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उद्योगपति सम्मेलन का रंगारंग आगाज

इंदौर 19 अक्टूबर 2019 । मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार सुबह ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में मैग्नीफिसेंट एमपी का उद्घाटन किया। सीएम के साथ विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति, उद्याेगपति आदि गोदरेज, दिलीप सांघवी, संजीव पुरी, विक्रम किर्लोस्कर और एम श्रीनिवासन मौजूद रहे। 900 से ज्यादा जाने-माने उद्योगपतियों की मौजूदगी में रंगारंग प्रस्तुति के साथ इसका आगाज हुआ। इसके बाद लेजर शो के जरिए मप्र में निवेश की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया। उद्योगपति मुकेश अंबानी ने वेबकास्ट के जरिए अपनी बात रखी।

मुख्यमंत्री ने मैग्निफिसेंट एमपी का शुभारंभ करते हुए कहा- आप सभी का देश के सबसे स्वच्छ शहर में स्वागत है। मैग्निफिसेंट एमपी कोई मेला नहीं है, ना ही सिर्फ एमओयू साइन करने के लिए रखा गया एक कार्यक्रम। यह प्रदेश के युवाओं के लिा राेजगार सृजित करने का एक मंच है। हमारी सरकार ने 10 महीने में बहुत कुछ देखा और सीखा है। हमने यहां कई कार्यों को असंभव से संभव किया है। हमारी सरकार ने इंदौर और भोपाल में मेट्रो का शुभारंभ किया। प्रदेश की 70 प्रतिशत आबादी कृषि आधारित है। सरकार में आने के साथ ही हमने 20 लाख किसानों की कर्जमाफी की। पर्याप्त पानी मिल सके इसलिए हमारी सरकार ने राइट टू वॉटर शुरू किया।

सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का टाइगर कैपिटल है। हमारा मकसद प्रदेश को उद्योगों का हब बनाना है। उन्होंने कहा – इंडिया इन्क्रेडिबल है, लेकिन मध्यप्रदेश क्रेडिबल है। उन्होंने उद्योगपतियों ने कहा कि हमने प्रदेश में निवेश का बेहतर माहौल तैयार किया है। मप्र में र्स्टाटअप नीति अन्य राज्यों के मुकाबले आसान है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि आप हमारे शहरों ही नहीं गांवों और कस्बों में पहुंचे और वहां निवेश करें।

ये रख रहे अपनी बात

बिड़ला ग्रुप के कुमार मंगलम बिड़ला, ट्राइडेंट ग्रुप के राजिंदर गुप्ता, एचईजी ग्रुप के रवि झुनझुनवाला, आईटीसी के संजीव पुरी, सन फार्मा के दिलीप संघवी, किर्लोस्कर ग्रुप के विक्रम किर्लोस्कर, इंडिया सीमेंट के एन. श्रीनिवासन, गोदरेज ग्रुप के आदि गोदरेज, भारती एक्सा के राकेश मित्तल और लैब इंडिया के मार्क जेराल्ट भी अपनी बात रखी।

इतने निवेश पर बात

74 हजार करोड़ के प्रस्ताव तय, 31 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पर शुरू हो चुका काम

सद्‌गुरु सीमेंट,अन्य चार प्रस्ताव 10 हजार करोड़

IT में ट्यूडिप, ब्ल्यूपर,अन्य चार 6 हजार करोड़

टेक्सटाइल में मराल, अन्य दो 6 हजार करोड़

डिफेंस में शिवपुरी के लिए प्रस्ताव 3 हजार करोड़

नेचुरल गैस में ओमान व अन्य 8 हजार करोड़

प्लास्टिक इंडस्ट्री, पैकेजिंग 2हजार करोड़

ड्रायपोर्ट का प्रस्ताव 10 हजार करोड़

रिन्युअल एनर्जी में पांच प्रस्ताव 8 हजार करोड़

फार्मा में सिपला, पीआर आदि 3 हजार करोड़

टायर में राल्सन, ब्रिजस्टोन आदि 3.5हजार करोड़

लॉजिस्टक में 3 से अधिक प्रस्ताव 12 हजार करोड़

घरेलू प्रोडेक्ट प्लांट के 3 प्रस्ताव 2 हजार करोड़

फूड प्रोसेसिंग में अमूल व अन्य 3 हजार करोड़

स्प्रिंग व माइनिंग 1400 करोड़

आईटीसी 600 करोड़

श्रीराम पिस्टन 600 करोड़

जमुना ऑटो 400 करोड़

सिंडराम पैकेजिंग 100 करोड़

एसआरएफ 1 हजार करोड़

चईजी लिमिटेड 1200 करोड़

प्रॉक्टर एंड गेंबल 500 करोड़

विदेशी कंपनियों के यह प्रस्ताव

एवगोल (इजराइल)- 1250 करोड़ स्टेट क्राफ्ट (नार्वे)- हजार करोड़ ब्रिजस्टोन (जापान) – 400 करोड़ फिटेसा (ब्राजील)- 350 करोड़ परफार्मा(यूएसए)- 375 करोड़ सहित अन्य कई विदेशी कंपनियां।

अब सरकार खरीदेगी पुराने फ्रिज, एसी ,वाशिंग मशीन, पैसों के साथ मिलेगा इंसेंटिव भी।

यदि आपके पास भी पुरानी कार, एसी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन है तो इसे कबाड़ी के हाथों बेचने से पहले ये खबर पढना आपके लिये फायदे का सौदा हो सकता है। दरअसल सरकार अगले हफ्ते स्टील स्कैपेज पॉलिसी लाने जा रही है। इससे जुड़े मसौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पहले यह पॉलिसी सिर्फ गाड़ियों के लिये थी लेकिन अब ड्राफ्ट में फ्रिज, एसी, वॉशिंग मशीन जैसे घरेलू सामान को भी शामिल कर लिया गया है।

इन सामनों को स्क्रैप सेंटर में जाकर आसानी से बेचा जा सकेगा। सरकार जल्द ही कई जगह स्क्रैपेज सेंटर बनाने की तैयारी में है। जब आप इन खराब हो चुके इन सामान को बेचेंगे तो आपको इंसेंटिव मिलेगा। मतलब सामान बेचने के बदले आपको पैसा तो मिलेगा ही उसके अलावा सरकार इंसेंटिव भी देगी।

इंसेंटिव देने के पीछे सरकार का उद्देश्य लोगों को इस तरफ आकर्षित करना है।

इंसेंटिव किस हिसाब से दिया जाए इस बात को लेकर अभी विचार विमर्श जारी है। इसे लागू करने में लगभग 10 दिन का समय लगने की उम्मीद है। लेकिन इस पॉलिसी से एक फायदा यह होगा कि स्टील के पुराने स्क्रैपेज आसानी से एक जगह एकत्र किये जा सकेंगे इससे उनको रिसाइकल कर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। साथ ही पुरानी कबाड़ खड़ी गाड़ियां भी हट जाएंगी।

बढ़ेगी नई गाड़ियों के बिकने की संभावना
अगर सरकार की तरफ से दिया जाने वाला इंसेंटिव लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करने में सफल रहा तो पुरानी हो चुकी गाड़ियों को भी बेच कर लोग नई गाडी खरीदने का रुख करेंगे। लोग नई कार खरीदेंगे तो इससे गाड़ियों की बिक्री बढ़ेगी। उम्मीद है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में चल रही मंदी भी शायद कुछ कम हो।

कम होगा स्टील का आयात
इस नई स्क्रैपेज पॉलिसी के जरिए स्टील के आयात को कम करने का प्रयास किया जाएगा। क्योंकि सरकार की स्टील स्क्रैप प्लांट खोलने की योजना है जहां पुराने स्टील को फिर से इस्तेमाल के लायक बनाने पर जोर दिया जाएगा। भारत में सालभर में करीब 60 लाख टन स्टील स्क्रैप का आयात किया जाता है। जबकि डिमांड इससे ज्यादा है।

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