मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> पांच महीने पहले गोल्ड मेडल देश को जिताया

पांच महीने पहले गोल्ड मेडल देश को जिताया

नईदिल्ली 27 अप्रैल 2020 ।  निवासी साउथ एशियन गेम्स में मात्र 5 महीने पहले गोल्ड मेडल देश को जिताने वाली इंडियन खो खो टीम की लीड प्लेयर नसरीन शेख उसका परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है।

करीब पांच माह पहले जिस बेटी ने देश को खेल में सोना दिलाया आज उसकी हालत अब इतनी खराब है कि वो अपनी तय डाइट भी नहीं ले पा रही। साउथ एशियन गेम्स में भारतीय महिला खो-खो टीम का नेतृत्व करने वाली नसरीन शेख की अगुवाई में ही भारत ने नेपाल को 17 -5 से मात देकर गोल्ड मेडल जीता था। पिछले करीब एक माह से चल रहे लॉकडाउन ने नसरीन के घर की हालत बेहद खराब कर दी है।

नसरीन के घर में पांच बहनें और चार भाई हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है। परिवार दिल्ली के शकरपुर में रहते हैं। आम दिनों में पिता मोहम्मद गफूर बर्तन बेचने का काम किया करते थे। वो जगह-जगह जाकर बर्तन बेचते थे, जिससे नसरीन का घर ठीक-ठाक चल जाता था लेकिन जब से लॉकडाउन लगा है, तब से पिताजी का कामकाज पूरी तरह से बंद है। घर में नसरीनऔर पिता मोहम्मद गफूर के अलावा कोई कमाने वाला नहीं है। नसरीन के सभी बहन-भाई अभी पढ़ रहे हैं। नसरीन खुद फाइनल ईयर में है।

नसरीन एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से उनकी खो-खो टीम की कैप्टन है। जिसका एएआई के साथ एक साल का खेलने का अनुबंध है। यह काम खुद नसरीन अपने दम पर ही लिया है जिसका 26 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है, लेकिन यह वेतन हर माह नहीं मिलता बल्कि तीन-तीन माह में मिलता है। तीन माह में करीब 70 हजार रुपए मिलते हैं। नसरीन को मिलने इस वेतन से नौ बच्चों का भरण-भोषण, पढ़ाई-लिखाई इतने कम पैसों में नहीं हो पाती।

नसरीन जो वेतन के पैसे मिल रहे हैं वो परिवार में ही खर्च हो जाते हैं। एक खिलाड़ी के तौर पर डाइट में दूध, अंडे, फल-फ्रूट रोजाना लेना जरूरी हैं, लेकिन अभी तक नसरीन व परिवार के लोग दो वक्त के खाने का इंतजाम ही मुश्किल से कर पाते हैं। नसरीन का कहना है कि हालांकि स्थितियां ज्यादा खराब होने पर खो-खो फेडरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से मुझे मदद मिली है। पिछले महीने मेरी बहन को टाइफायड हुआ था तो फेडरेशन ने ही इलाज का खर्चा उठाया था। यदि मुझे डाइट नहीं मिली तो मैं कमजोर हो जाऊंगी और भविष्य में फिर शायद टीम के लिए खेल भी न सकूं।

नसरीन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंज केजरीवाल सहित तमाम बड़े लोगों को लिखा है। सीएम को ट्वीट भी किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

नसरीन का कहना है कि में सरकारी नौकरी चाहती हूं, ताकि अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकूं। आज देश में क्रिकेटर इस महामारी में लोगों की मदद कर रहे हैं, लेकिन खो-खो प्लेयर के हाल ऐसे हैं कि हमें अपनी डाइट के लिए तक सरकार से लड़ना पड़ रहा है। ये हाल तब हैं जब मैं 40 नेशनल, 3 इंटरनेशनल खेल चुकी हैं। गोल्ड मेडल जीत चुकी हूं।

– 2016 में नसरीन का चयन इंदौर में हुई चैंपियनशिप प्रतियोगिता के लिए हुआ।

– 2018 में लंदन में हुए खो-खो कॉम्पीटिशन के लिए चुनी गईं। 219 में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता।

– नसरीन के खो खो खेलने पर उसके परिजनों ने ही आपत्ति जताई थी क्योंकि इस खेल में लड़कियों को कम कपड़े पहनने पर परिवार का विरोध था लेकिन नसरीन के पिता ने साथ दिया , हौसला भी बढ़ाया ।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

फतह मुबारक हो मुसलमानो, भारत के खिलाफ जीत इस्लाम की जीत…जश्न मनाने के बदले जहर उगलने लगा पाक

नई दिल्ली 25 अक्टूबर 2021 । खराब बल्लेबाजी और खराब गेंदबाजी की वजह से टीम …