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पिता की किताब से डरे रेमंड ग्रुप के मालिक?

नई दिल्ली 11 जनवरी 2019 । रेमंड ग्रुप के चेयरमैन गौतम सिंघानिया ने कहा कि वह अपने पिता विजयपित सिंघानिया के साथ बैठकर विभिन्न मुद्दों पर बातचीत को तैयार हैं। उन्होंने अपने पिता को अपने परिवार के साथ रहने का भी प्रस्ताव दिया। उन्होंने यह भी कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसी स्थिति कभी उनके और उनकी पुत्रियों के बीच पैदा नहीं हो।

गौतम सिंघानिया ने कहा, ‘हमने सम्मान के खातिर तीन सालों तक चुप्पी साध रखी। मेरे पिता एक किताब लिख रहे हैं और मुझे अच्छे से पता है कि यह मेरे खिलाफ होगा और इसमें 95% से अधिक उनकी कोरी कल्पना होगी।’ सुलह की मंशा जाहिर करते हुए गौतम ने कहा, ‘अगर उन्हें (पिता विजयपत सिंघानिया को) कोई समस्या है तो हम बैठकर इस पर चर्चा कर सकते हैं। उन्हें किताब लिखने की क्या आन पड़ी? अगर उन्हें कोई दिक्कत नहीं है तो मैं उनके साथ बैठकर मुद्दों पर बात करने को तैयार हूं।’

रेमंड ग्रुप के सीएमडी ने ये बातें टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में तब कहीं जब मुंबई के एक सिविल कोर्ट ने उनके पिता विजयपत सिंघानिया की आत्मकथा ‘द कंप्लीट मैन’ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। विजयपत 2025 में 90 वर्ष पुरानी कंपनी रेमंड के चेयरमैन पद से हट गए थे। उन्होंने बेटे गौतम सिंघानिया को उत्तराधिकार सौंप कर कंपनी की पूरी हिस्सेदारी भी उनके नाम कर दी थी। उसके बाद से पिता-पुत्र में संघर्ष शुरू हो गया। विजयपत ने आरोप लगाया कि उनसे रेमंड के अवकाश प्राप्त चेयरैमन की उपाधि भी छीन ली गई है और फ्लैट से भी निकाल दिया गया है।

गौतम मानते हैं कि परिवार के मालिकाना हक वाली कंपनियों में उत्तराधिकारी के तौर पर पहली पसंद प्रमोटरों के पुत्र या उनकी पुत्रियां नहीं होने चाहिए। उनका कहना है कि उत्तराधिकार का निर्णय सिर्फ योग्यता के आधार पर ही होना चाहिए। अगर बच्चे अयोग्य हैं तो कंपनी को पेशेवर तरीके से चलाना चाहिए। गौतम सिंघानिया ने कहा कि ऐसी स्थिति में बच्चों के लिए ‘पर्याप्त धन’ का एक ट्रस्ट बना देना चाहिए ताकि उन्हें कभी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े।

गौतम ने कहा, ‘ईश्वर ने मुझे जरूरत से ज्यादा ही दिया है। मेरा किसी से कोई विवाद नहीं है, लेकिन मुझे ऐसा कुछ करने को मत कहिए जो मेरे लिए संभव नहीं हो।’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसी समस्या कभी उनके और उनकी दो बेटियों के बीच कभी नहीं उत्पन्न हो। गौरतब है कि गौतम सिंघानिया की दो बेटियां 13 साल और 7 साल की हैं।

उत्तराधिकार की योजना बताते हुए गौतम ने कहा कि वह एक आदर्श कंपनी बनाना चाहते हैं जहां ओनरशिप और मैनेजमेंट में स्पष्ट रेखा खिंची होगी। उन्होंने कहा, ‘हम एक फैमिलि-मैनेज्ड प्रफेशनल कंपनी हैं। मेरी बच्चियां बहुत छोटी हैं और मेरे कंधे पर सारे शेयरधारकों की जिम्मेदारी है।’

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