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पूर्व PM मनमोहन सिंह ने कहा- चीनी बड़े चतुर होते हैं

नई दिल्ली 18 अक्टूबर 2019 । पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ सिर्फ “सतही मुद्दों” पर चर्चा की, लेकिन वह सीमा विवाद और कश्मीर के जैसे “तनावपूर्ण बिंदुओं” से बचकर निकल गए. पूर्व प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले यहां एक संवाददाता सम्मेलन में मोदी-शी के बीच हुई दूसरी “अनौपचारिक शिखर वार्ता” को खारिज करते हुए इसे “जुमलेवाली बातचीत” करार दिया.
मोदी और शी ने पिछले साल वुहान में हुई पहली अनौपचारिक शिखर वार्ता की तर्ज पर पिछले सप्ताह दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता की थी। बताया गया है कि इस दौरान दोनों नेताओं के बीच व्यापार और निवेश पर बातचीत हुई. मनमोहन सिंह ने कहा, “इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि सीमा और कश्मीर के बारे में चर्चा हुई या नहीं. ऐसा लगता है कि इस बारे में कोई बात नहीं हुई. तनावपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा नहीं हुई, सिर्फ सतही मुद्दों पर चर्चा की गई.”

उन्होंने कहा, “ये तो जुमले वाली बातचीत हुई, इसमें कोई ताप नहीं है.” पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “चीन के लोग बड़े चतुर होते हैं और वे जानते हैं कि भारत को किस तरह फिसलाया जा सकता है. भारतीय लोग भी समझते हैं कि चीन के साथ हमारी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकल रहा है.”

कर्नाटक विधानभा उपचुनाव से पहले पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की पार्टी नेताओं से अपील, कहा – हमें अब सामूहिक नेतृत्व में…

कर्नाटक में होने वाले विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने नेताओं से एक अपील की है. उन्होंने कहा कि है कि प्रदेश इकाई के नेता अब सामूहिक नेतृत्व के अंतर्गत काम करने और राज्य के प्रभावशाली समुदायों को विश्वास में लेने को लेकर काम करें. पार्टी के वरिष्ठ नेता एस आर पाटिल ने एम सी वेणुगोपाल के साथ गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की थी. उन्होंने गुरुवार को बताया कि पार्टी प्रमुख से राज्य में बाढ़ की स्थिति और 15 विधानसभा सीटों पर आगामी उपचुनाव के बारे में विस्तार से चर्चा की.
पाटिल ने मीडियाकर्मियों से कहा था कि पार्टी प्रमुख ने हमसे सामूहिक नेतृत्व में काम करने और सभी प्रमुख जातियों और समुदायों को विश्वास में लेने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि वह प्रमुख समुदायों, खासकर, वोक्कालिगा, लिंगायत और ब्राह्मण का जिक्र कर रही थी. पाटिल ने बताया कि गांधी ने राज्य के नेताओं से निजी अहम् को त्यागने और राज्य में मजबूत पार्टी खड़ी करने की भी सलाह दी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि पार्टी को दिसंबर में होने वाले उपचुनाव में जीत दर्ज करनी चाहिए.

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा था कि कांग्रेस-जद (एस) के अयोग्य ठहराए गए विधायक अगर उप चुनाव लड़ना चाहते हैं तो उन्हें बीजेपी के टिकट दिए जाएंगे, हालांकि पार्टी के भीतर से ही किसी भी ऐसे कदम के खिलाफ विरोध के स्वर उठ रहे हैं. उन्होंने कहा था कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि पूर्व विधायकों को टिकट देने की ‘हमारी जिम्मेदारी’ है. तत्कालीन विधायकों द्वारा की गई बगावत के कारण जुलाई में कांग्रेस-जद(एस) की सरकार गिर गई थी और उसके बाद राज्य में बीजेपी ने सरकार बना ली थी. अयोग्य विधायक जिन निर्वाचन क्षेत्रों से आते हैं वहां पर दिसंबर माह में उप चुनाव होने है. येदियुरप्पा ने 2018 में हारे उम्मीदवारों और भाजपा के टिकट के आकांक्षियों को यह कहकर संतुष्ट करने का प्रयास किया है कि उन लोगों के लिए राज्य संचालित बोर्ड एवं निगमों में अवसर गढ़े जाएंगे.

उन्होंने शिमोगा जिले के शिकारीपुरा में संवाददाताओं से कहा था कि उप चुनाव नजदीक हैं, 15 सीटों के लिए तारीखों की घोषणा हो गई है. अमित शाह ने कहा था कि इस्तीफा देने वाले और बीजेपी से चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों को सीट (टिकट) दिए जाएंगे, यह हमारी जिम्मेदारी है.’ उन्होंने कहा था कि यदि आप हमारी पार्टी की ओर से खड़ा होना चाहते हैं तो आपको प्राथमिकता दी जाएगी, उम्मीदवार बनाया जाएगा. आपकी जीत की जिम्मेदारी भाजपा कार्यकर्ता और नेताओं की होगी.’ येदियुरप्पा की टिप्पणियां इस मायने में अहम हैं कि अयोग्य विधायकों को उप चुनाव के टिकट देने के खिलाफ भाजपा के भीतर से ही आवाजें उठ रही हैं.

कांग्रेस के अयोग्य विधायक बीसी पाटिल ने येदियुरप्पा के बयान का स्वागत किया. हालांकि उन्होंने कहा कि अयोग्य विधायकों ने बीजेपी में शामिल होने के बारे में अभी विचार नहीं किया है. उन्होंने कहा था कि अदालत को हमारी योग्यता के बारे में फैसला करने दीजिए उसके बाद हम इस पर विचार करेगे और फैसला लेंगे. भाजपा को सत्ता में बने रहने के लिए आगामी उप चुनाव में कम से कम छह सीटें जीतनी होंगी.

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