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किसान परेशान, खुले में रखा हजारों टन धान बरसात में हो रहा बर्बाद

भोपाल 17 दिसंबर 2019 । मध्यप्रदेश में पिछले कुछ दिनों में हुई बरसात से खुले में रखा हजारों टन धान मंडियों में रखे-रखे भीग गया. जब तक धान गोदाम में नहीं पहुंचेगा किसान को भुगतान नहीं होगा. धान बेचकर अब किसान सहकारी समितियों के चक्कर लगा रहे हैं. डिंडोरी के शहपुरा में बरगांव धान खरीदी केन्द्र की तस्वीरें आईं जहां मैदान में पानी है, पानी में धान की बोरियां हैं. कुछ खुशकिस्मत बोरियों को तिरपाल में सूखे रहने का सुख मिल गया, कुछ किसान इस मामले में बदकिस्मत रहे. मंडी में आए ग्रामीण केशव प्रसाद साहू ने कहा अनाज ले आए हैं, गाड़ियों की व्यवस्था नहीं है, पूरा धान पानी में है, 8-10 दिन से गाड़ियों की व्यवस्था नहीं हो पा रही इसलिये दिक्कत हो रही है.

इस मामले में तहसीलदार एन एल वर्मा ने कहा मैं जांच कराकर देखता हूं कि कितना नुकसान हुआ है, अभी तक परिवहन का टेंडर नहीं हुआ है, टेंडर खुलेगा तो हो जाएगा. विदिशा में समर्थन मूल्य केन्द्रों पर 10 हजार क्विंटल से ज्यादा खुले आसमान के नीचे पड़ा धान अचानक हुई बारिश से भीग गया, धान की खरीदी शुरू हुए 14 दिन बीत गए. लेकिन अभी तक भंडारण का काम शुरू नहीं हो सका जिसके चलते किसानों को भुगतान नहीं हो पा रहा है. बारिश से गीला हुए धान को वेयरहाउस कार्पोरेशन ने लेने से इंकार कर दिया है.

मंडी में आए किसान गजेन्द्र सिंह रघुवंशी ने कहा पानी से नुकसान हुआ है, 10 परसेंट किसानों की ट्रॉली बाहर खड़ी है, अंदर भी पड़ा है. वहीं सुनील यादव ने बताया धान लेकर आया था, पूरा धान भीग गया. ना पानी की व्यवस्था है और ना ही खाने की. राज्य में पिछले दस दिन से करीब पांच सौ खरीदी केन्द्रों पर अब तक 70335 टन धन की खरीदी हुई है. जिसमें सिर्फ 3306 टन धान का ही परिवहन हो पाया है. नियम कहता है कि खरीदी के 48 घंटे के अंदर अनाज का परिवहन होना चाहिये. खरीदी के बाद धान परिवहन सिर्फ 8 जिलों में हुआ है, 42 में परिवहन का काम भी शुरू नहीं हुआ है. प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में धान भंडारण करने के लिए पर्याप्त बंद गोदाम नहीं हैं.

सरकार कह रही है किसानों के नुकसान की भरपाई होगी, विपक्ष का आरोप है किसान बदहाल है. कांग्रेस प्रवक्ता शहरयार खान ने कहा किसानों की हितैषी सरकार है जो नुकसान हुआ होगा भरपाई की सरकार कोशिश करेगी. वहीं पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता विश्वास सारंग ने कहा किसान की फसल का 48 घंटे में परिवहन हो जाना चाहिये लेकिन धान भीग गया खराब हो गया, लेकिन मंत्री हों अधिकारी हों सिर्फ भ्रष्टाचार में लगे हुए हैं. किसान बदहाल हैं और परेशानी से जूझ रहे हैं. धान का परिवहन नही होने के कारण लाखों किसानों का भुगतान भी रुका हुआ है. जबकि तक धान गोदामों में नहीं पहुंचेगा तक तक उनका भुगतान नहीं हो पाएगा.

भारी बारिश से तबाह हुए किसान अब केंद्र और राज्य सरकार के बीच फंसे

मध्य प्रदेश सरकार इन दिनों बरसात में लाखों हेक्टेयर फसल खराब हुई फसल को लेकर परेशान है. एक तो राज्य सरकार ने जो मुआवज़ा मांगा वो उसे नहीं मिला ऊपर से केन्द्र ने फसल बीमा के पैसे भी बकाये की बात कर लटका दी. नतीजा प्रदेश के किसानों को राज्य सरकार फसल बीमा राशि नहीं दे पा रही है. वहीं बीजेपी और कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं लेकिन बीच में किसान पिस रहा है. आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में ज्यादा बरसात से इस साल 55 लाख किसानों की 60 लाख हेक्टेयर में फसल बर्बाद हो गई. राज्य ने केंद्र सरकार से 6621.28 करोड़ रुपए की राहत राशि मांगी थी. 22 नवंबर को पैसे आए सिर्फ 1000 करोड़ रुपये. लेकिन इससे भी बड़ी मुश्किल केन्द्र ने फसल बीमा के पैसे देने से भी मना कर दिया है, वो भी तब जब राज्य ने अपने हिस्से के 509 करोड़ रुपये जमा कर दिये हैं. कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा पूर्व की शिवराज की सरकार ने अपने समय पर फसल बीमे का प्रीमियम नहीं भरा केन्द्र अब हमसे 2300 करोड़ रूपये मांगे रहा है, मुझे लगता है केन्द्र सरकार प्रदेश के किसानों के साथ धोखा कर रही है.

वहीं विपक्ष में बैठी बीजेपी कह रही है सरकार पूरे कागजा़त नहीं भेजती, अपनी नाकामी का ठीकरा केन्द्र पर फोड़ रही है. पूर्व सहकारिता मंत्री और नरेला से बीजेपी विधायक विश्वास सारंग ने कहा, ‘मैं पूछना चाहता हूं मुख्यमंत्री और मंत्रियों से 11 महीने में कितने यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट दे पाए. आप खुद कुछ कर नहीं पा रहे हैं, बाढ़ आई आंकलन नहीं कर पाए, सर्वे नहीं कर पाए कृत्रिम रूप से पटवारियों की हड़ताल करवाई ताकी सर्वे का काम ना हो सके ये नाकामी है और कुछ नहीं.

गौरतलब है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में केंद्र 60 फीसद और राज्य सरकार 40 फीसद हिस्सा देता है, ऐसे में उसका कहना है कि राज्य 2015 से 2018 का 40 फीसदी के हिसाब से 2300 करोड़ रुपए पहले दे. लेकिन 1.87 हजार करोड़ के कर्जे में डूबी मध्यप्रदेश सरकार, जो दिसंबर से हर महीने और 13500 करोड़ रूपये का कर्ज ले चुकी है ये रकम जुटाना मुश्किल है.

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