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सही निकली कांग्रेस, मोदी सरकार ने मानी गलती

नई दिल्ली 19 दिसंबर 2018 । कांग्रेस पिछले काफी वक्त से राफेल डील पर मोदी सरकार को कटघरे में खड़े करने के प्रयास में लगी हुई है जिस पर कांग्रेस की ओर से सबसे बड़ा सवाल राफेल विमानों की कीमत पर उठाया जा रहा है जिसको लेकर अभी तक मोदी सरकार कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाई है और लगातार रूप से राफेल विमान की कीमतों के सवाल को देश की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताकर टालती रहती है।

राफेल डील विवाद पर जब पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक जा पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा मोदी सरकार से राफेल डील से जुड़ी सभी जानकारियां बंद लिफाफे में मांगी गई। जिसके जवाब में मोदी सरकार की ओर से एक हलफनामे में राफेल डील से संबंधित सभी जानकारियां सुप्रीम कोर्ट को दी गई थी जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए मोदी सरकार को राफेल डील के पूरे विवाद में सही पाया और सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

कांग्रेस द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की तीन लाइनों पर गौर फरमाते हुए यह कहा गया कि मोदी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में उसका जवाब में कहा गया है कि राफेल विमान की कीमतों से जुड़ी जानकारी सीएजी के पास मौजूद है जिसे सीएजी ने पार्लियामेंट कमेटी पीएसी को सौंप दी है। जिसके बाद वह पब्लिक डोमेन में आ चुकी है जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस बात को सिरे से नकार दिया और कहां कि वह स्वयं डिप्टी सीएजी से मिले हैं और राफेल विमान की कीमतों से जुड़ी कोई भी रिपोर्ट अभी तक सीएजी के पास मौजूद नहीं है।

गौरतलब है कि राफेल डील से जुड़े इस पूरे मामले में मोदी सरकार एक बार फिर से कटघरे में खड़ी दिखाई दे रही है क्योंकि अगले ही दिन मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में ‘टाइपिंग एरर’ बताते हुए गलत जानकारी पहुंचने की बात को स्वीकारा है और राफेल डील की याचिका के फैसले पर सही हलफनामा सुप्रीम कोर्ट और उसकी कॉपी सभी याचिकाकर्ताओं को सौंपी है। मोदी सरकार की ओर से नए हलफनामे में कहा गया है कि पहले सौपे गए हलफनामे में टाइपिंग में गलती हुई थी जिसकी सुप्रीम कोर्ट ने गलत व्याख्या की है। मोदी सरकार की ओर से इस नए हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि सीएजी की रिपोर्ट अभी तक पीएसी ने नहीं देखी है।

राफेल डील को लेकर मोदी सरकार द्वारा सौपे गए संशोधित हलफनामे में यह स्पष्ट किया गया है कि सीएजी की रिपोर्ट अभी तक पीएससी ने नहीं देखी है। बताते चलें कि मोदी सरकार ने पहले सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी थी कि राफेल विमान की कीमत निर्धारण और उससे जुड़े अन्य विवरण की रिपोर्ट सीएजी में पीएसी को सौंपी थी। जिसकी समीक्षा पीएसी द्वारा की गई है। उसकी रिपोर्ट भी बाद में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई है।

राफेल डील को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सौपे गए अपने पहले हलफनामे में गलती को मोदी सरकार ने स्वीकारा है और मोदी सरकार की ओर से नए हलफनामे में यह स्पष्ट किया गया है कि उसने केवल रिपोर्ट और रिपोर्ट दर्ज करने की प्रक्रिया का हवाला दिया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की तीन सदस्यीय पीठ ने शुक्रवार को फ्रांस से 36 लड़ाकू राफेल विमान खरीद में किसी तरह की जांच से इनकार करते हुए सभी याचिकाओं को सिरे से नकार दिया था। सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया था कि अरबों डॉलर कीमत के इस रक्षा सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई ठोस कारण नजर नहीं आता है और साथ ही रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर बनाने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारी पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया था।

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