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कश्मीर की गलियों में यूं ही नहीं घूम रहे डोभाल, पीएम मोदी के इस खास मिशन पर कर रहे काम

नई दिल्ली 16 अगस्त 2019 । राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने कश्मीर की गलियों में यूं ही नही घूम रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने डोभाल को एक खास टास्क पर लगा रखा है। वह टास्क है मिशन संवाद। यही वजह है कि अजीत डोबाल कभी शोपियां में सड़क पर लोगों के साथ खाना खाते हैं तो कभी अनंतनाग की भेड़ मंडी में ग्राहक बन कर पहुंच जाते हैं। 12 अगस्त को भी अजीत डोभाल ने घाटी की सुरक्षा का जायजा लेने के लिए शहर और दक्षिण कश्मीर के इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। डोभाल ने श्रीनगर शहर, पुलवामा, अवन्तीपुरा, पाम्पोर और बडगाम में लोगों से बात की।

अजीत डोभाल केंद्र सरकार के आंख-कान बनकर जम्मू-कश्मीर में डटे हुए हैं और हालात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। इसी बहाने कश्मीर में फिलहाल मोदी सरकार के मिशन संवाद की कमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने संभाल रखा है। पीएम नरेंद्र मोदी मिशन संवाद के जरिए अनुच्छेद 370 पर लिए फैसले को लेकर कश्मीरियों के मन में मौजूद तमाम आशंकाओं को दूर करने में जुटे हैं। ताकि घाटी का माहौल सहज और सामान्य रहें। बताया जा रहा है कि आने वाले वक्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ और केंद्रीय मंत्रियों, रणनीतिकारों और बड़े अफसरों को संवाद के मोर्चे पर घाटी में उतार सकती है।

अजीत डोभाल घाटी में तैनात सेना के बड़े अफसर भी सहज संवाद के जरिए आम कश्मीरियों का दिल जीतने में लगे हैं। मकसद है कि सरकार की ओर से उठाए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद घाटी में सब कुछ सामान्य रहे। दरअसल अनुच्छेद 370 पर लिए गए फैसले से पाकिस्तान बौखला गया है। वह ऐसे माहौल में घाटी को अशांत करने के लिए नापाक हरकतों का सहारा ले सकता है। ऐसे में केंद्र सरकार पूरी तरह सजग है। गृह मंत्री अमित शाह भी आने वाले वक्त में इस संवाद मुहिम को अपने स्तर से और गति दे सकते हैं। बताया जा रहा है कि अमित शाह स्वतंत्रता दिवस के आसपास घाटी जा सकते हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार घाटी को विकास की मुख्यधारा में लाने के प्रयास में जुटी है। जम्मू-कश्मीर की पंचायतों के खाते में सीधे पैसा भेजने की व्यवस्था की गई है। ताकि पैसे का इस्तेमाल गांवों के विकास में हो सके। मोदी सरकार ने 3700 करोड़ रुपये की पहली किश्त जम्मू-कश्मीर की पंचायतों के खाते में भेज दी है। इसके अलावा राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी सरकारी मशीनरी को घाटी के दुर्गम गांवों में जाने का आदेश दे रखा है। ताकि स्थानीय जनता की समस्याओं का निवारण ऑन द स्पॉट हो सके।

यासीन मालिक ने ISI से कमाई 15 करोड़ से ज्यादा की सम्पति : NIA

जम्मू कश्मीर की लिब्रेशन फ्रंट के यासीन मालिक के कथित रूप से पाकिस्तान से खुफिया संपर्क थे , और इन्हे कश्मीर में अशांति बनाये रखने के लिए पाकिस्तान से काफी पैसा मिलता था , माना जा रहा है की इन सब से यासीन मालिक ने लगभग 15 करोड़ की सम्पति बना ली है।

इस सब का खुलासा NIA ने एक रिपोर्ट में किया है ,कश्मीर में टेरर फंडिंग से जुडी जाँच में यासीन मालिक सहित अन्य अलगाववादी नेता पर जांच NIA कर रही है पर मालिक के वकील रजा तुफैल ने इन सब से इंकार करते हुए कहा है की सरकार मालिक की छवि ख़राब करने की कोशिश कर रही है

तुफैल ने कहा की उन्होंने हर साबुत और सम्पति की जाँच की है पर यासीन मालिक का इन सब से कोई नाता नहीं ,आप इनके घर जाये तो पता चलेगा इनके पास कितनी सम्पति है।

NIA ने टेरर फंडिंग मामले में कश्मीर के एक बिजनेसमेन जहूर अहमद शाह वटाली व् अन्य पर आरोप लगाया है और आरोप पत्र दाखिल किया है , इन लोगो पर पाकिस्तान में बैठे संगठनो से पैसे लेने का आरोप है इन संगठनो में लश्कर-ऐ-तौयबा शामिल है।

इस रिपोर्ट में NIA ने दावा किया एक बैंक रिपोर्ट से साफ़ होता है की वटाली ने हाफिज सईद व पकिस्तान ISI से पैसे लिए है, जब्त दस्तवेजो में सामने आया है की जम्मू कश्मीर में अलगाववादी नेताओ को पैसे बाटे गए जिनमे यासीन मालिक भी शामिल है।

NIA ने रिपोर्ट में दावा किया ही की अप्रेल 2015 में यासीन मालिक ने वटाली से लगभग 15 लाख रूपये लिए जिनका इस्तेमाल हिज्बुल मुजाहिदीन के बुरहान वानी की मोत पर घाटी में अशांति पैदा करने के लिए किया गया जो की यासीन मलिक की देख रेख में हुआ , श्रीनगर में मालिक की 12 सम्पतियाँ NIA की नजर में है।

हिरासत में लिए गए अलगावादी और राजनेताओं के एक साल तक बाहर आने की उम्मीद नहीं

जम्मू कश्मीर का विशेषाधिकार समाप्त कर दो केंद्र शासित राज्य बनाने के मद्देनजर हिरासत में लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, अलगाववादियों और अन्य लोगों की जल्द रिहाई की उम्मीद नहीं है। संबंधित अधिकारियों की मानें तो इन्हें एक साल तक बंद रखा जा सकता है।

गौरतलब है कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और किसी भी तरह के राष्ट्रविरोधी प्रदर्शनों की संभावना को टालने के लिए राज्य प्रशासन ने बीते आठ दिनों के दौरान करीब 700 लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें से करीब 150 लोगों को देश के विभिन्न राज्यों की जेलों में स्थानांतरित किया गया है। इनमें अलगाववादियों के अलावा नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के महासचिव अली मोहम्मद सागर भी हैं।

बता दें कि नेकां उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के अलावा पीडीपी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी गिरफ्तार नेताओं में शामिल हैं। हालांकि महबूबा को हरि निवास में और उमर अब्दुल्ला को वन विभाग के गेस्ट हाउस में रखा गया है, लेकिन अधिकारिक तौर पर कोई भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इन दोनों नेताओं के बारे में बोलने को तैयार नहीं हैं।

राज्य में बीते एक सप्ताह के दौरान हुई गिरफ्तारियों की संख्या का ब्योरा भी देने के लिए कोई अधिकारी तैयार नहीं है। राज्य सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल भी उमर अब्दुल्ला और महबूबा पर लगाई गई कानूनी धाराओं का ब्योरा देने में असमर्थ नजर आए।

राज्य प्रशासन के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि वादी में कोई भी किसी भी तरह से ¨हसा न भड़का सके इसलिए विभिन्न नेताओं और अन्य लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया है। इनमें से कइयों को जन सुरक्षा अधिनियम के तहत भी बंदी बनाए जाने की सूचना है।

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