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ईओडब्ल्यू में सिंहस्थ घोटाले की शिकायतों पर प्राथमिकी दर्ज

उज्जैन 15 सितम्बर 2019 । मध्यप्रदेश के बहुचर्चित *सिंहस्थ घोटाले* में करोड़़ों रुपए के एलईडी और शौचालय कहां गए ?, इसकी जांच शुरू हो गई है । जांच में पता चला है कि बहुत सारी एलईडी तो अफसरों के निजी बंगलों की शोभा बढ़ा रही हैं। उज्जैन में अप्रैल-मई 2016 में सिंहस्थ का आयोजन किया गया था। आयोजन से पहले महाकुंभ में स्नान करने के लिए आने वाले और वहां पर ठहरने वाले श्रद्धालुओं के लिए तमाम सरकारी इंतजाम किए गए थे। उसी इंतजाम के दौरान अफसरों और प्राइवेट फर्म के संचालकों ने मिलकर तमाम गड़बड़झाला भी किया था। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ‘ईओडब्ल्यू’ ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। शुरुआती जांच में पता चला कि जिम्मेदार अफसरों ने सिंहस्थ के बाद साढ़े तीन करोड़ रुपए से अधिक की एलईडी लाइट गायब कर दी थी। पानी की टंकी और शौचालय तक गायब हो गए हैं। सिंहस्थ के आयोजन तक सडक़ का निर्माण हुआ नहीं था और अफसरों ने ठेकेदार को पूरी सडक़ के निर्माण का भुगतान कर दिया।

विधानसभा चुनाव में सुर्खियों में था घोटाला

विधानसभा चुनाव 2018 से पहले सिंहस्थ का घोटाला सुर्खियों में था। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सदन से सडक़ तक तमाम आरोप लगाए थे। यह बात दीगर है कि पुरानी सरकार ने विधानसभा में यह दावा किया था कि सिंहस्थ की तैयारियों में किसी तरह का घोटाला नहीं किया गया है। सत्ता परिवर्तन के बाद आधा दर्जन मामलों की जांच शुरू की गई है। सूत्र बताते हैं कि दो मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई है। जो प्राथमिकी दर्ज की गई है, उसमें पानी की टंकी की गायब होने अथवा फर्म की ओर से तय मात्रा में उपलब्ध नहीं कराने का मामला है। दूसरा मामला श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए अस्थाई शौचालयों को लेकर है। चार अन्य शिकायतों की जांच की जा रही है, लेकिन वह जांच अभी शुरुआती दौर में है। चार शिकायतों पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। ईओडब्ल्यू को अलग-अलग समय में कुल छह शिकायतें मिली हैं, जिनकी जांच में अलग-अलग विभागों के एक दर्जन से अधिक अधिकारी संदेह के दायरे में हैं। ठेकेदारों से उनकी मिलीभगत और दोनों की भूमिका की जांच की जा रही है।

दो अफसरों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

ईओडब्ल्यू की जांच शुरू होने से पहले बहुत सारे दस्तावेज गायब हो गए हैं। खुद अफसर इसे स्वीकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्राथमिक जांच की जा रही है। गड़बड़ी से जुड़े दस्तावेज मिलना अभी बाकी है। दस्तावेज मिलने के बाद तय होगा कि शिकायतों पर लगाए गए आरोप कितने प्रमाणित व अप्रमाणित नहीं हैं। सूत्र बताते हैं कि दस्तावेज गायब करने में दो अफसरों की भूमिका है।

मंत्री उमंग सिंघार ने उठाए थे सवाल

प्रदेश के वन मंत्री उमंग सिंघार और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच चले बयानों के तीर के दौरान भी सिंहस्थ का मामला सामने आया था। उमंग यह कहकर सवाल उठाया था कि सिंहस्थ का पूरा घोटाला नगरीय प्रशासन विभाग से जुड़ा है। चूंकि वह विभाग दिग्विजय के बेटे जयवर्धन सिंह के पास है, इसलिए दिग्विजय उसकी चर्चा नहीं करते हैं। उसके बाद मुख्यमंत्री कमल नाथ को लिखी गई जयवर्धन की नोटशीट सोशल मीडिया में वायरल हुई थी।

जांच से जुड़ी प्रमुख शिकायतें

 मेला क्षेत्र के लिए एलईडी लाइट खरीदी गई थी। मेला खत्म होने के बाद दो हजार एलईडी गुम हो गई। गुम एलईडी का मूल्य तकरीबन 3 करोड़ 60 लाख रुपए है।
नगर निगम उज्जैन
मेला क्षेत्र में पानी की टंकी और स्टैंड लगवाए गए थे। सिंहस्थ के बाद 434 पानी की टंकियों और स्टैंड स्टोर शाखा में जमा नहीं किए गए।
मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी
मकोडिया आम से खास चौक और खास चौक से मंगल नाथ मंदिर तक 2.9 किमी सडक़ पर डिवाडर बनाने, विद्युत खंभे लगाने, लाइट लगाने के लिए 1 करोड़ 11 लाख रुपयों का कार्यादेश दिया गया था। मेला शुरू होने तक मात्र मंगल नाथ मंदिर से संदीपनि आश्रम तक मात्र 900 मीटर सडक़ बनाई गई थी और भुगतान पूरे 2.9 किमी का कर दिया गया। अगर काम पूरा नहीं था, तो भुगतान नहीं करना था।
पीडब्ल्यूडी
प्रत्येक पड़ाव स्तर पर पांच सौ शौचालय तथा 10 चेजिंग रूप की व्यवस्था बनाई गई थी। बहुत सारे शौचालय और चेजिंग रूप में बिजली नहीं लगी थी। काली चूरी नहीं डाली गई। नंबर नहीं डाले और आवश्यक संख्या में सफाई कर्मचारी नहीं रखे गए थे। बाद में बहुत सारे शौचालय गायब हो गए।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग
मेला क्षेत्र में अस्थाई बिजली की लाइन, ट्रांसफारमर तथा खंभों के लिए 17 करोड़ रुपए का ठेका दिया गया था। सिंहस्थ, खत्म होने के बाद में अस्थाई लाइनों को खोल कर निकालने के लिए अलग से 4 करोड़ 50 लाख का ठेका दिया गया। जांच का मुद्दा यह है कि जब पता था कि लाइनें अस्थाई हैं, तो ठेका एक साथ क्यों नहीं दिया गया।

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