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निर्वाचन के कार्यो को समय पर पूरा करें:- मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी

नई दिल्ली 20 सितम्बर 2018 । मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री व्ही.एल.कान्ता राव ने आगामी विधानसभा निर्वाचन 2018 के लिये 12 विभागों के नोडल अधिकारियों की बैठक में निर्देश दिये कि चुनाव के दौरान सौंपे गये दायित्वों का निर्वहन पूर्ण गंभीरता और जिम्मेदारी से करें। गृह विभाग को केंद्रीय बलों की मांग भेजने, पुलिस कर्मियों एवं केंद्रीय बलों को मानदेय/अनुग्रह राशि की स्वीकृति, सीमावर्ती राज्यों के अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक, पुलिस डिप्लायमेण्ट प्लान के संबंध में निर्देश दिये ।

कान्ता राव ने वाणिज्यिक कर विभाग को निर्देशित किया कि मतदान एवं मतगणना दिवस पर शराब की बिक्री पर पूर्णत: प्रतिबंध संबंधी आदेश जारी किया जायें। उच्च शिक्षा एवं स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल एवं कॉलेजों में स्थित मतदान केंद्रों में अनिवार्य न्यूनतम सुविधाएं सुनिश्चित करने के और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को निर्वाचन की अधिसूचना से निर्वाचन प्रक्रिया की समाप्ति तक प्रदेश में पेट्रोल एवं डीजल की आपूर्ति बनाये रखने के लिये निर्देश दिये ।

श्रम विभाग को मतदान के दिन प्रदेश के समस्त निजी एवं शासकीय संस्थानों में अवकाश की सूचना जारी करने, लोक निर्माण विभाग को मतदान केंद्रों को जोड़ने वाली सड़कों , मतदान केंद्रों की मरम्मत और बैरिकेडस लगाने के निर्देश जारी किये। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को मतदान कर्मियों एवं पुलिस के लिए स्वास्थ्य सुविधाऐं उपलब्ध कराने, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को मतदान केंद्रों पर पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने, उर्जा विभाग को मतदान के दिन प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति, मतदान केंद्रों पर विद्युत व्यवस्था, राजस्व विभाग को निर्वाचन संबंधी फार्म,लिफाफे, पुस्तकों का मुद्रण तथा विधि एवं विधायी कार्य विभाग को जोनल अधिकारी एवं सेक्टर मजिस्ट्रेटों को विशेष कार्यपालिक दण्डाधिकारी की शक्तियां प्रदत्त करने संबंधी अधिसूचना जारी करने का दायित्व सौंपा गया।
बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संदीप यादव, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजेश कौल, सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थें।

अक्टूबर में कभी भी लग सकती है आचार संहिता

एक पखवाड़े बाद मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की आचार संहिता कभी भी लागू हो सकती है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने तकरीबन सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। 27 सितंबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन हो जाएगा। ईवीएम और वीवीपैट की पहले दौर की जांच का काम हो गया है। चुनाव ड्यूटी में लगने वाले कर्मचारियों का डेटाबेस भी बना लिया गया है। मतदान दिसंबर के पहले पखवाड़े में संभावित बताए जा रहे हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव की आचार संहिता चार अक्टूबर को लगी थी। संभावना जताई जा रही है कि चार तारीख के बाद कभी भी चुनाव की घोषणा हो सकती है। वैसे भी चुनाव आयोग की टीम मध्यप्रदेश की चुनावी तैयारियों से संतुष्ट है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत पूरी टीम सहित एक चीज पर दो दिन समीक्षा कर चुके हैं। इसके बाद से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव की टीम लगभग हर दिन मैदानी समीक्षा कर रही है। मतदाता सूची के काम में 65 हजार कर्मचारी और एक हजार से ज्यादा अधिकारी दिन-रात लगे हुए हैं।

27 सितंबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। इसके पहले 31 लाख से ज्यादा दावे-आपत्तियों का निराकरण किया जाना है। वहीं, ईवीएम और वीवीपैट की पहले दौर की जांच जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरे प्रदेश में हो चुकी है। इसमें जो लगभग छह हजार वीवीपैट खराब पाई गईं थी, उन्हें वापस लौटाकर दूसरी लाई जा रही हैं। हर मतदान केंद्र पर पांच अधिकारी-कर्मचारियों के हिसाब से हर जिले में अमला चिह्नित कर ऑनलाइन डेटाबेस तैयार कर लिया गया है। पुलिस फोर्स का आकलन पुलिस मुख्यालय ने कर लिया है।

आमतौर पर शुक्रवार को लगती है आचार संहिता

सूत्रों का कहना है कि आमतौर पर चुनाव आयोग शुक्रवार को चुनाव की तैयारियों का एलान करता है। पांच अक्टूबर को शुक्रवार है, इसलिए संभावना है कि आदर्श आचार संहिता इसी दिन से प्रभावी हो सकती है। उधर, त्योहारों को देखते हुए मतदान दिसंबर के पहले पखवाड़े में एक चरण में कराया जा सकता है। 23 से 26 नवंबर तक इज्तिमा होने की वजह से इन तारीखों के आगे पीछे चुनाव नहीं कराए जाएंगे। वैसे भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त भोपाल दौरे के वक्त समय पर चुनाव होने और मतदान में त्योहारों का ध्यान रखने का भरोसा दिला चुके हैं।

नाम जोड़ने साढ़े 16 लाख से ज्यादा आवेदन

मध्यप्रदेश में यह पहली बार हो रहा है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए बड़ी तादाद में आवेदन आ रहे हैं। 31 जुलाई को जब मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन किया गया था, तब 11 लाख से ज्यादा नए नाम सूची में शामिल किए गए थे। इसके बाद 16 लाख 64 हजार 896 नए आवेदन नाम जोड़ने के लिए आए हैं। यदि इन दावों को सही पाया जाता है तो जितने नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे, उससे ज्यादा जुड़ जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि आयोग 24 लाख से ज्यादा मृत, अनुपस्थित, स्थानांतरित और दो जगह नाम होने वाले मतदाताओं की छंटनी कर चुका है। नाम हटाने के लिए 7 लाख 30 हजार 684, सुधार के लिए 6 लाख 43 हजार 749 और एक ही विधानसभा में एक जगह से नाम काटकर दूसरी जगह जोड़ने के लिए 1 लाख 5 हजार 145 आवेदन मिले हैं।

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