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कंपनियों में डायरेक्टर्स की शामत, दो महीने में 400 ने छोड़े पद

नई दिल्ली 7 मई 2019 । भारतीय कंपनियां अब नए संकट का सामना कर रही हैं। उन्हें कंपनी का प्रबंधन चलाने के लिए अच्छे डायरेक्टर्स नहीं मिल रहे हैं। कंपनियों के बोर्ड में शामिल 400 स्वतंत्र निदेशकों ने बीते दो महीने में पद छोड़ दिए हैं। यही नहीं पिछले साल भी एक हजार से ज्यादा डायरक्टरों ने इस्तीफा दिया था। वजह है बीते सालों में धोखाधड़ी, अकाउंट में हेराफेरी व भ्रष्टाचार की शिकायतों में बढ़ोतरी होना। इससे कंपनियों को निर्णय लेने में परेशानी आ रही है। कई फैसले लंबित हो रहे हैं।

कार्यकाल रिन्यू कराने में भी रुचि नहीं
करीब 1,500 स्वतंत्र निदेशकों ने 2014-15 में पांच साल के कार्यकाल पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका इस साल नवीनीकरण होना है। विशेष प्रस्ताव के जरिए मंजूरी के बाद स्वतंत्र निदेशकों को दूसरा कार्यकाल मिल सकता है। इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज के संस्थापक व प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमण्यन ने कहा, इनमें से कई स्वतंत्र निदेशक जवाबदेही बढ़ने की वजह से अपने कार्यकाल का विस्तार नहीं करने का विकल्प चुन सकते हैं। 1 अप्रैल 2014 से प्रभावी कंपनी अधिनियम 2013 में स्वतंत्र निदेशकों के लिए अलग नियम बनाए गए थे।
कोटक समिति की सिफारिशों के आधार पर सूचीबद्धता के नियम में हुए हालिया बदलाव ने भी कंपनी प्रशासन की अनिवार्यताओं में इजाफा किया है।

बिगड़ रहा है कंपनियों का ट्रैक रिकॉर्ड
जेट एयरवेज, आम्रपाली, किंगफिशर एयरलाइंस, रिलायंस धीरूभाई अंबानी समेत करीब 150 से ज्यादा कंपनियों पर बीते सालों में कई संगीन आरोप लगे हैं। कंपनियां के मालिकों की मनमर्जी के चलते डायरेक्टर्स की बदनामी हुई है। लिहाजा, अब यह पद अच्छे पेशवरों के लिए आकर्षक नहीं रहा है।

अहम होते हैं स्वतंत्र निदेशक
धोखाधड़ी का पता लगाने में स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका भी जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गई है। ऑडिटरों के साथ वे भी पहली पंक्ति के स्वतंत्र अधिकारी हैं जिनकी जिम्मेदारी गड़बड़ी के शुरुआती दिनों में सवाल उठाने का है। स्वतंत्र निदेशकों के पास कानूनी व नियामकीय जवाबदेही है और वह बड़े मामलों पर ऊंगली उठा सकते हैं और अपना असंतोष दर्ज कर सकते हैं। केपीएमजी इंडिया के पार्टनर साईं वेंकटेश्वरन ने कहा, अब स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका की सराहना हो रही है, लेकिन यह उनके ऊपर बड़ी जवाबदेही भी डालता है, जिसे अगर सही तरीके से पूरा नहीं किया गया तो उनके लिए बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है।

कार्रवाई का डर
कंपनी अधिनियम के तहत निदेशक क्लास एक्शन सूट का सामना कर सकते हैं और आईपीसी की धारा 403 व धारा 405 के तहत भी इन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा परिदृश्य भी हो सकता है जहां इरादतन चूक करने वालों के निदेशक मंडल में शामिल स्वतंत्र निदेशक ने अगर अपना असंतोष जाहिर नहीं किया हो या कदम उठाने में नाकाम रहे हों तो उन्हें भी निदेशक के तौर पर डिफॉल्टर का तमगा मिल सकता है। इससे वह किसी भी वित्तीय इंटरमीडियरी में कोई बड़ा पद संभावने या किसी वित्तीय नियामकीय गतिविधियों को अंजाम देने में अनुपयुक्त घोषित हो सकते हैं।

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