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कोरोना के कम होते मामले से तीसरी लहर की आशंका!!

भोपाल 26 नवंबर 2021 । देश में कोरोना के मामले काफी कम हो गए हैं लेकिन प्रतिदिन आ रहे नए मामलों को देखें तो अभी भी भारत से कोविड का खतरा टला नहीं है।
यह सही है कोरोना के मामले देश एवं प्रदेश मे कम हो रहे हैं लेकिन यह तीसरी लहर को बुलावा भी हो सकता है ? दूसरी लहर से पहले भी कोरोना के मामलों में ऐसी शांति देखी गई थी जिसके पशचात लोग पूरी तरह कोविड के डर को भूलकर व्‍यवहार कर रहे थे और फिर अप्रैल-मई-जून में कोविड की भयावहता देखने को मिली थी।

यह खुलासा राष्ट्रीय सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने करते हुए बताया कि
मई-जून में कोरोना की दूसरी लहर में जान से हाथ धोते परिजनों और संबंधियों को देखकर लोगों के मन में इसे लेकर खौफ पैदा हो गया था. हालांकि उस दौर और अब के समय में तीन चीजों का फर्क है.

महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ पुरोहित ने बताया कि पहले और अब में पहला अंतर यह है कि उस समय कोरोना का टीका नहीं मिला था किंतु अब जो समय गुजरा है उसमें बहुत सारे लोगों को कोरोना टीके की पहली डोज मिल चुकी है I
118 करोड़ के आसपास वैक्‍सीन लगने से एक हद तक लोग सुरक्षित हो गए हैं। जैसा कि कहा जा रहा है कि वैक्‍सीन की एक खुराक मिलने के बाद लोगों को अगर कोरोना होगा तो वह माइल्‍ड लक्षणों के साथ ही होगा क्‍योंकि इनमें वायरस से लड़ने की इम्‍यूनिटी पैदा हो गई है। वहीं ऐसे भी लोग हैं जिन्‍हें पहले कोविड हो चुका है और उनमें कोरोना वायरस से लड़ने की क्षमता और एंटीबॉडी पैदा हो चुकी है। लिहाजा पहले और अब में यह एक बड़ा परिर्वतन आया है.

उन्होने बताया कि दूसरा बड़ा अंतर यह है कि अब जांचों में भी कमी आई है । वैक्‍सीनेशन एवं कोरोना संक्रमित होने के बाद होने वाले कोरोना में चूंकि लक्षण बहुत साधारण रहते हैं । जैसे कि बुखार, खांसी या कुछ अन्‍य, ऐसे में लोग जल्‍दी ठीक हो जाते हैं । साथ ही आसपास के लोगों को भी ठीक होते देखते हैं तो वे जांच कराने की जरूरत महसूस नहीं करते जिसकी वजह से संक्रमण की गति का ठीक-ठीक ब्‍यौरा नहीं मिल पाता। लिहाजा आंकड़ों को देखने से स्पष्ट होता है कि कोरोना के मामले कम होते जा रहे हैं या कोरोना अब घट रहा है, हालांकि इससे स्थिति का सही-सही आकलन नहीं किया जा सकता ।

डॉ पुरोहित के अनुसार इन दोनों चीजों का प्रभाव अब वैक्‍सीनेशन पर पड़ रहा है।
संक्रमण कम होने और जांचों की संख्या घटने के कारण लोग कोरोना वैक्‍सीन के प्रति ढीले पड़ रहे हैं या तय कर चुके हैं कि अब वैक्‍सीनेशन नहीं कराना। इस कारण से वैक्‍सीनेशन का अनुपात लगातार घट रहा है ।

उन्होने बताया कि यूरोपीय देशों में एक बार फिर से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं । वहीं एशियन देशों में चीन में कई शहरों में लॉकडाउन लग ही चुका है । रूस में हालात काफी जटिल हो रहे हैं । जबकि इन सभी देशों में काफी हद तक वैक्‍सीनेशन हो चुका है खास बात है कि इन देशों में भले ही वैक्‍सीनेशन हुआ है लेकिन यहां जांचें कम नहीं हुई । जिसकी वजह से कोरोना के मामले पकड़ में आ रहे हैं । अब यदि भारत को देखें तो यहां जांचें कम हो रही हैं और मामले कम आ रहे हैं लेकिन अगर यहां कोई नया वेरिएंट आया या कोरोना वायरस में कोई म्‍यूटेशन हुआ जो वैक्‍सीन के असर को भी नाकाबिल कर सकता है तो स्थितियां काफी खराब हो सकती हैं ।

उन्होने कहा कि
अभी हालात संभले हुए हैं लेकिन इन्‍हें बिगड़ने में समय नहीं लगेगा। उन्होने चेताया कि अभी भी कोरोना के मामले शून्‍य नहीं हुए हैं । पिछले साल और जनवरी से मार्च 2021 में भी 10 हजार के आसपास मामले आ रहे थे और अभी भी आ रहे हैं लेकिन एक बार फिर लोगों ने लापरवाही बरतनी शुरू कर दी है. उन्होने बताया कि नगर ने आयोजित हो रही शादियों में कोविड अनुरूप व्‍यवहार का पालन नहीं हो रहा है । मास्‍क नहीं पहना जा रहा । दूर-दूर से लोग शरीक हो रहे हैं। सरकार के बार-बार समझाने के बाद अगर जनता नहीं ध्‍यान देती तो कोरोना का फैलाव हो सकता है ।

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