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खतरनाक होगा मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टाइफाइड

 उज्जैन  23 अक्टूबर 2018 । गंदे पानी एवं संक्रमित भोजन से होने वाला टाइफाइड बुखार अब और घातक हो गया है। रोगाणु के संक्रमण से होने वाले बुखार मे कई एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर साबित हो रही है। टाइफाइड़ के मरीज एमडीआर यानी मल्टी ड्रग रेसिंस्टेंट हो रहे है। इसलिए टाइफाइड को नियंत्रित करने हेतु एंटीबायोटिक दवाओं का कॉाम्बिनेशन चला रहे है।
यह खुलासा राष्ट्रीय सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने अखिल भारतीय चिकित्सा आयुर्विज्ञान संस्थान, रायपुर के तत्वावधान मे दवाओं के प्रति बढती रोगाणु की प्रतिरोध शक्ति विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सतत् चिकित्सकीय स्वास्थ्य कार्यक्रम मे अपनी शोध रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए किया।
उन्होने रिपोर्ट मे बताया कि टाइफाइड़ बुखार साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है। जिससे पीडित के शरीर का तापमान 102 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है। पीडित को कमजोरी महसूस होती है। टाइफाइड़ की मुख्य वजह गंदे पानी और संक्रमित भोजन का सेवन है। इसका बैक्टीरीया आंतो में पहुंच कर संक्रमण और सूजन करते है। ऐसे में बड़ो को कब्ज और छोटे बच्चों को दस्त होते है। पेट व सिरदर्द के अलावा भूख भी कम लगती है। इसके अलावा सुस्ती, उल्टी और कमजोरी भी महसूस होती है। इस बुखार मे लिवर मे संक्रमण होने से शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित हो सकते हैा
ऐसे करना पड़ रहा है उपचार:
डॉ पुरोहित ने बताया कि पहले टाइफाइड बुखार मे क्लोरोमाइसेटिन एंटीबायोटिक चलाई जाती थी Iधीरे-धीरे रोगाणुओ ने इसके प्रति प्रतिरोध क्षमता विकसित कर ली। उसके पश्चात क्यूनोलोन देना प्रारंभ किया गया लेकिन रोगाणु ने रेसिस्टेंट विकसित कर लिया Iअब सेफिक्सजीम एंटीबायोटिक के साथ क्यूनोलोन भी चलानी पड़ती है। साथ मे एजिथ्रोमाइसिन देनी पड़ती है । उसके पश्चात रोगाणु पर अंकुश लग पाता है।

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