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कर्ज में डूबी DHFL को मिल सकती है 7,000 करोड़ की ‘लाइफलाइन’

मुंबई 12 सितम्बर 2019 । कर्ज में डूबी दीवान हाउसिंग फाइनेंस (DHFL) को राहत की खबर मिल सकती है. कंपनी को कर्जदाता 7,000 करोड़ रुपये के आपातकाल फंड के विषय में सोच रहे हैं. इससे पहले इस होम लोन कंपनी को कर्जदाताओं ने पुनर्गठन योजना के तहत कर्ज को इक्विटी में बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी.

हालांकि, माना जा रहा है कि म्यूचुअल फंड DHFL के इंटर-क्रेडिटर एग्रीमेंट (ICA) पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले हैं. वे नियामक के नियमों का हवाला दे सकते है. सिर्फ टाटा म्यूचुअल फंड ने ही ICA का हिस्सा बनने के लिए हामी भरी है.

पुनर्गठन योजना में कंपनी के थोक कर्ज पर जोर दिया गया है, जो कंपनी ने कुछ बिल्डरों को दिया है. इन स्कीमों से पैसा नहीं आ रहा है. बैंकरों का कहना है कि वे अगले कुछ दिनों में स्कीम को अंतिम रूप दे देंगे. हालांकि, कुछ मुद्दे – जैसे कि कर्ज को इक्विटी में बदलने की लागत- पर जोर देने की जरूरत है.

एक बैंकर ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, “कंपनी के 45 फीसदी लोन थोक हैं, जिसे पुर्गठित करने की जरूरत है. रिटेल कर्ज स्थिर है और इसे अलग-अलग कीमत पर तीन से चार हिस्सों में बदला जा सकता है. कई मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है.”

बैंकरों के बीच विवाद है कि वे कर्ज को इक्विटी में बदलने की कीमत क्या रखें. इसे या तो एक रुपये प्रति शेयर की टोकन राशि पर बदला जा सकता है या फिर सेबी की ओर से दिए गए फॉर्मूले के अनुसार, बाजार की मौजूदा कीमत पर बदला जा सकता है.

मामले से जुड़े एक अन्य बैंकर ने कहा, “बैंकरों के बीच विचार-विमर्श जारी है. सेबी की ओर से दिया गया फॉर्मूला अनिवार्य नहीं है. 7 जून के सर्कुलर के अनुसार, बैंक अपनी सुविधा के अनुसार, पुनगर्ठन कर सकते हैं. इस फैसले पर आम सहमति बननी बाकी है.” सेबी के फॉर्मुले के मुताबिक, कर्ज को इक्विटी में बदलने के लिए बैंकों को कर्ज की राशि के मुताबिक, शेयरों की संख्या मिलेगी और वे कितनी रकम के कर्ज को इक्विटी में बदलना चाहते हैं. इस आधार पर उनके शेयरों की संख्या निर्धारित होगी.

एक बैंकर ने कहा, “7,000 करोड़ रुपये की राशि से दिए जाने वाला लोन कंपनी को जिंदा रखेगा. सभी बैंकों का मानना है कि कर्ज का नियमित बने रहना जरूरी है. यदि ऐसा नहीं होता, तो हमें पैसा लगाने के लिए एक रणनीतिक साझेदार की जरूरत पड़ सकती है.” बैंकों का कुल 35,000 करोड़ रुपये DHFL पर बकाया हैं. डिबेंचर, बॉन्ड धारक, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और पेंशन फंडों का भी 45,000 करोड़ रुपये बकाया है. इस आधार पर कंपनी को कुल 80,000 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाना है.

कंपनी को कर्ज देने वाले बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक जैसे नाम शामिल हैं. इसके अलावा यूटीआई, रिलायंस निपॉन, एक्सिस, टाटा, कोटक, डीएसपी और प्रमेरिका जैसे फंड हाउस ने भी DHFL की डेट सिक्योरिटीज में निवेश किया हुआ है.

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