मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> मान्यता से वंचित प्रदेश के मेडिकल कॉलेजो में बॉण्ड भरकर फंसे नियुक्त डॉक्टर

मान्यता से वंचित प्रदेश के मेडिकल कॉलेजो में बॉण्ड भरकर फंसे नियुक्त डॉक्टर

नई दिल्ली 29 दिसंबर 2018 । मध्यप्रदेश की पूर्व भाजपा सरकार ने विदिशा, शिवपुरी, छिंदवाडा , रतलाम, दतिया, खंडवा और शहडोल मे नए सरकारी मेडिकल कॉलेजो में अधूरी तैयारियों के बावजूद जमकर भर्तियां की थी। भर्ती के दौरान सरकार ने सभी से 3 साल का बॉण्ड भरवाया थाा इसमे शर्त थी कि 3 साल के पहले नौकरी छोडने पर शिक्षकों को 1 साल का वेतन जमा करना पडेगा। किन्तु सरकार पर भरोसा कर प्रस्तावित नए मेडिकल कॉलेजों मे नौकरी करना कई चिकित्सको हेतु परेशानी का सबब बन गया है। इन नए कॉलेजो में ज्यादातर को एमसीआई (मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया) ने मान्यता नही दी Iएमसीआई के नियमों के अनुसार गैर मान्यता प्राप्त कॉलेजो मे की गई नौकरी अनुभव में नही जुड़ती, लिहाजा ये डाक्टर नौकरी छोडना चाहते है, पर सरकार उसमें भी अड़चन डाल रही है।
यह जानकारी अखिल भारतीय अस्पताल प्रशासक संघ के सचिव डॉ नरेश पुरोहित ने ब्लू आईज को देते हुए बताया कि मेडिकल कॉलेजो को जब मान्यता ही नही मिली, तो सरकार को एक साल के वेतन वाली शर्त से पीछे हटना चाहिए, क्योकि इसमे गलती सरकार की ही है।
डॉ पुरोहित ने बताया कि एमसीआई ने सह प्राध्यापक , सहायक प्राध्यापक जैसे पदों की योग्यता के संबंध मे अनुभव के मापदंड तय कर रखे है। जाहिर है ऐसे गैर मान्यता प्राप्त कॉलेजों मे की गई नौकरी की अवधि डॉक्टरों के अनुभव मे नही जुडेगी। बेहतर कॅरियर के लालच मे ऐसे चिकित्सक दूसरे मेडिकल कॉलेजो मे जाना चाहते है तो प्रदेश का चिकित्सा शिक्षा विभाग उन्हें एनओसी देने और दस्तावेज लौटाने से इन्कार कर रही है ।
डॉ पुरोहित ने इस संबंध मे प्रदेश के नवनियुक्त मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ को एक पत्र भी प्रेषित किया है ।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

प्रियंका गांधी का 50 नेताओं को फोन-‘चुनाव की तैयारी करें, आपका टिकट कन्फर्म है’!

नई दिल्ली 21 जून 2021 । उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव …