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कांग्रेस ने जारी किया घोषणा पत्र- किसानों के लिए अलग बजट

नई दिल्ली 3 अप्रैल  2019 । भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए घोषणा पत्र जारी कर दिया है. लोकसभा चुनाव 2019 के लिए घोषणा पत्र में सेना का आधुनिकीकरण,राइट टू फ्री हेल्थकेयर और प्रदूषण के मुद्दे पर वादा किया है. कांग्रेस के घोषणा पत्र का शीर्षक है- Congress Will Deliver यानी हम निभाएंगे.

कांग्रेस के घोषणा पत्र में न्याय यानी न्यूनतम आय योजना ,छोटे उद्यमियों को बढ़ाना और टैक्स में राहत सरीखे वादे किये गए हैं. घोषणा पत्र में कांग्रेस ने कहा है कि वर्ष 2030 तक गरीबी का नामोनिशान मिटाने के लिये कांग्रेस न्यूनतम आय योजना की शुरुआत करेगी, भारत की 20 प्रतिशत सबसे गरीब आबादी को हर साल बहत्तर हजार रुपये (72,000) दिये जायेंगे. कांग्रेस का लक्ष्य होगा कि कोई भी ‘भारतीय परिवार पीछे न छूट जाये.’

कांग्रेस ने घोषणा पत्र में कहा है कि ‘जी.एस.टी. 2.0 युग सभी वस्तुओं एवं सेवाओं पर एक समान, सीमित और आदर्श मापदण्ड के अनुसार होगा. जी.एस.टी. 2.0 नये व्यवसाय और रोजगार पैदा करते हुए विकास गति को बढ़ायेगा.’

घोषणा पत्र में कहा गया है कि’ एम.एस.एम.ई. को ऋण सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर नये संस्थानों (छोटे बैंकों) की स्थापना को प्रोत्साहित करेगी, ताकि एम.एस.एम.ई. को ऋण उपलब्ध करवाया जा सके.’ घोषणा पत्र में लिखा गया है- ‘कांग्रेस शहीदों के परिवारों को मुआवजे की नीति तैयार करने और लागू करने का वचन देती है. इस नयी नीति में पूर्ण वेतन और भत्ते शामिल होंगे, बच्चों की शिक्षा के लिए धन तथा शहीद परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी और उपयुक्त मौद्रिक मुआवजा शामिल होगा.’

कांग्रेस ने घोषणा पत्र में LGBT अधिकार, अल्पसंख्यकों के अधिकार, महिला सशक्तिकरण का जिक्र किया है. कांग्रेस ने वादा किया है कि अलग से किसान बजट आएगा. कांग्रेस ने ऐलान किया है कि मनरेगा में 150 दिन का रोजगार मिलेगा. कांग्रेस ने कहा है कि राफेल सहित पिछले पांच साल में भाजपा सरकार द्वारा किये गये सौदों की जांच की जायेगी.

मैनिफेस्टो में कहा गया है कि ‘हम 17वीं लोकसभा के पहले सत्र में और साथ ही राज्यसभा में, उन्मादी भीड़ द्वारा, आगजनी और हत्या जैसे नफरत भरे अपराधों की रोकथाम और दंडित करने के लिये नया कानून पारित करायेंगे. इस कानून में पीड़ितों को मुआवजा देने और लापरवाही के लिए पुलिस और जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने के प्रावधान होंगे.’

कांग्रेस ने मैनिफेस्टो में कहा है कि’ पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए सिटिजन चार्टर का रिव्यू किया जाएगा इसके साथ पूर्वोत्तर के राज्यों का विकास किया जाएगा’. कांग्रेस ने कहा है कि जम्मू और कश्मीर का विकास उसकी प्राथमिकता में होगा. कांग्रेस ने वादा किया है कि किसानों की ओर से कर्ज न चुकाये जाने पर कोई आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा.

घोषणा पत्र जारी करने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इस पर एक साल तक काम किया. राहुल ने कहा कि मैंने कहा था कि बंद कमरों में न बनाया जाए घोषणा पत्र, इसमें लोगों की उम्मीदें शामिल किए जाएं और घोषणापत्र में सभी वादे सच्चे हों. कांग्रेस ने वादा किया है कि उनकी सरकार सभी कानूनों की समीक्षा करेगी और उन्हें निरस्त करेगी, जो पुराने पड़ चुके हैं, अन्यायपूर्ण हैं या अनुचित रूप से लोगों की स्वतंत्रता में बाधा पहुंचाते हैं.

इससे पहले कांग्रेस घोषणापत्र समिति के सदस्य राजीव गौड़ा ने कहा कि घोषणापत्र में जनता की आवाज शामिल, कई समितियां बनाई गई.इसके लिए जनता से ऑनलाइन राय भी मांगी गई. वहीं पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस का घोषणापत्र लाखों लोगों की आवाज है. घोषणापत्र में जो भी पैराग्राफ हैं वो देश की जनता द्वारा लिखी गई हैं. हालांकि हम सभी आवाजों को इस घोषणापत्र में शामिल नहीं कर पाए हैं. चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस की घोषणापत्र का नाम ‘जन आवाज घोषणापत्र’ रखा गया है. इसमें किसान, युवा, महिला, दलित, अल्पसंख्यक, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य सभी वर्गों की बातें शामिल हैं.

पूर्व PM मनमोहन सिंह ने कहा कि आज एक ऐतिहासिक दिन है. हम भारत को एक संपन्न देश बनाना चाहते हैं. घोषणापत्र में शामिल मुद्दे देश के संपन्न बनाने के लिए हैं.

घोषणा पत्र कांग्रेस दफ्तर के राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित परिसर में जारी किया गया. घोषणा पत्र के ऐलान के वक्त पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, वरिष्ठ नेता एके एंटनी, पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ, आनंद शर्मा, सुशील कुमार शिंदे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी समेत अग्रिम पंक्ति के कई नेता मौजूद रहे.

राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद की दौड़ से बाहर?

सत्रहवें लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने आज अपना चुनाव घोषणापत्र जारी कर दिया है, जिसमें उसने बेरोज़गारी दूर करने पर खास फोकस किया है। घोषणापत्र की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि उसने देश से ऐसे आर्थिक वादे किए हैं, जो आज की स्थिति में कांग्रेस पूरे ही नहीं कर सकती है। घोषणा पत्र से लगता तो यह है कि कांग्रेस मान चुकी है कि उसका केंद्र की सत्ता में आना नामुमकिन है, इसलिए देश की जनता से लुभावने और बड़े-बड़े वादे करके लोगों को भरमाने में हर्ज ही क्या है। कांग्रेस का यह घोषणा पत्र उसकी इस सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है कि भारत की जनता बहुत जल्दी लालच में आ जाती है, जैसे कांग्रेस ने देश के बीस प्रतिशत गरीबों को प्रतिवर्ष उनके खाते में सीधे 72000 रुपये भेजने का वादा किया है, लेकिन ये रुपये कांग्रेस सरकार कहां से लाएगी, इसपर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा एवं उनकी टीम के पास कोई विश्वसनीय और सही उत्तर नहीं है। वे देश की जनता को अभी तक यह भी विश्वास नहीं दिला पाए हैं कि कांग्रेस किस प्रकार से देश की सत्ता में आएगी, क्योंकि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में तो उनका जनाधार ही लगभग समाप्त है और राहुल गांधी को अमेठी में हार जाने के भय से केरल में चुनाव लड़ना पड़ रहा है।
कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी होने के समय मंच पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी, कांग्रेस गठबंधन सरकार में दस साल प्रधानमंत्री रहे सरदार मनमोहन सिंह, कांग्रेस के काबिल वित्तमंत्री रहे पी चिदंबरम थे, जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कांग्रेस के कोरग्रुप के लगभग सभी नेता सामने मौजूद थे। प्रियंका गांधी वाड्रा मंच पर नहीं थीं, जबकि वे कांग्रेस की खेवनहार के रूपमें कांग्रेस की रणनीति के साथ प्रचार मैदान में उतारी गई हैं। कांग्रेस के इसी पाखंड को जनता बहुत अच्छी तरह पकड़ती है। प्रियंका गांधी वाड्रा यूं तो कांग्रेस की संजीवनी के रूपमें घोषित तौरपर राजनीति में आई हैं, लेकिन वे इस बात से भी डरी हुई लगती हैं कि यदि उनका भी कार्ड विफल हुआ तो फिर कांग्रेस के पास अब कोई चमत्कारिक कार्ड नहीं बचा है। कांग्रेस की अंतिम नैय्या और स्टार प्रचारक कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा क्या कांग्रेस की वापसी की गारंटी हैं? घोषणा पत्र समिति के संयोजक ने घोषणा पत्र के प्रारूप और विजन पर प्रकाश डाला और कहा कि यह बहुत अच्छा चुनावी घोषणा पत्र है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी करते हुए सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा किया है। सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस सरकार ऐसा कर पाएगी और उसने यूपीए सरकार के दौरान ऐसा क्यों नहीं किया, जबकि उसीके नेतृत्व में दस साल तक गठबंधन की सरकार थी। कांग्रेस का घोषणा पत्र किसी भी मायने में भाजपा के वादों से ज्यादा भरोसेमंद नहीं माना जा रहा है। नरेंद्र मोदी सरकार ने देश में इन पांच वर्ष में जो बुनियादी कार्य किए हैं, वह कांग्रेस साठ साल में भी नहीं कर पाई है। घोषणा पत्र में कांग्रेस अपने प्रधानमंत्री पद के दावेदार का नाम भी घोषित करने से दूर भाग गई और यह दावा चुनाव परिणाम पर छोड़ दिया। उन्होंने एक सवाल पर कहा कि यह देश तय करेगा कि पीएम कौन होगा। उन्होंने कहा कि पीएम का उम्मीदवार देश के ऊपर है, यह मेरे ऊपर नहीं है और यह सवाल आपको देश से पूछना चाहिए मैं अपना काम करता हूं। राहुल गांधी के इस जवाब का कांग्रेस पर क्या असर पड़ेगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है, क्योंकि प्रियंका गांधी वाड्रा तो कह चुकी हैं कि कांग्रेस में राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं। राहुल गांधी ने अपने दावे पर चुप्पी मारकर यह संदेश तो दे ही दिया है कि वे असमंजस की स्थिति में हैं, जबकि भाजपा का प्रधानमंत्री पहले से ही घोषित और अवश्यसंभावी है।
राहुल गांधी ने कांग्रेस सरकार के वायदों में कहा कि देश में 22 लाख सरकारी रोजगार खाली पड़े हैं और कांग्रेस दस लाख बेरोजगारों को पंचायतों में रोज़गार देगी, कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मोदीजी ने देश की अर्थव्यवस्था को जाम कर दिया है, आज रोज़गार के लिए रिश्वत देनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार आने पर हिंदुस्तान के युवाओं को बिजनेस करने के लिए किसी की परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी, हम उनके लिए बैंकों के दरवाजे खोलेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश की जनता को पंद्रह लाख रुपए देने का वादा झूंठा था। कांग्रेस ने घोषणा पत्र का नाम जन आवाज़ दिया है। राहुल गांधी ने कहा है कि कांग्रेस सरकार 1 साल में ₹72000 सीधे गरीबों के खाते में डालेगी। कांग्रेस ने यह एक तरह से गरीबों को रिश्वत देने की घोषणा की है, जिसके पूरा होने में शक ही शक है। उन्होंने चुनौती दी कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे चर्चा करें, बीजेपी गरीबी और रोजगार के मुद्दे से देश की जनता का ध्यान हटाना चाहती है, मोदी सरकार बिजनेसमैन की सरकार है, जबकि कांग्रेस गरीबों को फायदा नहीं पहुंचाना चाहती है। राहुल गांधी की घोषणाओं से यह माना जा रहा है कि उनका केवल एक चुनावी वादा है, जिसके पूरे होने की कोई गारंटी नहीं है, क्योंकि कांग्रेस की सरकार आनी ही नहीं है। राहुल गांधी कह रहे हैं कि वह 72000 रुपये की गारंटी देते हैं, जबकि यहां यह बात गौर करने वाली है कि कांग्रेस की देश के 3 राज्यों राजस्थान छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में किसानों के कर्ज माफी की घोषणा पूरी नहीं कर पाई है और इसके नाम पर वहां के लोगों को सौ-सौ दो-दो सौ रुपये के कर्ज माफी के चेक दिए जा रहे हैं, इसलिए राहुल गांधी का गरीबों के खाते में सीधे पैसा भेजने का जो वादा है, उस पर सभी को शक है। उन्होंने फिर ‌कहा कि चौकीदार ने चोरी करवाई है।
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की सरकार आने पर अलग से किसान बजट लाया जाएगा, जिसमें कर्ज चुकाने वालों पर आपराधिक कार्रवाई नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि मनरेगा में सौ दिन के बजाए अब 150 दिन रोजगार की गारंटी होगी। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में अनेक वादे किए हैं। दरअसल कांग्रेस के घोषणा पत्र को बनाने वाले ये वही लोग हैं, जिन्होंने यूपीए की सरकार के दौरान भ्रष्टाचार फैलाने के अलावा कोई काम नहीं किया है और जिनके प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह ने केवल कांग्रेस नेताओं का लिखा हुआ भाषण ही पढ़ा है। यह बात भी यूपीए के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर सटीक बैठती है कि जो केवल प्रधानमंत्री बने रहने के लिए समझौता वादी प्रधानमंत्री बने रहे, यह प्रश्न कांग्रेस से उत्तर मांगता है कि यूपीए सरकार 10 साल में भारतीय अर्थव्यवस्था को विकसित अर्थव्यवस्था में बदलने में क्यों विफल रही, जबकि उसके पास देश के जाने-माने अर्थशास्त्री सरदार मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री के रूप में मौजूद थे। कांग्रेस का इतिहास भारतीय रक्षा सौदों में दलाली खाने का रहा है देश की नई पीढ़ी को अब जाकर यह बात पता चली है। अब समझा जा रहा है कि यूपीए की सरकार में राफेल डील क्यों नहीं हो सकी? दरअसल कांग्रेस परिवार को उसमें मनमाना कमीशन नहीं मिल रहा था। नरेंद्र मोदी की सरकार जब कांग्रेस सरकारों के समय में हुए देश के रक्षा सौदों की तह में गई तो पता चला कि कांग्रेस के नेता और कांग्रेस नेतृत्व कमीशनखोरी में लिप्त रहे हैं, जिससे देश की रक्षा के मामले में सरकार चुप्पी साधे रही। अब जब कांग्रेस के रक्षा सौदों में कमीशनखोरी के सारे रास्ते बंद हो गए हैं तो सोनिया गांधी परिवार ने राफेल डील को मुद्दा बना लिया है। सच्चाई तो यह बताई जाती है कि कांग्रेस परिवार ने रक्षा सौदों को अपनी आमदनी का जरिया बनाया हुआ था।
कांग्रेस ने आज जब घोषणा पत्र जारी किया तो उसके वादों पर भाजपा सपा-बसपा और दूसरे दलों को उनपर यकीन करने का कोई आधार नहीं दिखाई दे रहा है, क्योंकि जब कांग्रेस की सरकार आने की दूर-दूर तक संभावना नहीं दिख रही है तो ये वादे केवल लोगों को भ्रम में डालने वाले वायदे ही लग रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के घोषणा पत्र की खिल्ली उड़ाई है और इस घोषणापत्र पर कई सवाल खड़े किए हैं। यद्यपि अकेले कांग्रेस ही नहीं, बल्कि देश के जनमानस में भी कांग्रेस के घोषणा पत्र पर यकीन नहीं हो रहा है। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी किसी भी प्रकार से देश की जनता को भ्रम में डालने की कोशिश कर रहे हैं और उनके पीछे कई ऐसी ताकतें हैं, जो केंद्र में फिर से भारतीय जनता पार्टी की नरेंद्र मोदी की सरकार की वापसी नहीं चाहती हैं, इनमें भारत का दुश्मन पाकिस्तान भी शामिल है, जो भारत में राहुल गांधी की सरकार बनने की कैम्पेन चला रहा है। भारत के लोकसभा चुनाव का सच यह है कि यह चुनाव सारे गठबंधन से ऊपर जा चुका है। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन को अपनी जमीन बचानी मुश्किल पड़ रही है और कांग्रेस बिन मांगे सपा-बसपा गठबंधन को 7 सीटें देने की घोषणा कर रही है। कांग्रेस की नीति अपनी साख बचाने पर आ‌धारित है। लोकसभा चुनाव की दिशा धीरे-धीरे सामने आ रही है, चुनाव में जिस प्रकार तेजी से ध्रुवीकरण होता दिख रहा है, उसे देखते हुए कांग्रेस की घोषणाएं निष्प्रभावी होती दिख रही हैं। राहुल गांधी केवल लोगों में भ्रम पैदा कर रहे हैं, जबकि उनके सामने उत्तर प्रदेश से ही अपनी दोनों सीट बचाने की चुनौती है।

बिहार के जमुई में बोले पीएम मोदी, कोई नहीं हटा सकता आरक्षण

महासंग्राम में बदल चुकी लोकसभा चुनाव 2019 की लड़ाई दिनों दिन दिलचस्प होती जा रही है। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की ताबड़तोड़ रैलियां जारी है, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी चुनावी मिशन में तेजी से लगे हुए हैं।

बिहार के जमुई में पीएम मोदी: मैं चाहता हूं कि बिहार के लोग ऐसे लोगों को करारा जवाब दें जो आरक्षण को लेकर अफवाहें फैला रहे हैं। मोदी हो या कोई और, आरक्षण कोई नहीं हटा सकता। याद कीजिए, कांग्रेस ने संविधान के निर्माता डॉ. बाबा साहब अंबेडकर के साथ कैसा व्यवहार किया। कांग्रेस ने उन्हें हराने के लिए कई षड्यंत्र किए। जरूरी है कि आज का युवा ये सारी चीजें जाने।

पीएम मोदी ने कहा कि बिहार के लोगों को, देश के पिछड़े समाज को कहना चाहता हूं कि मोदी ही क्या कोई भी आपके आरक्षण को नहीं हटा सकता सामान्य वर्ग का आरक्षण अलग से बनाई व्यवस्था है, उससे पिछड़ों के आरक्षण पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। आरजेडी की सरकार ने बिहार की क्या हालत कर दी थी, यह सभी जानते हैं. एनडीए ने बिहार की स्थिति को बदलने की ईमानदार प्रयास किया है। पीएम मोदी ने कहा कि जमुई, मुंगेर, नवादा में सस्ती गैस और सीएनजी गांड़ियों चलाने के इंतजाम किए जा रहे हैं।

मोदी ने कहा कि गरीबों और पिछड़ों के नाम पर आज के राजघराने सिर्फ अपना विकास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा दिलाना चाहती थी लेकिन कांग्रेस की सरकार ने इसे लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई। एनडीए की सरकार ने जब बनी तो हमारी सरकार ने फिर से इसके लिए कदम बढ़ाया तो विपक्ष ने अड़चने लाना शुरू कर दीं। लेकिन हमारी नियत साफ थी इसी वजह से हमारी सरकार ने कमीशन को संवैधानिक दर्जा देने का काम किया है। पीएम ने कहा कि युवा को याद रखना चाहिए कि कांग्रेस ने संविधान निर्माता बाबा साहब के साथ क्या सलूक किया था और उनकी याद को जनमानस के मन से हटाने के प्रयास किए। बाबा साहब को भारत रत्न एनडीए की सरकार में ही दिया गया, यह लोग तो अपने परिवार को भारत रत्न बांटते रहे। जो लोग बाबा साहब को पूज्यनीय मानते हैं वह लोग कांग्रेस का साथ नहीं दे सकते।

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