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जीडीपी ने बिगाड़ा मूड, 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की राह हुई और मुश्किल

नई दिल्ली 30 मार्च 2020 । मोदी सरकार ने साल 2024 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. लेकिन अब यह लक्ष्य धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है. सरकार को मौजूदा वित्त-वर्ष (2019-20) से बड़ी उम्मीदें थीं. लेकिन इस वित्त वर्ष ने सरकार को अब तक सबसे बड़ा झटका दिया है.
दरअसल, 2024 तक इकोनॉमी को 5 ट्रिलियन बनाने के लिए सरकार को वित्त-वर्ष 2019-20 से हर साल से कम से कम 8 फीसदी की रफ्तार से सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की जरूरत है. लेकिन 31 मार्च को मौजूदा वित्तीय साल खत्म हो रहा है, इस वित्त-वर्ष में जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार 5 फीसदी के आसपास रहने वाली है. ऐसे में आगे की राह और मुश्किल भरी रहेगी.
कुछ ऐसी रही जीडीपी की रफ्तार
सरकार के पास अब भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर का आकार देने के लिए 4 साल का वक्त बचा है. आंकड़ों के मुताबिक, अब अगर अगले वित्त-वर्ष से जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार 10 फीसदी से ज्यादा होगी, तभी 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का सपना 2024 तक पूरा हो सकता है. लेकिन मौजूदा हालात को देखकर लग रहा है कि यह संभव नहीं है.
मौजूदा वित्तीय साल की पहली तिमाही में जीडीपी की रफ्तार महज 5 फीसदी थी, दूसरी तिमाही में विकास दर की रफ्तार गिरकर 4.5 फीसदी पहुंच गई. जबकि तीसरी तिमाही में मामूली सुधार के साथ 4.7 फीसदी तक पहुंची. और आखिरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 4 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान है.
5 ट्रिलियन इकोनॉमी के लिए सरकार का प्लान
देश 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था कैसे बन पाएगा, इस बाबत सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण और बजट में अपनी तमाम नीतियों को देश के सामने रखा है. इस बार के आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था के तमाम आयामों मसलन रोजगार सृजन, बचत, उपभोग और मांग जैसे विषयों को अलग-अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए.
हालांकि सरकार ने भी माना है कि अगर 8 फीसदी विकास दर पाने में कामयाब रहे तो 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनना कोई मुश्किल बात नहीं है. फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 2.9 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर है.
बहरहाल, मौजूदा हालातों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं. अब महामारी कोरोना वायरस की वजह से स्थितियां और बिगड़ी हैं. इससे उबरने में अर्थव्यवस्था को लंबा वक्त लगेगा.
हालांकि अभी 5 ट्रिलियन इकोनॉमी की राह मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं है. इसके लिए सरकार को बहुआयामी मोर्चे पर काम करना होगा.

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