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किसान आंदोलन – दूसरे दिन 9 एफआईआर, 12 लोग गिरफ्तारी

भोपाल  3 जून 2018 । किसानों के गांव बंद आंदोलन के दूसरे दिन प्रदेश में 9 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 5 मामले सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो पोस्ट करने के हैं। तीन दिन में अब तक सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो वायरल करने के 7 मामले पंजीबद्ध किए जा चुके हैं।

पुलिस मुख्यालय में आईजी इंटेलीजेंस मकरंद देउस्कर ने शनिवार को बताया कि प्रदेश में गांव बंद के दौरान विशेष घटनाएं नहीं हुईं। कुछ स्थानों पर किसानों ने अपनी सब्जी और दूध सामग्री सड़क पर फेंकी, लेकिन दूसरे किसानों से रोक-टोक नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में दूध और सब्जी फेंकी गई तो होशंगाबाद जिले के सोहागपुर में भी एक किसान ने दूध को सड़क पर फेंकते हुए वीडियो बनाया और वायरल किया।

देउस्कर ने बताया कि सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो वायरल करने के चार जिलों में मामले दर्ज किए गए हैं। आगर मालवा में दो और धार, नीमच व रतलाम में एक-एक प्रकरण दर्ज किए गए, इनमें 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। रतलाम में दो दिन पहले भी सोशल मीडिया पर पिछले साल के किसान आंदोलन के वीडियो को इस साल का बताकर वायरल करने वालों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।

राजगढ़ में किसान आंदोलन के दौरान जब किसानों ने दूध फेंककर विरोध किया तो कानून व्यवस्था की स्थिति बन गई। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर चार लोगों की गिरफ्तारी की। उधर, स्थानीय विधायक गिरीश भंडारी के नेतृत्व में लोगों ने प्रदर्शन कर थाने का घेराव किया। वहीं बैतूल में भी इसी तरह चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की गई है।

किसान आंदोलन, कई जगह प्रदर्शन, बढ़े सब्जियों के दाम

स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू कराने सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 10 दिवसीय आंदोलन के दूसरे दिन शनिवार को भी किसानों ने हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब सहित देश के विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किया। किसान गांव बंदी कर रहे हैं और शहरों को दूध, सब्जी और फलों की आपूर्ति बाधित कर रहे हैं। इसके चलते कई जगह सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। इतना ही नहीं सब्जी और दूध की किल्लत से लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ा रहा है।

हरियाणा
राज्य के जींद स्थित इक्कस गांव में किसानों ने हांसी रोड पर दूध और सब्जियां फेंक कर अपना विरोध जताया। वहीं,कैथल में किसानों ने सब्जी की माला पहनकर सरकार के प्रति नाराजगी जताई। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि वे सब्जियों को शहर भेजने की बजाय गरीबों में बांट रहे हैं। कुरुक्षेत्र के शाहाबाद और अंबाला के मीठापुर में भी किसानों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस बीच, पुलिस ने शुक्रवार को सिरसा और फतेहाबाद जिले में कार्रवाई करने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और कुल पांच मामले दर्ज किए हैं। फतेहाबाद में अकेले 45 लोगों को नामजद किया गया है। जबकि नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पंजाब
पंजाब के विभिन्न शहरों में भी किसानों की गांव बंदी का असर देखने को मिला। कई मंडियों में सब्जियों और फलों की आवक कम होने से कीमतों में वृद्धि शुरू हो गई है। राज्य के नाभा, लुधियाना, मुक्तसर, तरन-तारन, नांगल और फिरोजपुर सहित कई स्थानों पर किसानों का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। सब्जियों और दूध को शहरों में जाने देने से रोकने के लिए किसानों द्वारा नाकाबंदी करने की भी खबरें हैं। फिरोजपुर में किसानों ने जबरन सब्जी मंडी बंद करा दिया। वहीं, बठिंडा में आपूर्ति रोकने की कोशिश कर रहे चार किसानों को एहतियातन हिरासत में लिया गया है।

उत्तराखंड
राष्ट्रीय किसान महासंघ (भाकियू)के आह्वान पर देशभर में जारी आंदोलन का असर उत्तराखंड में भी देखने को मिल रहा है। शनिवार को भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष अजीत प्रताप रंधावा के नेतृत्व में किसान हल्द्वानी के बाजपुर स्थित अनाज मंडी में जुटे और नारेबाजी करते हुए भगत सिंह चौक पहुंचे। वहीं सितारगंज में किसानों ने मुफ्त में दूध बांटा। खटीमा में भी किसानों ने दूध सब्जी की आपूर्ति बंद करने की कोशिश की।

महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के कई शहरों में भी किसान आंदोलन का असर देखने को मिला। इससे नासिक जिले में विभिन्न बाजार समितियों तक सब्जियां पहुंचाने और जिले में दूध एकत्रित करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। अखिल भारतीय किसान सभा के कार्यकारी अध्यक्ष राजू देसाले ने बताया, जिले की सभी दूध डेयरियां बंद हैं और दूध इकठ्ठा करने वाले केंद्र इससे प्रभावित हुए हैं। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने शनिवार सुबह येओला तालुका के विसपुर में सड़कों पर दूध उड़ेल दिया। एपीएमसी में सब्जियां बहुत धीमी गति से पहुंचाई जा रही हैं। नासिक कृषि उत्पादन बाजार समिति के एक अधिकारी ने बताया कि विरोध के चलते सब्जियां देरी से पहुंचाई जा रही हैं।

उत्तरप्रदेश
राज्य के कई स्थानों पर किसानों ने अपनी उपज का उचित दाम दिलानें की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। भाकियू असली के कार्यकर्ताओं ने मुदराबाद के करीब भोट में सब्जी व दूध फेंककर सरकार के प्रति अपना विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान हाईवे पर जाम लग गया, जिससे लंबी दूरी के यात्रियों व नैनीताल जाने वाले पर्यटकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मंडी में खरीददारों की लगी भीड़, दामों में रही कमी

गांव बंद के आज दूसरे दिन लक्ष्मीगंज मंडी सहित शहर की अन्य मंडियों में पुलिस के सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे, वहीं किसान भी गांव से बिना रोक टोक के दूध और सब्जियां लेकर आए और बिना भय के मुस्कराते चले गये।
रोजाना की अपेक्षा आज सब्जियों के भाव थोड़े ज्यादा रहे, लेकिन लोगों को सब्जी लेने में कोई परेशानी नहीं आयी। टमाटर के भाव जहां एक दिन पहले आसमान पर थे, वहीं आज गिरकर 15 रूपये किलो पर आ गये। किसान नेताओं ने एक जून से दस जून तक गांव बंद का ऐलान किया है, आंदोलन के दूसरे दिन आज शहर में न तो दूध और न ही सब्जियों की किल्लत हुई। यह सब जिला प्रशासन की सर्तकता की वजह से हो पाया। जिस कारण ही किसान आज अपना दूध व सब्जी का कारोबार बिना भय कर पाये। किसान आंदोलन के चलते शहर में दूध की कमी न हो इसके लिये ग्वालियर दुग्ध संघ ने दूध वितरण के विशेष इंतजाम किये है। संघ ने आज शहर में अतिरिक्त दूध की सप्लाई की गई।

फर्जी विरोध वायरल करना पड़ा महंगा,3 किसान गिरफ़्तार, रिहा,कोटवार सस्पेंड

किसान आंदोलन को समर्थन दिखाने के चक्कर मे दूध फेंकने का फर्जी विरोध वायरल करना बैतूल में तीन किसानों को भारी पड़ गया। इस वीडियो के व्हाट्सएप्प पर आने के बाद बैतूल कोतवाली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर तहसीलदार कोर्ट में पेश किया है। जहां तीन किसानों पर धारा 151 के तहत शांति भंग करने के आरोप में 35 35 हजार रुपये के बंध पत्र भरवाकर रिहा कर दिया गया। मामला कोतवाली थाना इलाके के कोदारोटी गांव का है।
दरअसल गांव की दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति मर्यादित में राहुल नाम का किशोर बाल्टी में दूध लेकर पहुचा था। जहां पहले से मौजूद राहुल का चाचा दिनेश,रामकरन,और फूलचंद ने सचिव संभु को दूध लेने से मना कर दिया। इस दौरान चारो के बीच दूध लेने न लेने को लेकर हंसी ठिठोली होती रही। दूध न देने का विरोध जताने के लिए इस फर्जी विरोध का पूरा वीडियो बनवाया गया। लेकिन यह वीडियो सोशल मीडिया पर जैसे ही वायरल हुआ ।आज पुलिस और प्रशासन के कान खड़े हो गए। पुलिस ने इस मामले में समिति के सचिव संभुदयाल से शिकायत लेकर तीन किसानों को धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया और तहसीलदार वैद्यनाथ वासनिक के समक्ष पेश किया। जहां किसानों को ताकीद कर 35 35 हजार के बन्ध पत्र भरवाकर रिहा कर दिया गया । इधर इस कार्रवाई से किसान नाराज है।जबकि समिति सचिव किसी भी तरह की शिकायत से ही इनकार कर रहा है।
वायरल वीडियो में विरोध कम हंसी ठिठोली ज्यादा
सोशल मीडिया पर 1 मिनट 44 का जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। उस मे विरोध कम हंसी मजाक ज्यादा दिखाई पड़ रही है। जिसका वीडियो बनवाया गया है। यह वीडियो से साफ जाहिर हो रहा है।
कोटवार हुआ सस्पेंड
इस मामले में तहसीलदार ने ग्राम कोटवार सुखदयाल को सस्पेंड कर हिवरखेड़ी के कोटवार को प्रभार दे दिया है। आदेश में कहा गया है कि सूक्जदयल ने उपद्रव करने वालो की सूचना तत्काल प्रशासन को नही दी। जो दुग्ध समिति में दूध भंडारण रोक रहे थे।
इनका कहना है
हम विरोध जरूर कर रहे थे।लेकिन यह महज आपसी बातचीत ,हंसी मजाक थी। इस पर बंध भरवाना गलत है।
रामकरन किसान
मैंने कोई शिकायत नही की पुलिस ने कागज पर दस्तखत करवाकर मामला बना दिया। जबकि ऐसा नही है।

मंडी को सब्जी की विगत दिनों की भांति सामान्य आवक रही

कृषि उपज मंडी बडोरा के सचिव श्री एसके भालेकर ने बताया कि शनिवार को कृषि उपज मंडी बडोरा में सब्जी की विगत दिनों की तरह सामान्य आवक रही।
मंडी सचिव के अनुसार शनिवार को ग्रामीण क्षेत्रों से आए 20 कृषकों के माध्यम से 24 क्विंटल सब्जी की नीलामी हुई। जिनमें 4 क्विंटल फूलगोभी, 2 क्विंटल पत्तागोभी, 6 क्विंटल टमाटर, 2 क्विंटल बैंगन, एक क्विंटल गाजर, एक क्विंटल मूली, एक क्विंटल पालक, दो क्विंटल धनिया, एक क्विंटल हरी मिर्च, दो क्विंटल ककड़ी, एक क्विंटल भिण्डी एवं एक क्विंटल लौकी की नीलामी शामिल है।
मंडी सचिव श्री भालेकर ने बताया कि फूलगोभी का न्यूनतम मूल्य 1000, उच्चतम मूल्य 1500 एवं प्रचलित 1300 रूपए प्रति क्विंटल रहा। इसी प्रकार पत्तागोभी का न्यूनतम मूल्य 1000, उच्चतम मूल्य 1200 एवं प्रचलित 1100 रूपए, टमाटर का न्यूनतम मूल्य 1000, उच्चतम मूल्य 1500 एवं प्रचलित 1300 रूपए, बैंगन का न्यूनतम मूल्य 1000, उच्चतम मूल्य 1200 एवं प्रचलित 1100 रूपए, गाजार का न्यूनतम मूल्य 1000, उच्चतम मूल्य 1200 एवं प्रचलित 1100 रूपए, मूली का न्यूनतम मूल्य 1000, उच्चतम मूल्य 1500 एवं प्रचलित 1300 रूपए, पालक का न्यूनतम मूल्य 1000, उच्चतम मूल्य 1200 एवं प्रचलित 1100 रूपए, धनिया का न्यूनतम मूल्य 2000, उच्चतम मूल्य 2500 एवं प्रचलित 2300 रूपए, हरी मिर्च का न्यूनतम मूल्य 2000, उच्चतम मूल्य 2500 एवं प्रचलित 2300 रूपए, ककड़ी का न्यूनतम मूल्य 1000, उच्चतम मूल्य 1500 एवं प्रचलित 1300 रूपए, भिण्डी का न्यूनतम मूल्य 1000, उच्चतम मूल्य 1500 एवं प्रचलित 1300 रूपए तथा लौकी का न्यूनतम मूल्य 1000, उच्चतम मूल्य 1500 एवं प्रचलित 1300 रूपए प्रति क्विंटल रहा।

किसान ने जहरीली दवा का सेवन कर आत्महत्या की

जिले के वारासिवनी थाना अंतर्गत ग्राम कासपूर आमाटोला में 31 मई की रात को धन्नालाल बोपचे उम्र 65 वर्ष ने जहरीली दवा का सेवन कर आत्महत्या कर ली।
किसान ने जहरीली दवा का सेवन कर आत्महत्या की
परिजनों के अनुसार उसे हालत बिगडने पर इलाज के वारासिवनी के शासकीय अस्पताल फिर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन जिला अस्पताल से उसे नागपुर रिफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार मृतक पर पंजाब नेशनल बैंक और सहकारी समिति का लगभग 2 लाख 50 हजार रूपये कर्ज था उसकी फसल खराब होने और कर्ज ना चुकाने के कारण उसने ऐसा कदम उठाया।
नायाब तहसलीदार श्री अक्षरिया ने मृतक के परिजनों से मिलकर जानकारी प्राप्त की। वारासिवनी पुलिस ने मामला कायम कर लिया है।

२०  एकड के काश्तकार ने कर्ज से परेशान होकर जहर गटका : खडवा लाते रास्ते मे दम तोडा।

उद्वहन सिंचाई योजना के भरोसे खेती करने में कर्जदार होेने से शनिवार सुबह 10 बजे एक किसान ने फिर जहर गटक कर खुदकुशी कर ली । इस खबर ने किसानोें को बुुरी तरह े क्षुबध कर दिया है। मामला जिले में उद्दवहन सिचाई का है जिससे सहारे जिले में एक दर्जन योजनाये खडी कर हरियाली व खुशहाली के क्षेत्र में पंजाब राज्य का खडवा पीछे छोड देगा का दम ग्राम ग्राम दम भरते इस भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व सांसद नंदकुमारसिंह चोहान थकते नहीं हेै। इसी कडी मे 17 सौ करोड की उद्वहन योजना की सौगात शुक्रवार केो मुख्यंत्र खेडी प्रवास दौरान जिले के
जनजातीय ब्लाक खालवा को देकर लौटे ही है अगले दिन जयपाल की मौत ने योजना पर ही सवाल खडे कर दिये कि जिले की पहली पुनासा उदवहन योजना की नहरे से पानी नहीं मिलने से फसल सूख गयी और बढते कर्ज के बोझ तले उसके पिता ने जहर पीकर खुदकुशी कर ली ।

आंदोलन के दूसरे दिन हालत सामान्य,कृषि मंत्री ने कहा है कि आंदोलन में कोई भी किसान हिस्सा नहीं ले रहा

किसान आंदोलन पर बोलते हुए मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री बालकृष्ण पाटीदार ने कहा है कि किसान आंदोलन में कोई भी किसान हिस्सा नहीं ले रहा है और प्रदेश के किसान मुख्यमंत्री द्वारा किसानों के हित के लिए बनाई गई योजनाओं से खुश हैं। किसानों को राज्य और केंद्र सरकार पर पूरा भरोसा है और उनको विश्वास है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करेगी।

किसान आंदोलन का पहला दिन शांतिपूर्ण तरीके से गुजर जाने के बाद दूसरे दिन की शुरूआत भी अच्छी रही। शहर में किसान आंदोलन अपना प्रभाव छोड़ता दिखाई नहीं पड़ रहा है। दूसरे दिन भी कमोबेश पहले दिन की तरह हालात रहे। दूध की आपूर्ति सत्तत जारी है। फल , सब्जी वालों के ठेले भी सड़कों पर बैखोफ नजर आ रहे हैं। प्रशासन व पुलिस की चौकसी भी मुस्तैद है।

सीहोर मंडी में भी काफी हद तक हालत सामान्य रहे। हड़ताल के दूसरे दिन सब्जी मंडी में किसानों काफी तादात देखी गई। सूत्रों के मुताबिक मंडी में करीब 60 फीसद सब्जी की आवक हुई।

 भाजपा नेता ने माना पार्टी में चल रहा भ्रष्टाचार, इसलिए हारे उपचुनाव

अपने विवादित बयानों के चलते आए दिन सुर्खियां बटोरने वाले बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह ने उपचुनाव के नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा की हार के पीछे भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी हैं। साथ ही विधायक ने दावा किया है कि भले ही भाजपा के बड़े नेता कुछ भी दावा करें, लेकिन भ्रष्टाचार में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि इस हार के पीछे शुद्ध रूप से कर्मचारियों और अधिकारियों में व्याप्त भ्रष्टाचार और समाज को परेशान करने की जो नियत है, उसी के चलते बीजेपी उपचुनाव हारी है। साथ ही उन्होंने कहा कि जब तक तहसील, ब्लॉक और थाने ठीक नहीं होंगे तब तक समाज मे अच्छा संदेश जाने वाला नहीं है। साथ ही कहा कि निश्चित रूप से जितना सुधार समाज में होना चाहिए उतना नहीं हुआ है।

सुरेंद्र सिंह ने बदायू में बीजेपी विधायक पर रेप के आरोप के सवाल पर कहा कि सामाजिक जीवन के किसी कार्यकर्ता पर इस तरह का आरोप लगता है तो ये बेहद निन्दनीय और घिनौना है। नेताओं को अतिरिक्त और विशेष दंड होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज का अगुवा ही भ्रष्ट हो जाएगा, वह चरित्रहीन हो जाएगा तो समाज को कौन बचाएगा। इसलिए ऐसे लोगों का अगर जुर्म प्रमाणित हो जाए तो उन्हें सख्त दंड मिलना चाहिए।

दिग्विजय सिंह ने बुजुर्ग से कहा – अब तू बोला तो यहीं डूबा के जाउंगा

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए पूरे प्रदेश में एकता यात्रा निकाल रहे हैं लेकिन जब समर्थक उनके पास पहुंच रहे हैं तो उन्हें दिग्विजय सिंह के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है। दिग्विजय सिंह की ये नाराजगी उनकी टीकमगढ़ यात्रा के दौरान सामने आई जब एक बुजुर्ग समर्थक को दिग्विजयसिंह ने उस समय फटकार लगा दी जब वो दिग्विजयसिंह की ही जय जयकार कर रहा था।

दरअसल आगामी विधानसभा चुनावों के पहले बनाई गई मप्र कांग्रेस की समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने ओरछा में राम राज मंदिर से 31 मई को अपनी एकता यात्रा शुरु की। यात्रा का लक्ष्य नाराज पुराने नेताओं को वापस पार्टी से जोड़ना है।

इसी कड़ी में जब वे ओरछा के राम राज मंदिर परिसर में थे उसी दौरान एक बुजुर्ग समर्थक लगातार उनके जिंदाबाद के नारे लगा रहा था। दिग्विजय सिंह ने बुजुर्ग को नारे नहीं लगाने को कहा। लेकिन जब बुजुर्ग ने नारेबाजी बंद नहीं की तो दिग्विजय सिंह नाराज हो गए। वे तेजी से बुजुर्ग की ओर लपके और फटकारते हुए कहा कि यहां से निकल जा अब अगर फिर तू बोला तो तुझे यहीं डूबाकर जाउंगा। इसके बाद बुजुर्ग ने कान पकड़कर माफी मांगी और दिग्विजय सिंह के पैर भी छुए। इसके बाद दिग्विजय सिंह बुजुर्ग की पीठ थपथपाते हुए आगे बढ़ गए।

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