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सत्ता में लौटने की तैयारी में कांग्रेस! चिदंबरम बना रहे हैं कर्ज़ माफ़ी का ब्लूप्रिंट

नई दिल्ली 6 दिसंबर 2018 । मध्यप्रदेश में कांग्रेस को लग रहा है कि वो किसानों की कर्ज़ माफ़ी के रास्ते सत्ता पर काबिज होने जा रही है. इसका फैसला तो हालांकि 11 दिसंबर को ही होगा. लेकिन कांग्रेस ने सरकार बनाने की संभावना को देखते हुए अपना काम शुरू कर दिया है. कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती मध्यप्रदेश के 85 लाख से ज़्यादा किसानों की कर्ज़माफ़ी है. उन्हें लेकर किए गए कई लोक – लुभावन वादे हैं. जिन्हें पूरा करना इतना आसान नहीं है.

मध्यप्रदेश में कांग्रेस को लग रहा है कि वो किसानों की कर्ज़ माफ़ी के रास्ते सत्ता पर काबिज होने जा रही है. इसका फैसला तो हालांकि 11 दिसंबर को ही होगा. लेकिन कांग्रेस ने सरकार बनाने की संभावना को देखते हुए अपना काम शुरू कर दिया है. कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती मध्यप्रदेश के 85 लाख से ज़्यादा किसानों की कर्ज़माफ़ी है. उन्हें लेकर किए गए कई लोक – लुभावन वादे हैं. जिन्हें पूरा करना इतना आसान नहीं है.
10 दिन चुनौती पूर्ण
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार बनने के दस दिन के अंदर कर्ज़माफ़ी की घोषणा की है. मतदान निपटने के बाद अब प्रदेश अध्यक्ष कमलाथ, दिग्विजय सिंह औपर बाकी नेताओं ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के साथ मिलकर ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. वैसे तो चुनावी वचन पत्र के साथ ही इसकी प्लानिंग की गई है लेकिन सरकार बनते ही सबसे पहला काम किस तरह हो इसके लिए ये कवायद चल रही है. अनुमान है कि 75 हजार करोड़ से ज़्यादा का कर्ज़ है. इसका भुगतान कांग्रेस को सरकार बनते ही करना होगा. प्रदेश के छोटे, सीमांत और काश्तकारों को मिलाकर 85 लाख किसान हैं.
सीनियर अधिकारी दे रहे राय
मध्य प्रदेश 1.85 लाख करोड़ के कर्ज़ में डूबा है. ख़राब आर्थिक हालत देखते हुए कांग्रेस ने उन स्रोतों को खोजना शुरू कर दिया है जिनके रास्ते वो किसानों का कर्ज़माफ़ कर सके. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ बाकायदा कुछ सीनियर अधिकारियों और फाइनेंस एक्सपर्ट्स से राय ले रहे हैं. इनमें कई सीनियर आइएएस अफसर हैं तो कई पूर्व मुख्य सचिव स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं.
8 हज़ार करोड़ का सालाना प्रीमियम
कांग्रेस ने वचन पत्र में दो लाख रु. तक की कर्ज़माफ़ी का वादा किया है. प्रदेश की सहकारी संस्थाओं और राष्ट्रीयकृत बैंकों से ये किसानों ने ये कर्ज़ लिया है. प्रदेश से हर साल मिलने वाले राजस्व के अनुमान को देखते हुए बैंकों से सेटलमेंट करने का प्रारूप तैयार किया जा रहा है. एक्सपर्ट्स की राय ये है कि 70 हजार करोड़ के लोन को 40 हजार करोड़ तक में तय किया जा सकता है. साथ ही पांच साल की मुद्दत लेकर इस भारी भरकम कर्ज़ से निपटा जा सकता है. इसमें 8 हजार करोड़ प्रीमियम का हर साल भुगतान करना होगा. इससे किसान को सीधे राहत मिल जाएगी.
छह माह से कर्ज़ चुकाना बंद
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि मंदसौर में जून में राहुल गांधी ने किसानों की कर्ज़माफ़ी का एलान किया था. इसका ज़बर्दस्त असर गांवों में देखा गया. बड़ी संख्या में किसानों ने कर्ज़ चुकाना बंद कर दिया. सहकारी बैंकों की वसूली 90 फीसदी तक गिर गई है.. घोषणा से पहले किसान की कर्ज़ अदायगी 3 हजार करोड़ थी. जो छह महीनों में 261 करोड़ तक आ गई है.सरकार बनती है तो अधोसंरचना और विकास के काम प्रभावित ना हों इसके लिए भी एक ब्लूप्रिंट तैयार हो रहा है. प्रदेश की माली हालत बहुत ख़राब है, इसलिए नई सरकार को कर्ज़माफ़ी का वादा भारी ना पड़ जाए इसकी भी तैयारी हो रही है.
किसानों के लिए पेंशन सहित कई घोषणाएं
सिर्फ किसान कर्ज़माफ़ी ही नहीं और भी कई कई घोषणाएं कांग्रेस वचन पत्र में की गई हैं.इनमें यूपीए सरकार के समय की स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करना, सिंचाई के लिए बिजली दर आधा,र नई फसल बीमा योजना, किसानों के जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा के साथ किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाना शामिल है.
इनके अलावा 60 साल के किसानों को 1000 रुपए प्रतिमाह पेंशन, छोटे किसानों की बेटियों की शादी के लिए 51,000 रुपए की मदद,फूलों की खेती ,फूड प्रोसेसिंग पार्क बनाने का भी ऐलान और पान उत्पादन के लिए नया कॉरपोरेशन और अनुसंधान केंद्र बनाने का मामला भी वचन पत्र में है.

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