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जंग के चलते राशन की महंगाई भी करेगी तंग! गेहूं की कीमतों में आया 40% का उछाल

नयी दिल्ली 04 मार्च 2022 ।  रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है। इसकी वजह से राशन की महंगाई ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। जंग के चलते यह सप्ताह गेहूं के कारोबार के इतिहास में नीचे जाएगा। दरअसल, शिकागो में अनाज की कीमतों में 40 फीसदी का उछाल आया है, क्योंकि यूक्रेन में रूस के युद्ध ने वैश्विक अनाज आपूर्ति को संकट में डाल दिया है। ऐसे में कीमतें 14 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं और पेरिस में गेहूं का आंटा अभूतपूर्व स्तर पर महंगा बिक रहा है। दरअसल, युद्ध ने यूक्रेन में प्रमुख बंदरगाहों को बंद कर दिया है और लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट लिंक को तोड़ दिया है। ऐसे में रूस के साथ व्यापार भी प्रतिबंधों को नेविगेट करने की जटिलता और बढ़ते बीमा और माल ढुलाई लागत से प्रभावित हुआ है। बड़े पैमाने में गेहूं का उत्पादन

दरअसल, रूस और यूक्रेन में बड़े पैमाने पर गेहूं का उत्पादन होता है। लेकिन युद्ध के बाद से इसकी सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। एक तरफ रूस पर पश्चिमी देशों ने कई तरह के बैन लगा दिए हैं तो वहीं यूक्रेन अब निर्यात की स्थिति में नहीं है। इसके चलते कीमतों में तेजी का माहौल बन गया है। बीते एक महीने में ही गेहूं की कीमत में 30 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया का एक चौथाई खाद्यान्न निर्यात करते हैं। लेकिन युद्ध ने दोनों ही देशों के कारोबारों को प्रभावित किया है। रूस के हमले के बाद से कार्गो शिप जहां के तहां खड़े हैं। दोनों देशों का कारोबार थम गया है। यही नहीं Bunge Ltd और Archer-Daniels-Midland Co जैसी कंपनियों ने दोनों ही देशों में अपनी फैसिलिटीज को भी फिलहाल बंद कर दिया है। ब्लैक सी के जरिए किसी भी तरह का एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहा है। ऐसे में बाजार में लगातार में गेहूं समेत अन्य खाद्यान्न की कीमत बढ़ने लगी है। यही नहीं युद्ध यदि जारी रहा तो फिर यह संकट और गहरा सकता है। यूक्रेन में बसंत के मौसम में मक्के की बुवाई की जाती है, लेकिन युद्ध के चलते यह काम रुका हुआ है। दुनिया में मक्के का निर्यात करने वाले टॉप देशों में यूक्रेन का नाम शामिल है। ऐसे में युद्ध के जारी रहने से साफ है कि संकट आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।

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