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मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह के इशारों पर नाचेगी कांग्रेस, 2023 में यूं बिगड़ेगा कमलनाथ का खेल!

भोपाल 2 मई 2022 । मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की मुश्किलें बढ़ती हुई दिख रही हैं। खास बात यह है कि कमलनाथ की मुश्किलें भाजपा नहीं, बल्कि कांग्रेस के ही नेता दिग्विजय सिंह बढ़ा रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी में जिस तरह से दिग्विजय की पैठ होती जा रही है, उससे चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे में कमलनाथ के पसीने छूट सकते हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के विरोधी माने जाने वाले दिग्विजय सिंह धीरे-धीरे पीसीसी के पदों पर अपने लोगों को बैठाते जा रहे हैं। कार्यकारी अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष से लेकर कई पदाधिकारियों की फौज और युवा-महिला कांग्रेस-सेवादल व नेता प्रतिपक्ष तक दिग्विजय सिंह के समर्थक हैं। दिग्विजमय होती जा रही कांग्रेस से आने वाले विधानसभा चुनाव में कमलनाथ को उनके समर्थकों के टिकट को काटने में काफी परेशानी होगी।

मध्य प्रदेश कांग्रेस में एक मई को कमलनाथ चार साल पहले कमान संभाली थी लेकिन तब उनके साथ जो लोग थे आज वे उनके सामने ही चुनौती बनते जा रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया की वजह से दिग्विजय ने कमलनाथ का साथ दिया था और सरकार बनने के बाद भी वे विधायक नहीं होते हुए भी सरकार में सीधा दखल करते थे। इसके बाद जब सरकार गिर गई तो धीरे-धीरे कमलनाथ-दिग्विजय सिंह के बीच रिश्तों में दूरियां आती गईं। हाल में जब दिग्विजय सिंह अपने बंगले के सामने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ धरना दे रहे थे तो कमलनाथ के साथ उनका सड़क पर जो संवाद हुआ, उससे दोनों के बीच के खटास भरे रिश्ते सार्वजनिक हो गए थे। दिग्विजय समर्थक संगठन पर होते जा रहे काबिज
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह प्रदेश कांग्रेस में अपने समर्थकों को बैठाने में निरंतर कामयाब होते जा रहे हैं और प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ अकेले पड़ते जा रहे हैं। कमलनाथ ने अपनी कार्यकारिणी में विधानसभा चुनाव, लोकसभा उपचुनाव के दौरान असंतुष्ट नेताओं को नियुक्ति पत्र बांटकर काफी बड़ी संख्या में पदाधिकारी बना दिए थे जिसमें उपाध्यक्ष-महासचिव और सचिवों के साथ प्रवक्ता और जिलों में कार्यकारी अध्यक्ष शामिल हैं। वहीं, दिग्विजय सिंह ने नए पदाधिकारियों में युवा कांग्रेस-महिला कांग्रेस, सेवादल की नियुक्तियों में अपने समर्थकों को बैठा दिया है तो नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह भी उनके साथ ही हैं। युवा कांग्रेस अध्यक्ष विक्रांत पूर्व पीसीसी अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के बेटे हैं जो दिग्विजय सिंह के निकट हैं। सुरेश पचौरी-अजय सिंह गुटीय राजनीति से दूर हुए
कमलनाथ के साथ एक समय प्रदेश कांग्रेस के एक गुट के प्रमुख रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व पीसीसी अध्यक्ष सुरेश पचौरी हैं जिनके समर्थक राजीव सिंह इस समय कमलनाथ के साथ हैं। राजीव सिंह प्रभारी महामंत्री प्रशासन हैं। पचौरी इस समय कांग्रेस के कार्यकर्ता की तरह ही कमलनाथ के साथ खड़े दिखाई देते हैं। इसी तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. अर्जुनसिंह के पुत्र, वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी इस समय गुटीय राजनीति से दूर हो गए हैं। विंध्य में इस समय कांग्रेस के लिए वह एक चेहरा हैं लेकिन उनके विरोधी बन चुके पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल उनका वहां स्थान लेने की कोशिश कर रहे हैं। माना भी जाता है कि विंध्य में अजय सिंह को कमजोर करने के लिए उनके विरोधियों ने पार्टी के ही कुछ नेताओं का सहारा लिया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व पीसीसी अध्यक्ष अरुण यादव इन दिनों अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में सक्रिय हुए हैं और वे प्रदेश में दौरे कर रहे हैं। मगर उन्हें विधानसभा चुनाव के पहले पीसीसी चीफ से हटाने और लोकसभा उपचुनाव खंडवा में जो झटके लगे हैं, उसको वे शायद ही भूल पाएंगे। पीसीसी में कौन किसका समर्थक
कमलनाथ समर्थक:
प्रभारी संगठन उपाध्यक्ष: चंद्रप्रभाष शेखर
वरिष्ठ उपाध्यक्ष: प्रकाश जैन
मोर्चा समन्वयक-महासचिव: जेपी धनोपिया
अनुसूचित जनजाति अध्यक्ष: अजय शाह
बाल कांग्रेस अध्यक्ष: लक्ष्य गुप्ता
एनएसयूआई अध्यक्ष: मंजूल त्रिपाठी
किसान कांग्रेस अध्यक्ष: दिनेश गुर्जर
मीडिया समन्वयक: नरेंद्र सलूजा

दिग्विजय सिंह समर्थक:
कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष व ग्वालियर ग्रामीण अध्यक्ष: अशोक सिंह
युवा कांग्रेस अध्यक्ष: विक्रांत भूरिया
महिला कांग्रेस अध्यक्ष: विभा पटेल
सेवादल अध्यक्ष: रजनीश सिंह
अनुसूचित जाति मोर्चा अध्यक्ष: सुरेंद्र चौधरी

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