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देश में प्रत्येक वर्ष 67 हजार से अधिक महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की शिकार

उज्जैन 9 सितम्बर 2018 । देश मे प्रत्येक वर्ष सर्वाइकल कैंसर के लगभग 1,30,000 नए मामले सामने आते है, जिसमें लगभग 67,500 महिलाए होती है। कैंसर से संबंधित कुल मौत का 11.1 प्रतिशत कारण सर्वाइकल कैंसर ही है। 15 से 44 वर्ष की आयु मे भारतीय महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत का दूसरा सबसे आम कारण सर्वाइकल कैंसर है।
इन तथ्यों का खुलासा राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने अपनी ताजा शोध-अध्ययन रिपोर्ट में किया । हाल ही मे बिरला कैंसर सेन्टर जयपुर  में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार मे अपनी शोध- रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए डॉ  पुरोहित ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स की लाइनिंग को प्रभावित करता है। गर्भाशय – ग्रीवा का कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है एवं समय के साथ पूर्ण विकसित हो जाता है।
डॉ पुरोहित ने शोध – रिपोर्ट में लेखांकित करते हुए बताया कि पूरे विश्व मे 27% मौते इस कैंसर की वजह से अकेले भारत मे होती  है। यह कैंसर ज्यादातर मानव पैपीलोमा वायरस संक्रमण या एचपीवी के कारण होता है जो यौन संपर्क या त्वचा संपर्क के माध्यम से फैलता है। कुछ महिलाओं मे गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं मे एचपीवी संक्रमण लगातार बना रहता है एवं इस रोग का कारण बनता हैा
उन्होने बताया  कि इन परिवर्तनों का नियमित ग्रीवा कैसर स्क्रीनिंग (पेप टेस्ट) द्वारा पता लगाया जा सकता है Iसर्वाइकल कैंसर के कुछ लक्षण इस प्रकार है – रजोनिवृति या यौन संपर्क के पश्चात योनि से रक्तस्राव, सामान्य से अधिक लंबे समय तक मासिक धर्म आदि।
डॉ पुरोहित के अनुसार आधुनिक सक्रीनिंग तकनीकों और 13 वर्ष की आयु से पहले ही किशोरी बालिकाओं को सामान्यतः एचपीवी का टीका लगवा लेना चाहिए जिससे इस तरह के कैसर से बचाया जा सकता है ।
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