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मध्य प्रदेश को दक्षिण भारत न बनने देने की कोशिश में कांग्रेस

नई दिल्ली 13 जुलाई 2019 । कर्नाटक और गोवा में कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद मध्य प्रदेश की सियासत में भी उठापठक जारी है। प्रदेश में भी दक्षिण जैसा कारनामा न हो इसके लिए कांग्रेस सतर्क हो गई है। प्रदेश कांग्रेस के मुखिया और मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने मंत्रियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने मंत्रियों से कहा है कि वह विधायकों पर नज़र बनाए रखे। हर मंत्री को तीन विधायकों को जिम्मेदारी दी गई है। यह दावा मीडिया रिपोर्ट में किया गया है।पार्टी सूत्रों के हवाले से खबर में कहा गया है कि बजट से एक दिन पहले रविवार को हुई बैठक में कमलनाथ ने हर एक मंत्री को तीन विधायकों पर नज़र रखने की जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही निर्दलीय और अन्य दल के विधायकों पर भी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। इन सब हालातों को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने एक बार फिर अपने पुराने बयाने को दोहराते हुए कहा है कि कमलनाथ सरकार सत्ता में आने के पहले दिन से ही खतरे में है। दूसरी ओर कांग्रेस अपने विधायकों की निगरानी करवा रही है। विधायक किस से मिल रहे हैं कहां जा रहे हैं ये सब जानकारी पार्टी को मिल रही है।

गोपाल भार्गव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के इस तरह के निर्देश से यह बात साफ हो गई है कि पार्टी अपने विधायकों पर पूरी तरह से भरोसा नहीं कर रही है। अगर ऐसा नहीं होता तो सीएम कमलनाथ क्यों मंत्रियों को निगरानी करने के निर्देश देते। वहीं, बीजेपी ने कभी अपने मंत्रियों को बीते 15 साल की सरकार में ऐसे निर्देश नहीं दिए। कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के दावे के नकारते हुए कहा कि बीजेपी भले कर्नाटक में विधायकों की खरीद फरोख्त में कामयाब हो गई हो लेकिन वह एमपी में कभी कामयाब नहीं हो पाएगी। बीजेपी लगातार झूठी अफवाह फैला रही है, मुख्यमंत्री कमलनाथ कह चुके हैं कि वह कभी भी फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हैं।

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