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समाजिक भ्रांतियों के कारण मिर्गी मरीज बनते है मौत के शिकार : डॉ नरेश पुरोहित

भोपाल 18 नवंबर 2021 । भारत में इस बीमारी से करीब सवा करोड़ लोग पीड़ित हैं। बावजूद इसके मिर्गी को लेकर लोगों में तरह-तरह की भ्रांतियों के कारण उपचार नहीं मिल पाता। इन्हीं भ्रांतियों की वजह से मिर्गी का मरीज मौत का शिकार हो जाता है।
इंडियन एपिलेप्सी एसोसिएशन के कार्यकारी सदस्य डॉ नरेश पुरोहित ने राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर यह जानकारी देते हुए बताया कि मिर्गी से पीड़ित मरीजों का सामाजिक बहिष्कार नहीं किया जाना चाहिए। गलत जानकारियों के कारण सैकड़ों मरीज कष्ट भोग रहे हैं। जागरूकता की कमी इन मरीजों की उपचार से जुड़ी जटिलताओं को बढ़ा रही है।

कई जटिल जानलेवा रोगो के शोधार्थी डॉ पुरोहित ने बताया कि मिर्गी एक काफी सामान्य न्यूरोलॉजिकल विकार है जो दुनिया भर के 65 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है। ऐसे कई कारण हैं जिनसे दौरे पड़ सकते हैं। इसमे शामिल है: तेज बुखार, सिर में चोट, ब्लड शुगर बहुत कम होना आदि शामिल हैं। मस्तिष्क की चोट, स्ट्रोक, अन्य संवहनी रोग, मस्तिष्क को ऑक्सीजन की कमी, ब्रेन ट्यूमर या सिस्ट, अल्जाइमर रोग, जन्म के समय मातृ दवा का उपयोग, जन्म के पूर्व की चोट, मस्तिष्क की विकृति या ऑक्सीजन की कमी, एड्स और मैनिंजाइटिस जैसे संक्रामक रोगआनुवंशिक या तंत्रिका संबंधी रोग भी इसके कारण हैं।
उन्होने नगर के कुछ केस स्टडी का हवाला देते हुए बताया कि मिर्गी मस्तिष्क से संबंधित एक रोग है, जिसमें बार-बार दौरे पड़ते हैं। इनकी अवधि अधिक नहीं होती। जब मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाएं विद्युतीय आवेशों को तेज गति से छोड़ती हैं, तो इसके कारण विद्युतीय तूफान यानी दौरे पड़ना शुरू होता है।

मिर्गी लक्षण :
दौरा पड़ना मिर्गी का मुख्य लक्षण है। लक्षण व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। इसके अन्य लक्षणों में चेतना का नुकसान होना, स्वाद, गंध, देखने की क्षमता कम होना, सिर चकराना, झुनझुनी और अंगों की मरोड़, एकटक निगाह रखना आदि शामिल हैं।

मिर्गी के लिए प्राथमिक उपचार
– इस उपचार में आपको सबसे पहले आप मरीज के पास से ठोस चीजें हटा दें। इसके बाद उसके सिर के नीचे कोई नरम चीज रखें। दांतों के बीच या मरीज के मुंह में कुछ न रखें। मरीज को कोई तरल पदार्थ न पिलायें।

– यदि मरीज की सांस बंद हो, तो देखें की उसकी श्वास नली खुली है और उसे कृत्रिम सांस दें। शांत रहें और मदद आने तक मरीज को सुविधाजनक स्थिति में रखें। कंपकंपी के अधिकांश मामलों के बाद मरीज बेहोश हो जाता है या थोड़ी देर बाद फिर से कंपकपी शुरू हो जाती है। आपातकाल पर फोन करें और चिकित्सीय मदद मांगे।
ध्यान रहे मिर्गी के मरीज के साथ-साथ उसके परिवार को भी बीमारी के प्रति पूरी जानकारी होनी चाहिए। अगर किसी को दौरे पड़ने की परेशानी है तो उसके परिजनों को तत्काल मोबाइल फोन में दौरे पड़ने के दौरान का वीडियो बना लेना चाहिए। इस वीडियो के जरिए इलाज करने वाले डॉक्टर को मरीज की स्थिति पता करने में आसानी हो सकती है।

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