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कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी 17 सितंबर को भोपाल आएंगे, तीन घंटे होगा रोड-शो

भोपाल 15 सितम्बर 2018 । कांग्रेस के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत 17 सितंबर सोमवार को भोपाल से करेंगे।

राहुल गांधी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करने के अलावा तीन घंटे तक लालघाटी से लेकर भेल दशहरा मैदान तक रोड शो करेंगे। जानकारी के अनुसार राहुल गांधी बस में रोड शो करेंगे। राहुल गांधी दोपहर पौने एक बजे विमान से भोपाल के राजा भोज विमानतल पर पहुंचेंगे।

एयरपोर्ट से संकल्प यात्रा शुरू होगी। एयरपोर्ट से कारों के काफिले के साथ गांधीनगर, आरजीपीवी तिराहा, सिंगारचोली होते हुए लालघाटी पहुंचेंगे। लालघाटी से वे बस में रोड-शो करेंगे। रोड-शो लालघाटी से वीआईपी गेस्ट हाउस, कलेक्टर कार्यालय, जीएडी फ्लाईओवर, हमीदिया अस्पताल, इमामी गेट से आंबेडकर लाइब्रेरी, सदर मंजिल होते हुए मोती मस्जिद पहुंचेगा।वहां से कमला पार्क, पॉलीटेक्निक चौराहा, रोशनपुरा, अपेक्स बैंक तिराहा, लिंक रोड नंबर एक, पीसीसी, बोर्ड ऑफिस चौराहा, चेतक ब्रिज, अन्ना नगर होते हुए शाम चार बजे कार्यकर्ता संवादस्थल भेल दशहरा मैदान में पहुंचेंगे। यहां वे डेढ़ घंटे तक कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने बताया कि राहुल गांधी भेल दशहरा मैदान पर करीब 15 हजार नेता और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करेंगे।

पासवान के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ेगी बेटी आशा

बिहार की लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की बेटी आशा पासवान ने पिता के खिलाफ ताल ठोंक दी है। उन्होंने पिता के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। गुरुवार को आशा पासवान ने कहा कि अगर उन्हें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से टिकट मिलता है, तो वह हाजीपुर लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ेंगी।

बताते चलें कि रामविलास पासवान भी हाजीपुर सीट से ही चुनाव लड़ते हैं। आशा ने कहा कि रामविलास पासवान ने सिर्फ अपने बेटे और जमुई सांसद चिराग पासवान को ही आगे बढ़ाया। लड़की होने की वजह से मेरे साथ भेदभाव किया। आशा ने कहा कि मुझे तवज्जो नहीं दी गई, जबकि चिराग को एलजेपी संसदीय दल का नेता बना दिया गया।

उन्होंने कहा कि अगर आरजेडी मुझे टिकट देती है, तो मैं हाजीपुर से चुनाव लडूंगी। बताते चलें कि रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी की दो बेटियां हैं, जिनमें से एक आशा है। पासवान ने 1981 में राजकुमारी को तलाक देने के बाद 1983 में रीना से शादी की थी। दूसरी पत्नी रीना से पासवान का बेटा चिराग और एक बेटी है।

गौरतलब है कि आशा के पति अनिल साधु पासवान की पार्टी की दलित सेना के प्रदेश अध्यक्ष थे। मगर, पासवान से मतभेदों के बाद इसी साल मार्च में वह लोजपा से इस्तीफा देकर राजद में जुड़ गए थे। अनिल ने भी बुधवार को कहा था कि वह अपने ससुर के खिलाफ हाजीपुर से चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर राजद मुझे या मेरी पत्नी को टिकट देती है, तो हम पासवान परिवार के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगे।

अब पुजारियों पर सरकार की नजर

भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले दस साल से राज्य सरकार इस पशोपेश में है कि मंदिरों की जमीन पुजारियों को दी जाए या फिर कुछ कृषि भूमि छोड़कर नीलाम कर दी जाए या फिर उन्हें ही लीज पर दे दिया जाए। वर्ष 2008 में सरकार ने जमीन की नीलामी पर रोक लगाई थी, तब से धर्मस्व विभाग एक-एक साल के लिए अवधि बढ़ाता चला आ रहा है।

साधु-संत सरकार के इस कदम का लगातार विरोध कर रहे थे, पर इस बारे में अंतिम फैसला अब तक नहीं हो पाया है। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के चलते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जल्द ही पुजारियों को खुश करने के लिए उनकी पंचायत बुलाकर मंदिरों से सरकारी नियंत्रण पूरी तरह खत्म करने की घोषणा करना चाहते हैं।प्रदेश के मंदिरों की हजारों एकड़ कृषि भूमि की नीलामी को लेकर सरकार दस साल से परेशान है। साधु-संतों के विरोध के चलते राज्य सरकार इस मामले में फैसला ही नहीं कर पा रही है। राजस्व विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव आरके चतुर्वेदी ने धर्मस्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के पास मंदिरों की जमीन को नीलाम करने का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। मामला संवेदनशील होने के कारण मंत्री यशोधरा राजे ने इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चर्चा के लिए भेज दिया। तब से उक्त प्रस्ताव ठंडे बस्ते में है।जानकारी के अनुसार तत्कालीन प्रमुख सचिव चतुर्वेदी द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मंदिरों की जमीन का उपयोग वहां के पुजारी कर रहे हैं। यदि सरकार 10 एकड़ भूमि छोड़ कर शेष भूमि को राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) के प्रावधानों के अनुसार नीलाम कर लीज पर दे तो मंदिरों का बेहतर रख-रखाव और जीर्णोद्धार किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 से पहले आरबीसी के प्रावधानों के अनुसार 10 एकड़ से अधिक कृषि भूमि को नीलाम या लीज पर देकर मंदिरों का रखरखाव किया जाता था। पुजारियों को अपने भरण-पोषण के लिए 10 एकड़ जमीन के उपयोग की अनुमति दी जाती थी।

इसके अतिरिक्त पुजारियों को प्रतिमाह मानदेय देने का प्रावधान है। यह मामला सीएम सचिवालय के पास है, इसका अंतिम फैसला मुख्यमंत्री को लेना है। इस बारे में धर्मस्व विभाग से लेकर कोई भी अधिकारी किसी तरह बातचीत को तैयार नहीं है। उधर, पंडित ओंकार दुबे कहते हैं कि सरकार को मठ-मंदिरों पर किसी भी तरह का कानून नहीं लादना चाहिए। उन्हें सरकारी नियंत्रण से भी मुक्त किया जाना चाहिए।

कांग्रेस और बीजेपी में उम्मीदबार चयन का काम अंतिम दौर में ,दावेदारों की बेचैनी बड़ी

मध्यप्रदेश बिधान सभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी में उम्मीदबार चयन का काम अंतिम दौर में है. ऐसे में
टिकिट के दावेदारों की बेचैनी बढ़ गई है .सूत्रों के अनुसार दोनों ही दल अपनी -अपनी पहली सूची को अंतिम रूप देने में लगे हैं .भोपाल में टिकिट के दावेदारों की भीड़ बढ़ गई है .खबर है की कड़वे दिनों से पहले या नवदुर्गा महोत्स्व के दौरान कुछ दावेदारों को मीठी खबर मिल सकती है .बरहाल दावेदार टिकिट की चाहत में अपनी अपनी गोटियां फिट करने में लगे हुए हैं .

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