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चार राजभवनों में मचा हड़कंप, राज्यपालों की उड़ी नींद, अमित शाह ने किया अलर्ट

नई दिल्ली 4 जुलाई 2018 । कर्नाटक की तर्ज पर चार राज्यों में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सरकार बनाने का मौका मांगने के पैंतरे ने उन चार राज्यपालों की नींद उड़ा दी है जिन्होंने सबसे बड़ी पार्टी के दावे को नकार कर भाजपा गठबंधन की सरकार बनवाई थी. गोवा, मणिपुर, मेघालय और बिहार के राजभवनों में बुरी तरह हड़कंप मचा हुआ है. शुक्रवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इन राज्यों के राज्यपालों से फोन पर बात की और उन्हें भाजपा गठबंधन की सरकारों के गठन से जुड़े दस्तावेज दुरुस्त करने की हिदायत दी है.

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कार्यालय के एक स्टाफ ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पहले मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला से फोन पर बात की. नजमा के अमेरिका में होने की वजह से कई बार कोशिश करने के बाद उनसे बात हो पाई. बाद में शाह ने नजमा की ग़ैर मौजूदगी में मणिपुर का प्रभार संभाल रहे असम के राज्यपाल जगदीश मुखी से बात की. शाह ने इन्हें किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट किया है. दरअसल भाजपा कांग्रेस के गोवा, मणिपुर और मेघालय में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने दावा ठोकने के ऐलान से बुरी तरह बेचैन है. भाजपा को डर है कि अगर कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया तो उसके लिए मुश्किल हो सकती है. इन राज्यों में उसकी सरकारें संकट में सकती है. चारों राज्यों की सत्ता से उसकी विदाई हो सकती है. इस आशंका ने अमित शाह की चिंता बढ़ा दी है.

दरअससल गोवा, मणिपुर, मेघालय और बिहार में भाजपा को उसी के दांव से चित्त करने के कांग्रेस और राजद के पैंतरे से अमित शाह बैकफुट पर आ गए है. कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है पार्टी चार राज्यों के मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने के कानूनी पहलुओं पर विचार कर रही है. कई बार खुद को जोड़-तोड़ की राजनीति का माहिर साबित कर चुके अमित शाह पहली बार बेचैन हैं. इसी बेचैनी में शुक्रवार को उन्होंने चारों राज्यपाल से बात की. इसी के बाद चारों राजभवनों में अफरा-तफरी का माहौल है. राजभवन के अधिकारी देर रात तक सरकार गठन से जुडे दस्तावेज़ों की जांच पड़ताल करते रहे. एक राजभवन के आला अधिकारी के मुताबिक दस्तावेजों में ऐसी कई खामियां मिली हैं जिनके सामने आने पर ये सरकारें संकट में आ सकती है.

कर्नाटक मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह राज्यपाल की भूमिका पर सख़्त टिप्पणी की है उसे देखते हुए भाजपा को यह ख़तरा पैदा हो गया है कि इन चार राज्यपालों का मामला भी अगर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो वहां इनकी भी इसी तरह किकिरी होगी. अमित शाह ने चारों राज्यपालों के मामला ठंडा पड़ने तक अपने-अपने राज्यों में ही रहने और स्थिति पर पैनी नजर रखने को कहा है. हालांकि राज्यपाल का पद संवैधानिक होता है सत्ताधारी पार्टी के अध्यक्ष का उन्हें इस तरह की हिदायत देना क़तई उचित नहीं है. लेकिन मोदी राज में सब कुछ जायज़ है.

ग़ौरतलब है कि दो दिन पहले कांग्रेस और राजद ने अचानक या पासा फेंका था कि अगर कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी को बहुमत न होने के बावजूद सरकार बनाने का न्योता देना था संवैधानिक रूप से सही है तो फिर गोवा, मणिपुर, मेघालय और बिहार में में यह मौका उन्हें मिलना चाहिए. तभी से भाजपा की बेचैनी बढ़ी हुई है. जिस तरह कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक के राज्यपाल के फैसले को चुनौती देकर बहुमत साबित करने का वक़्त कम करवाने में कामयाबी हासिल की है उससे भाजपा की मुश्किलें बढी हैं.

अगर कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस मिलकर येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने से रोक लेते हैं तो कांग्रेस चारों राज्यों में भाजपा को कानूनी दांवपेच में फंसाएगी। कांग्रेस की इसी रणनीति से अमित शाह और राज्यपालों की नींद हराम हो गई है.

पीडीपी के साथ कांग्रेस के गठजोड़ की अटकलें तेज

कश्मीर की सियासत में अचानक गरमी आ गई है। राजनीति के गलियारों में फिर से सरकार के गठन की चर्चाएं हैं। भाजपा के साथ मिलकर साढ़े तीन साल सरकार चलाने वाली पीडीपी के कांग्रेस से गठजोड़ की अटकलें तेज हो गई हैं। कांग्रेस और पीडीपी सरकार बनाने को लेकर मना कर रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर कुछ तो चल रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और पार्टी की जम्मू कश्मीर की प्रभारी अबिका सोनी भी मंगलवार को श्रीनगर में पहुंच रही हैं। पार्टी ने अपने सभी विधायकों, एमएलसी, पूर्व विधायकों, पूर्व एमएलसी और पदाधिकारियों को बुलाया है। सभी सोमवार को श्रीनगर के लिए रवाना हो गए। लंबे अरसे के बाद कांग्रेस की श्रीनगर में उच्च स्तरीय बैठक हो रही है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि बैठक में पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार गिरने के बाद राज्य में पैदा हुए राजनीतिक हालात, सुरक्षा, संसदीय चुनाव, पार्टी को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि इसमें पीडीपी के साथ गठबंधन सरकार बनाने पर सभी नेताओं की राय ली जाएगी। आजाद और सोनी इस मुद्दे पर राज्य के वरिष्ठ नेताओं से सलाह ले सकते हैं।

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