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27 जनवरी को MP में होगी कांग्रेस की बैठक

भोपाल  26 जनवरी 2019 । विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस ने तैयारियां शुरु कर दी है। इसके लिए 27 जनवरी को राजधानी भोपाल में अहम बैठक बुलाई गई है। मिली जानकारी के अनुसार, बैठक समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह करेंगे और चुनाव की तैयारियाों और रणनीतियों को लेकर मंथन किया जाएगा। वहीं बैठक में प्रभारी मंत्री जिलों की रिपोर्ट सौंपेंगें और बताएंगे की वर्तमान में जिलों की स्थिति कैसी है। वही सभी से राय ली जाएगी कि किन मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ा जाना चाहिए। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए क्या जाना चाहिए। साथ ही राहुल-प्रियंका की सभाओं को लेकर भी चर्चा की जाएगी। इस बैठक में प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया और सीएम कमलनाथ भी मौजूद रहेंगें।

दरअसल, इस बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का फोकस एमपी की 24 सीटों पर है। विधानसभा चुनाव की तरह एकजुट होकर कांग्रेस फिर भाजपा के अभेद किलो में सेंध लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए पार्टी ने फिर पूर्व मुख्य मंत्री दिग्विजय सिंह पर भरोसा जताया है। लिहाज़ा लोकसभा चुनाव में भी दिग्विजय सिंह समन्वय समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। उन्हें ही आगामी चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी के चलते 27 जनवरी को राजधानी भोपाल में बैठक बुलाई गई है, जिसमें लोकसभा चुनाव को लेकर चर्चा की जाएगी। इसमें बीजेपी को घेरने की रणनीति, कर्जमाफी से किसानों को साधने, टिकट बंटवारे और मंत्री पद की मांग किए हुए विधायकों को मनाने संबंधी बातों को लेकर मंथन किया जाएगा। हालांकि उम्मीदवारों का चयन सर्वे के आधार पर ही किया जाएगा।

बैठक में पूछेंगें दिग्विजय किन मुद्दों पर लड़ा जाए चुनाव
इसके अलावा सभी से राय ली जाएगी कि किन मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ा जाना चाहिए। ऐसे कौन से कार्य है जिन्हें सरकार को प्राथमिकता से करना चाहिए ताकि लोकसभा चुनाव में पार्टी को फायदा मिल सके। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए क्या जाना चाहिए। बैठकों में प्रशिक्षण सत्रों को लेकर भी कार्यक्रम तय होंगे। इसके अलावा घोषणा पत्र को लेकर भी चर्चा की जा सकती है। खबर है कि इस बार घोषणा पत्र में विधानसभा चुनाव की तरह पार्टी किसानों को फिर बड़ी सौगात दे सकती है। इस बैठक में सीएम कमलनाथ और प्रदेश प्रभारी दीपक बावारिया भी मौजूद रहेंगे। हालांकि सिंधिया इस बैठक में शामिल होंगें या नही यह अभी तक स्पष्ट नही हो पाया है, क्योंकि हाल में उन्हें यूपी का महासचिव बनाया है, जिसके चलते वे प्रियंका के साथ अपना पूरा फोकस यूपी पर किए हुए है।

सरदार सरोवर पर मोदी की नाक में दम कर देगी मध्यप्रदेश सरकार, जानें कैसे

लोकसभा चुनाव के ऐन पहले मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार से टकराने की तैयारी कर ली है। गुजरात को भारी फायदा पहुंचाने वाले सरदार सरोवर बांध के ठेकों की जांच कराने का फैसला हो गया है। मोदी सरकार बनने के बाद बांध की ऊंचाई को लेकर मध्यप्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार की खामोश भूमिका के दस्तावेज भी तलाशे जाने लगे हैं। दोनों मामलों में एक हाईपॉवर कमेटी बनाकर जांच कराई जाएगी। दरअसल, विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार के हाथ से तीन महत्वपूर्ण राज्य मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान फिसलकर कांगे्रस के पास चले गए हैं, इसलिए लोकसभा चुनाव के पहले मोदी की गुजरात नब्ज पर अटैक करने की रणनीति तैयारी है।
– भाजपा के भ्रष्टाचार पर जांच, रिपोर्ट तलब
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने सरदार सरोवर बांध से जुड़ी सभी परियोजनाओं के ठेकों की पूरी रिपोर्ट तलब की है। इसमें पूछा गया है कि 15 सालों में परियोजना के तहत कहां-कितने निर्माण हुए और कौन सा निर्माण कार्य कब शुरू हुआ, कब पूरा हुआ। ठेका किसका व कितने का था। इसमें कितना भुगतान हुआ और कौन सी शिकायतें मिली थीं। दरअसल, नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेघा पाटकर लगातार आरोप लगाती रही हैं कि 15 सालों में परियोजना के सारे काम भाजपा से संबंधित ठेकेदारों को दिए गए। कांग्रेस भी इसमें भ्रष्टाचार के आरोप विपक्ष में रहते हुए लगाती रही है। इसमें 1500 करोड़ से ज्यादा के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। इतना ही नहीं कैग ने भी 470 करोड़ से ज्यादा की गड़बडिय़ों को विभिन्न रिपोर्ट में उजागर किया था, जिसे पूर्ववर्ती सरकारों ने दबा दिया था। इनकी जांच कराने की तैयारी कांग्रेस सरकार कर रही है।

– सरदार सरोवर बांध से गुजरात को फायदा
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पहले 15 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान मोदी ने सरदार सरोवर बांध को लेकर लगातार गुजरात के फायदे के लिए काम किया, जिससे मध्यप्रदेश को नुकसान के हालात बने। तब तक मध्यप्रदेश सरकार सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने का विरोध करती रही थी, लेकिन जब मोदी पीएम बने तो महज 20 दिन के कार्यकाल के बाद ही ऊंचाई बढ़ाने की मंजूरी दे दी थी। मध्यप्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार ने इसका विरोध नहीं किया। जबकि, ऊंचाई 121.92 से बढ़ाकर 138.68 करने पर मध्यप्रदेश का डूब प्रभावित क्षेत्र बढ़ जाना था, इसलिए कांग्रेस ने अब भाजपा के जाने के बाद इस पूरे केस के दस्तावेज तलब किए हैं। पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण इसमें कानूनी पक्ष भी देखा जाना है।
– वचन-पत्र में अहम वादा
कांग्रेस ने चुनाव के पहले जो वचन-पत्र रूपी घोषणा पत्र दिया था, उसमें भी सरदार सरोवर बांध परियोजना सहित नर्मदा घाटी के भ्रष्टाचार की जांच का वादा था। इसमें एक हाईपॉवर कमेटी बनाकर जांच कराने की बात कही गई थी, इसलिए परियोजना की पूरी रिपोर्ट बुलाकर जांच कराने के लिए कदम उठाए गए हैं। अगले महीने तक हाईपॉवर कमेटी भी बनाई जा सकती है।
– सरदार सरोवर बांध
– 80 मीटर से ज्यादा ऊंचाई रखने पर 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक
– 90 मीटर ऊंचाई 2001 में करने की कोर्ट ने मंजूरी दी
– 110.4 मीटर ऊंचाई करने की मंजूरी 2004 में दी गई
– 121.92 मीटर ऊंचाई की मंजूरी 2006 में नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण से मिली
– 138.68 मीटर ऊंचाई 2014 में मोदी सरकार ने मंजूर कर दी
– 138.68 मीटर ऊंचाई होने से मध्यप्रदेश के 192 गांव व 40 हजार लोग डूब से प्रभावित

सरदार सरोवर बांध परियोजना के सभी निर्माण कार्यों की पूरी रिपोर्ट बुलाई है। इनके भ्रष्टाचार की जांच कराना हमारी प्राथमिकता में है। बांध की ऊंचाई बढ़ाने को लेकर भी जानकारी मांगी जा रही है। इसमें देखा जाएगा कि कही गुजरात को फायदा पहुंचाने के लिए पिछली भाजपा सरकार ने मध्यप्रदेश के हितों को नजरअंदाज तो नहीं किया है।

MP के CM कमलनाथ ने अडानी सहित कई उद्योपतियों से की मुलाकात, जानें क्या हुई बात

स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे विश्व आर्थि‍क मंच (WEF) में मध्य प्रदेश के मुृख्यमंत्री कमलनाथ शामिल हुए ताकि प्रदेश में निवेश के लिए दुनिया भर के उद्योगपति को प्रेरित कर सकें. इस दौरान उन्होंने गौतम अडानी सहित कई भारतीय उद्योगपतियों से भी मुलाकात की.

दावोस में कमलनाथ की कई उद्योगपतियों से हुई मुलाकात

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक सम्मेलन (WEF) में अडानी समूह के गौतम अडानी सहित कई प्रमुख उद्योगपतियों से मुलाकात की है. उन्होंने मध्य प्रदेश में निवेश की संभावनाओं के बारे में इन उद्योगपतियों से चर्चा की.

MP CM ने देश के बड़े उद्योगपतियों से अलग-अलग भेंट कर उन्हें मध्य प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया. सीएम ऑफिस के मुताबिक इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ सभी उद्योगपतियों ने उत्साहपूर्वक चर्चा की और प्रदेश में हर प्रकार की संभावनाओं को तलाश कर निवेश करने का भरोसा दिया. गौरतलब है कि अडानी समूह कोयला व्यापार, कोयला खनन, बिजली आदि जैसे विविध कारोबार करने वाली कंपनी है, जिसका मुख्यालय मुम्बई में है. अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी हैं.

समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक विश्व आर्थिक मंच पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अडानी ग्रुप के गौतम अडानी, वेलस्पन ग्रुप के बी.के. गोयनका, डालमिया ग्रुप के पुनीत डालमिया, भारत फोर्ज के अमित कल्याणी, ट्राइडेंट ग्रुप के राजेंद्र गुप्ता, अदाणी पावर के अनिल सरदाना, अमर राजा ग्रुप के जयदेव गल्ला, वी ई कॉमर्शियल्स के राहुल राय, आईनॉक्स ग्रुप के सिद्धार्थ जैन, सन ग्रुप के शिव खेमका, ट्राईमेक्स ग्रुप के प्रदीप कोनेरू, आरएमजेड कॉर्प के मनोज मेंडा, भारती इंटरप्राइजेज के राकेश भारती मित्तल, रिन्यू पावर के सुमंत सिन्हा, सुजलॉन एनर्जी के तुलसी तांती और लुलु ग्रुप के एम़ ए़ यूसुफ अली से मुलाकात की.

इस मुलाकात को मुख्यमंत्री ने सभी उद्योगपतियों को प्रदेश की निवेश नीतियों और राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया. उद्योगपतियों के साथ मुलाकात में मुख्यमंत्री के साथ मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव एस आर मोहंती, प्रमुख सचिव उद्योग मोहम्मद सुलेमान और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल भी मौजूद थे.

दावोस में सीआईआई और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा एक ‘इन्वेस्ट मध्य प्रदेश’ कॉन्फ्रेंस का भी आयोजन किया गया. इस मौके पर मुख्यमंत्री नाथ ने इसमें शामिल उद्योगपतियों को मध्य प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया.

कॉन्फ्रेंस में दुबई के प्रमुख लूलू ग्रुप के एमए यूसुफ अली ने मुख्यमंत्री कमल नाथ को भरोसा दिया कि कंपनी द्वारा मध्य प्रदेश में कन्वेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी. यूसुफ अली केरल मूल के हैं. वेलस्पन ग्रुप के बी़. के. गोयनका ने वाटर सप्लाई और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का भरोसा दिया. ट्राईडेंट ग्रुप के राजेंद्र गुप्ता ने प्रदेश में शीघ्र ही टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश करने का भरोसा दिया, जिसमें 10 हजार लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं पैदा होंगी.

13 आइएएस अधिकारियों का छिंदवाड़ा प्रवास
छिंदवाड़ा. भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक दर्जन से अधिकारी अधिकारी छिंदवाड़ा प्रवास पर हैं।
कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री कमल नाथ के माध्यम से छिंदवाड़ा जिले में विभिन्न क्षेत्रों में विकास और उन्नति के विभिन्न आयाम स्थापित हुए हैं जिनकी छिंदवाड़ा मॉडल के रूप में अपनी पहचान है। सभी मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अपनी तीन दिनों की प्रशिक्षण अवधि में छिंदवाड़ा में रहकर जिले की विकास प्रक्रिया को देखें और गहन विचार विमर्श कर इसका आकलन करें।
इस जिले की विकास प्रक्रिया की जानकारी और विकास कार्यों को देखकर उनसे प्रेरित होंगे और अपने कार्य क्षेत्र में नए अनुभव के साथ कार्य कर सकेंगे।
बता दें कि आरसीवी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में मध्यप्रदेश कैडर के वर्ष 2017 के भारतीय प्रशासनिक सेवा के 13 परीवीक्षाधीन अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर ने परिचयात्मक बैठक ली।
कलेक्टर ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री काफी लम्बे समय से जिले में सांसद के साथ ही केंद्रीय मंत्री भी रहे। उन्होंने देश और विदेशों में भ्रमण कर नवीन पद्धतियों और योजनाओं को देखा है तथा उनका छिंदवाड़ा जिले में नई योजनाओं और कार्यप्रणाली को लाने और लागू कराने का श्रेय रहा है। वे फीडबैक लेंगे तो इससे कई गलतियां और खामियां दूर करने में मदद मिलेगी ।
ोशाला का अवलोकन किया
गुरुवार को इन प्रशिक्षु कलेक्टरों ने
संस्कृत पूस्तौकौन्वित सभा द्वारा संचालित गोशाला का अवलोकन किया। अधिकारियों ने गोशाला की व्यवस्था और प्रबंधन के बारे में संचालकों से जानकारी ली तथा यहां की जा रही जैविक खेती के बारे में विस्तार से समझा। उन्होंने आश्रम प्रबंधक की खूब सराहना की।
अधिकारियों ने देखा कि गोशाला में गायों के रहने की व्यवस्था बेहतर ढंग से की गई है। कत्लखाने से बचाई गई गायों को अलग, दूध देने वाली गाय अलग, गर्भवती गाय अलग, बछड़े अलग तथा
बुजुर्ग और बीमार गायों को अलग-अलग रखा है। इन सब के खानपान और देखरेख की उचित व्यवस्था की गई है। अधिकारियों ने यहां जैविक खेती का सुंदर नजारा देखा और जैविक खेती के महत्व से अवगत हुए। इस भ्रमण कार्यक्रम के दौरान आइएएस अधिकारियों के अलावा पशु विभाग के डॉ. टांडेकर, डॉ. डीडी भूतेकर, कृषि विभाग के धीरज ठाकुर, आश्रम के संचालक जयराम भाई, समिति के अध्यक्ष मदनमोहन परसाई आदि भी उपस्थित थे।

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