बात की जानकारी दी गई थी, 30 से 35 विधायकों के बीच असंतोष है लेकिन, वह इस चेतावनी पर कदम उठाने में नाकाम रहें. मध्य प्रदेश के इस सियासी ड्रामे से कुछ हफ्ते पहले ही मुख्यमंत्री को इस बारे में चेतावनी दी गई थी. बता दें कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है और पार्टी के वरिष्ठ नेता और चार बार सांसद रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है.
सूत्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ को मंत्रियों और विभिन्न जिलों के नेताओं के व्यवहार में बदलाव के विशेष उदाहरण दिए गए थे. हालांकि, उन्होंने इस चेतावनी को नहीं माना. नजरअंदाज की गई इन चेतावनियों का असर पार्टी के अंदर भी पड़ेगा और गांधी परिवार समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिंधिया को रोकने के लिए उतना प्रयास नहीं कर पाए, जितना उन्हें करना चाहिए था.

सूत्रों के मुताबिक, मालवा-निरमार और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेताओं के व्यवहार के बारे में शिकायत की थी. इस्तीफा देने वाले विधायकों में से 15 विधायक इसी क्षेत्र से हैं. हाल ही में BJP ज्वाइन करने वाले विधायक और पूर्व मंत्री बिसाहू लाल ने भी इसी तरह की शिकायत की थी. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता शिवराज सिंह यादव में मौजूदगी में बीजेपी में शामिल होने के बाद विधायक लाल ने कहा था कि कुछ और कांग्रेस नेता पार्टी छोड़ने का इंतजार कर रहे हैं.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने को लेकर गुरुवार को कहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने राजनीतिक भविष्य का डर लगा और वह आरएसएस एवं बीजेपी के साथ चले गए. गांधी ने यह दावा भी किया कि सिंधिया को बीजेपी में वो सम्मान नहीं मिलेगा जो कांग्रेस में मिल रहा था और इसका अंदाजा उन्हें हो जाएगा.

मध्य प्रदेश के बाद क्या राजस्थान और महाराष्ट्र में भी कांग्रेस को है ख़तरा?

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाने से पार्टी जैसे संकट में फंसी है, उसके बाद अब कांग्रेस शासित अन्य राज्यों में भी उसके अस्तित्व पर सवाल उठने लगे हैं.

आगामी ख़तरे की बात करें तो राजस्थान और महाराष्ट्र का नाम सबसे ऊपर आता है.

राजस्थान में जहां कांग्रेस की सरकार है, वहीं महाराष्ट्र में वो सरकार बनाने में भागीदार है.राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन की खटपट कई बार खुलकर सामने आ जाती है.

महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस को कितनी मशक्कत करनी पड़ी थी, ये भी किसी से छिपा नहीं है.

मुश्किल भरी राह तय करके महाराष्ट्र और राजस्थान में अपनी जगह बनाने वाले कांग्रेस क्या अब इन्हें भी गंवाने की राह पर है? ये समझने के लिए दोनों राज्यों की स्थिति पर बारी-बारी से नज़र डालते हैं.

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