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ठंडे बस्ते में चली गई आईएएस और आईपीएस में पदोन्नति की फाइल

भोपाल 31 मार्च 2020 । प्रदेश में जोर-शोर से शुरू हुई राज्य प्रशासनिक सेवा (राप्रसे) से आईएएस और राज्य पुलिस सेवा (रापुसे) से आईपीएस संवर्ग में पदोन्नति की फाइल ठंडे बस्ते में चली गई है। बताया जा रहा है कि कोरोना महामारी के कारण लगभग सभी शासकीय कार्य बंद है, सिर्फ इस महामारी से निपटने संबंधी कार्य ही प्राथमिकता है। सूत्रों का दावा है कि जून के पहले अब पदोन्नति के लिए संघ लोकसेवा आयोग के साथ विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक होना संभव नहीं है।

इसके मद्देनजर सामान्य प्रशासन और गृह विभाग ने भी प्रस्ताव तैयार करने का काम फिलहाल रोक दिया है। दोनों विभागों का पूरा फोकस कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए समन्वय बनाने पर केंद्रित हो गया। इस बार प्रदेश को पदोन्नति के जरिए 18 आईएएस और आठ आईपीएस अफसर मिलने हैं। प्रदेश सरकार ने मार्च-अप्रैल में राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस संवर्ग में पदोन्नति के लिए जनवरी में ही तैयारी शुरू कर दी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ की अनुमति से पदों की मंजूरी का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, जिसे मंजूरी भी मिल चुकी है।

इसके आधार पर अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली, विजिलेंस क्लीयरेंस, विभागीय जांच सहित अन्य जानकारियां जुटाई जा रही थीं। वहीं, गृह विभाग ने भी आठ पदों का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, जिसे भी मंजूर कर लिया गया। विभाग ने पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव बनाकर भेजने के लिए कहा था। सूत्रों का कहना है कि पहले प्रदेश की सियासत में आई अनिश्चितता की वजह से प्रस्ताव तैयार करने का काम प्रभावित हुआ और अब कोरोना की वजह से प्राथमिकता बदल गई है।

सामान्य प्रशासन विभाग, जहां सभी विभागों और जिलों के साथ समन्वय का काम कर रहा है तो गृह विभाग लॉक डाउन को प्रभावी बनाने के मद्देनजर निगरानी कर रहा है। वर्क एट होम किए जाने के कारण प्रस्ताव तैयार करने वाले अधिकारी-कर्मचारी भी कार्यालय नहीं आ रहे हैं। सिर्फ उन्हीं अधिकारियों-कर्मचारियों को मंत्रालय बुलाया जा रहा है, जिनके बिना सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है। पांचवें साल भी गैर राप्रसे अफसरों को मौका नहीं- प्रदेश में लगातार पांचवें साल भी गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को आईएएस संवर्ग में पदोन्नति का मौका नहीं मिलेगा।

राज्य सरकार ने सभी 18 पद राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को देने का निर्णय किया है। जबकि, तत्कालीन सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने दो बार इसको लेकर मुख्यमंत्री कमल नाथ को पत्र लिखे थे, लेकिन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इसके लिए तैयार नहीं थे। अधिकारियों का मानना था कि नियमों में विशेष परिस्थिति में गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को आईएएस संवर्ग में लेने का प्रावधान है और फिलहाल ऐसी परिस्थिति नहीं है। हालांकि, पहले ऐसी कौन-सी परिस्थिति थी, इसका वे प्रभावित अधिकारियों को जवाब नहीं दे सके।

सरकार को चुनौती देने वालों को भी मिलेगा मौका

सूत्रों के मुताबिक राज्य प्रशासनिक सेवा संवर्ग में वरिष्ठता को लेकर सरकार के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण और फिर हाईकोर्ट में चुनौती देने वाले छह अधिकारियों को भी इस बार पदोन्नति का मौका मिलेगा।

दरअसल विनय निगम, अरुण परमार, राजेश ओगरे, भारती ओगरे, विवेक श्रोत्रिय और वरदमूर्ति मिश्रा अब नियमानुसार पदोन्नति की पात्रता श्रेणी में आ गए हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामला पदोन्नति के आड़े नहीं आएगा।

यदि कोर्ट से इनके पक्ष में फैसला आ जाता है तो फिर वरिष्ठता नए सिरे से तय होगी। 24 अफसरों में से होगा आठ अधिकारियों का चयन राज्य पुलिस सेवा (रापुसे) से भी आठ अधिकारी आईपीएस संवर्ग में पदोन्नत होंगे।

इसके लिए राज्य सरकार द्वारा भेजे प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। विभाग ने पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव भी मांग लिया है। बताया जा रहा है कि एक पद के विद्ध तीन अधिकारियों के नाम प्रस्तावित किए जाएंगे। इसमें 1995-96 बैच के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के नाम प्रस्तावित होंगे।

बताया जा रहा है कि देवेंद्र सिरोलिया, यशपाल सिंह राजपूत, धर्मवीर सिंह, अरविंद कुमार तिवारी, प्रियंका मिश्रा, वीरेंद्र मिश्रा, प्रमोद कुमार सिन्हा, विजय भागवानी, राजीव मिश्रा, प्रकाश चंद्र परिहार, निश्चल झारिया, रसना ठाकुर, संतोष कोरी, जगदीश डाबर, मनोहर सिंह मंडलोई, रामजी श्रीवास्तव, जितेंद्र सिंह पवार, सुनील कुमार तिवारी, संजीव कुमार सिन्हा, संजीव कुमार कंचन, विनोद कुमार सिंह चौहान, मनीष खत्री और राजेश कुमार त्रिपाठी के नामों पर विचार किया जाएगा।

अनिल कुमार मिश्रा के खिलाफ सीआईडी जांच चल रही है, इसलिए उनका नाम इस बार भी पदोन्नति की पात्रता रखने वाले अधिकारियों की सूची में नहीं आएगा।

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