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कोरोना ने LIC को दिया 2 लाख करोड़ रु का झटका

नई दिल्ली 23 मार्च 2020 । कोरोनावायरस ने कारोबार, आयात-निर्यात और शेयर बाजारों को बुरी तरह प्रभावित किया है। कोरोना की वजह से होने वाला नुकसान बढ़ता जा रहा है। शेयर बाजारों को बुरा हाल है, जिसका असर सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी पर भी पड़ रहा है। एलआईसी को कोरोनावायरस की वजह से करीब 2 लाख करोड़ रुपये का झटका लगा है। बता दें कि 2020 में अब तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में करीब 30 फीसदी की गिरावट आयी है, जिससे एलआईसी के पिछले ढाई महीनों में 1.9 लाख करोड़ रुपये डूब गये हैं और ये बड़े खतरे में आ गयी है। एलआईसी को इक्विटी शेयर बाजार के बड़े निवेशकों में गिना जाता है। एलआईसी ने कई लिस्टेड कंपनियों में पैसा लगा रखा है। एलआईसी को ये झटका ऐसे समय पर लगा है जब सरकार इसका आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है। हालांकि शेयर बाजार की हालत को देखते हुए पहले ही तीन कंपनियां आईपीओ की योजना टाल चुकी हैं।

कितनी घटी एलआईसी की संपत्ति
शेयर बाजार कई सालों के निचले स्तर पर फिसल गया है, जिससे रिलायंस सहित ढेरों कंपनियों की मार्केट कैपिटल घट गयी है। एलआईसी की बात करें तो दिसंबर 2019 तक इसके लिस्टेड कंपनियों में 6.02 लाख करोड़ रुपये लगे हुए थे, जिनकी वैल्यू अब घट कर 4.14 लाख करोड़ रुपये रह गयी है। यानी एलआईसी की शेयर संपत्ति 1.88 लाख करोड़ रुपये या 31 फीसदी तक लुढ़क गयी है। इसके पीछे एक ही बड़ा कारण है और वो कोरोनावायरस। एलआईसी की संपत्ति का आकलन बीएसई 500 इंडेक्स की 209 कंपनियों पर आधारित है, जिनमें LIC की 2019 की दिसंबर तिमाही तक 1 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी थी। इन कंपनियों के पास बीएसई की कुल लिस्टेड कंपनियों की कुल बाजार पूंजी में से 65 प्रतिशत है।

किन सेक्टरों ने डुबाया एलआईसी का पैसा
एलआईसी का पैसा जिन सेक्टरों में डूबा है उनमें बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) और बीमा कंपनियां शामिल हैं। इन तीन सेक्टरों ने एलआईसी के 56,810 करोड़ रुपये डुबाये हैं। यानी कुल नुकसान में से 30 फीसदी इन तीन सेक्टरों की भेंट चढ़ा। इसके अलावा ऑयल एंड गैस (36,020 करोड़ रुपये), सिगरेट निर्माता (17,374 करोड़ रुपये), सूचना प्रौद्योगिकी (15,826 करोड़ रुपये), मेटल (12,045 करोड़ रुपये), ऑटोमोबाइल (11,329 करोड़ रुपये) और इन्फ्रास्ट्रक्चर (10,669 करोड़ रुपये) ने एलआईसी को 10000 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई है।

कौन सा सेक्टर सबसे अधिक होगा प्रभावित
जानकार बताते हैं कि कोरोनावायरस के कारण सर्विस सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित होगा, जबकि कृषि सेक्टर सबसे कम प्रभावित होगा। वहीं विनिर्माण सेक्टर इस हद तक प्रभावित होगा कि आपूर्ति की समस्या होने लगेगी। सर्विस सेक्टर में भी उप-विभागों की कुछ कैटेगरी हैं। जैसे कि दूरसंचार काफी हद तक अप्रभावित रह सकता है, मगर होटल, यात्रा और पर्यटन को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इससे एलआईसी सहित सभी निवेशक प्रभावित होंगे। इस बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भी उभरते बाजारों में शेयरों की बिकवाली करके बाहर निकल रहे हैं।

जानिए किस ब्लड ग्रुप के लोगों को कोरोना से सबसे ज्यादा खतरा, रिस्क होने से पहले बचाएं जान

कोरोना वायरस का संक्रमण बड़ी तेजी से फैल रहा है। संक्रमित लोगों की बल्ड टेस्ट के आधार पर ही दवाइयां और इलाज दिया जा रहा है। पर क्या आप जानते हैं कि किस बल्ड ग्रुप के लोगों को कोरोना का ज्यादा खतरा है? हम आपको इसके लेकर सावधानी बता रहे हैं।

कोरोना वायरस के संक्रमण पर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें ब्लड ग्रुप के अनुसार संक्रमित लोगों पर अध्ययन किया गया था। इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह भी दी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से लेकर सभी देश की सरकार अपने नागरिकों के लिए तरह-तरह की हेल्थ एडवाइजरी जारी कर रही है। लोगों को इसके संक्रमण से बचाने में मदद के लिए भारत में भी एक दिन का लॉकडाउन किया गया है।

दो कैटेगरी के ब्लड ग्रुप वाले को खतरा

चीन में हुबेई प्रांत के एक जिनइंतान नाम के अस्पताल में शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के ब्लड ग्रुप का अध्ययन किया। इस रिपोर्ट में दो ब्लड ग्रुप के लोगों में सबसे ज्यादा संक्रमण देखा गया। जारी की गई रिपोर्ट में इस बात का दावा किया जा रहा है कि सबसे ज्यादा खतरा दो कैटेगरी के ब्लड ग्रुप वाले लोगों को है-

ये ब्लड ग्रुप हैं ए (A) और ओ (O) ब्लड ग्रुप क्योंकि इन दोनों ही ब्लड ग्रुप के लोगों ने अधिक जान गंवाई हैं।

रिसर्च के अनुसार यह बताया गया है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले मरीजों की सबसे ज्यादा संख्या ब्लड ग्रुप A से है। रिसर्च में यह देखा गया कि 2173 लोगों में से 206 लोगों की कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से ही मौत हो गई थी जिसमें 85 लोगों का ब्लड ग्रुप एक था। जबकि 52 फ़ीसदी लोग ऐसे थे जिनका ब्लड ग्रुप O था। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह बात स्पष्ट की है कि इन ब्लड ग्रुप वाले लोगों को डरने की कोई भी जरूरत नहीं है।

सावधानी बरतने की जरूरत

कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए सभी लोगों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इसका मतलब आपको कोरोना वायरस के संक्रमण से बचे रहने के लिए जो भी हेल्थ एडवाइजरी अभी तक मिली है उसका जरूर पालन करें और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें।

अगर आपका ब्लड ग्रुप है तो आप बिल्कुल भी ना घबराएं, क्योंकि घबराने के कारण आपका स्ट्रेस बढ़ सकता है और इस कारण आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होगी। हालांकि सावधानी बरतते हुए आप ऐसे क्षेत्रों में ना जाएं, जहां पर कोरोना वायरस का संक्रमण फैला हुआ है और लोगों की भीड़ में भी जाने से बचें। ऐसा करके आप संक्रमण के खतरे को खुद ही रोक सकते हैं।

रिपोर्ट आने के बाद ए ब्लड ग्रुप वाले लोग एहतियात के तौर पर अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए कुछ खाद्य पदार्थों को अपनी डायट में शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा A ब्लड ग्रुप वाले लोगों को कोविड 19 के संक्रमण से बचे रहने के लिए सेफ्टी टिप्स को जरूर फॉलो करें।

EMI भरने से इतने दिन के लिए मिली राहत, कोरोना के कारण आया आदेश

कोरोनावायरस (Coronavirus) के कारण आपको EMI भरने से राहत मिल सकती है. हालांकि उत्तर प्रदेश में कोरोना के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अगले दो हफ्ते यानि 6 अप्रैल, 2020 तक वित्तीय संस्थाओं, बैंकों या सरकारी संस्थाओं द्वारा लोगों से किसी प्रकार की वसूली कार्रवाई पर रोक लगा दी है. उधर, कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट) ने सरकार से इस सीमा को बढ़ाकर 6 महीने करने को कहा है.

कोर्ट ने राज्य सरकार व सभी वित्तीय संस्थाओं, अधिकारियों को दो हफ्ते तक वसूली मामले में व्यक्तिगत उत्पीड़न नहीं करने का निर्देश दिया है. किसी को विवश नहीं किया जाएगा कि वह कोर्ट की शरण में आने को बाध्य हो.

कोर्ट ने कहा है कि दो सप्ताह तक कोई भी नीलामी प्रक्रिया नहीं होगी. किसी के भी मकान का ध्वस्तीकरण नहीं होगा. किसी को भी उसके मकान से बेदखल नहीं किया जाएगा. जिला प्रशासन एवं अर्ध न्यायिक संस्था किसी भी अधिकारी को पेशी के लिए तलब नहीं करेंगी. हाई कोर्ट ने यह कदम कोरोना वायरस की भयावहता को देखते हुए दिया है.

उधर, कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट) के बैनर तले दिल्ली के प्रमुख व्यापारी नेताओं के 3 दिवसीय व्यापार बंद के फैसले के पहले दिन शनिवार को दिल्ली के सभी प्रमुख थोक एवं खुदरा बाज़ार बंद रहे और कोई कारोबार नहीं हुआ.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आग्रह और कोरोना वायरस पीड़ितों की संख्या में बढ़ोतरी को देखते हुए संगठन ने तीन दिन तक के लिए बाज़ार बंद रखने का आह्वान किया है.

हालांकि, दवा, डेरी और खाद्यान्न एवं कॉलोनी में स्थित किराना दुकानों को बंद से मुक्त रखा गया है, जिससे आम लोग अपनी दैनिक जरूरतों का सामान आसानी मिल सके.

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भारतीय और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया की कैट ने देशभर के व्यापारियों को एक परामर्श भी भेजा है जिसमें आग्रह किया गया है की कोरोना के कारण से यदि व्यापार बंद रखना पड़ता है तो किसी भी कर्मचारी का वेतन न काटा जाए तथा किसी को भी नौकरी से निकला नहीं जाए.

उधर, उन्होंने यह भी कहा की देश भर के व्यापारियों की आपूर्ति श्रंखला में प्रचुर मात्रा में सामान उपलब्ध है और लोगों को किसी भी प्रकार की घबराहटपूर्ण खरीददारी नहीं करनी चाहिए. इसी बीच कैट ने वित्त मंत्री और कोविड-19 टास्क फोर्स की अध्यक्ष निर्मला सीतारमण से आग्रह किया है कि आपूर्ति श्रंखला को दुरुस्त रखने के लिए बैंकों को निर्देशित किया जाए की व्यापारियों को रियायती ब्याज दर पर कोरोना कैश लोन उपलब्ध कराया जाये.

कैट ने यह भी आग्रह किया है की कोरोना के संकट को देखते हुए आयकर और जीएसटी में सभी प्रकार की रिटर्न दाखिल करने तथा टैक्स जमा कराने की तारीखों को 30 जून तक बढ़ाया जाए. वहीँ सभी प्रकार के बैंक कर्ज, EMI की किस्त अदायगी को 6 महीनों के लिए स्थगित किया जाना चाहिये.

खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के आग्रह को कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने अपना पूरा समर्थन दिया है. इसके चलते आज देश के 7 करोड़ व्यापारी अपना कारोबार बंद रखेंगे और उनके लगभग 40 करोड़ कर्मचारी भी अपने घरों पर रहकर जनता कर्फ्यू में शामिल होंगे. देश के लगभग 40 हजार से ज्यादा व्यापारिक संगठन भी जनता कर्फ्यू में शामिल होंगे.

इमरजेंसी में बैंक से घर बैठे मंगा सकते हैं पैसा, ये रहा तरीका

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश के तमाम बड़े शहरों में 31 मार्च तक के लिए लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है, ऐसे वक्त में अगर आपको किसी आपातकालीन काम के लिए नकद की जरूरत पड़ती है तो बैंक से घर बैठे धन मंगा सकते हैं। एसबीआई, आईसीआईसीआई, एक्सिस, कोटक जैसे कई बड़े बैंक ग्राहकों के लिए यह सुविधा देते हैं।
आईसीआईसीआई बैंक की वेबसाइट के मुताबिक घर पर कैश डिलिवरी के लिए बैंक की वेबसाइट पर Bank@homeservice लॉगइन करना होता है या कस्टमरकेयर पर फोन करके भी सुविधा से जुड़ सकते हैं। नकद मंगाने के लिए सुबह 9 से दोपहर दो बजे के बीच अनुरोध कर सकते हैं। दो घंटे के भीतर आपको जरूरत का पैसा मिल जाता है। इससे दो हजार से लेकर दो लाख रुपये तक मंगा सकते हैं। इस पर 50 रुपये का एकमुश्त शुल्क और इसी चार्ज पर 18 फीसदी सेवाशुल्क जोड़ लें तो करीब 60 रुपये देने पड़ते हैं।
40 करोड़ ग्राहकों वाला एसबीआई भी डोरस्टेप डिलिवरी के तहत घर पर नकद मंगाने, पैसा जमा करने की सुविधा ग्राहकों को देता है। फिलहाल यह सुविधा सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों या विशेष पंजीकरण वाले ग्राहकों के लिए है। इसका शुल्क 100 रुपये है। देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक एचडीएफसी भी घर पर नकद मुहैया कराता है। इसकी सीमा पांच से 25 हजार रुपये तक हो सकती है। इसके लिए 100 से 200 रुपये तक शुल्क बैंक लेता है। कोटक, एक्सिस और अन्य बैंक भी कुछ शर्तों के साथ ऐसी सेवाएं देते हैं। अनुरोध करने के लिए बैंक के एप का इस्तेमाल कर सकते हैं।

जरूरत पड़ने पर लोन लेना भी संभव:
अगर आपके पास बैंक में रकम नहीं है और तुरंत रकम की जरूरत है तो इंस्टैंट लोन देने वाले तमाम फिनटेक कंपनियां भी आपकी मददगार हो सकती हैं। मनीटैप के सीएफओ कुणाल वर्मा का कहना है कि कोई भी ग्राहक महज एप के जरिये केवाईसी पूरी कर 12 से 24 घंटे के भीतर कर्ज ले सकता है। हालांकि यह रकम सीधे खाते में आएगी, जिसका इस्तेमाल कर ग्राहक घर बैठे बैंक से धन मंगा सकते हैं या डिजिटल लेनदेन कर अपनी जरूरतें पूरा कर सकते हैं।

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