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गुलाम कश्मीर और गिलगिट भी आयेगा भारत के साथ

नई दिल्ली 10 अगस्त 2019 । कश्मीर मसले को यूनाईटेड नेशंस में उठाने का ऐलान करने के बाद पाकिस्तान के अंदर घमासान मचा हुआ है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान बोल रहे हैं कि हम सभी बिंदुओं पर लीगल रायशुमारी करने के बाद मसलों को इंटरनेशनल फोरम पर उठाएंगे। इमरान खान के लीगल एडवायजर और पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल अनवर मंसूर खान ने कहा ने राय दी है कि अगर पाकिस्तान सरकार कश्मीर मसले को यूनाईटेड नेशंस के सामने उठाता है और अनुच्छेद 370 का हवाला देता है तो पाकिस्तान अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मारेगा। इस मसले को उठाते ही यूनाईटेड नेशंस पाकिस्तान से सवाल करेगा कि अनुच्छेद 370 में पाकिस्तान की क्या भूमिका है। इस सवाल का पाकिस्तान के पास कोई जवाब नहीं है।

अनुच्छेद 370 भारत सरकार और उस समय की कश्मीर सियासत के सदर के बीच का अस्थाई ब्रिज था। दूसरी बात यह भी इस मसले को उठाते ही दुनिया के सामने यह साफ हो जायेगा कि पाकिस्तान भारत के अंदरूनी मसलों में बेवजह दखलंदाजी कर रहा है। यह बात साबित होते ही कश्मीर में आतंकी वारदातों का आरोप भी पाकिस्तान पर साबित हो जायेगा। इन परिस्थितियों में पाकिस्तान के पास केवल एक ही रास्ता है कि कश्मीर में कथित ह्युमन राइट्स वॉयलेशन के मुद्दे को तूल देकर उठाया जाये।

इमरान खान के सामने समस्या यह है कि उन्होंने कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने का मसला यूनाइटेड नेशंस में उठाने का वादा किया है। अब वो अगर ऐसा नहीं करते हैं तो पूरे मुल्क में उनकी किरकिरी होगी। और विपक्षी पार्टियां इसी मसले को लेकर उनकी सरकार को घेर लेंगी। अटॉर्नी जनरल ने यह भी कहा है कि अगर अंदरूनी सियासत के चलते अनुच्छेद 370 को खत्म किये जाने के मसले को यूनाईटेड नेशंस के सामने उठाया भी जाता है तो जनमत संग्रह पर दवाब बनाया जाता है तो इस समय पाकिस्तान के लिए खतरे से खाली नहीं होगा। क्योंकि इस समय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता केवल भारत में ही नहीं बल्कि गुलाम कश्मीर, गिलगिट बालटिस्टान से लेकर बलोचिस्तान तक फैली हुई है।

जनमत संग्रह की शर्तों के अनुसार पाकिस्तान को गुलाम कश्मीर और गिलगिट बालटिस्तान से सेना को पूरी तरह से हटाना होगा और वहां से अपना नियंत्रण स्वतंत्र संस्था के हाथ में देना में होगा। अगर यूनाईटेड नेशंस की इन शर्तों के आधार पर जनमत संग्रह हुआ तो न केवल गुलाम कश्मीर और बालटिस्तान से पाकिस्तान को हाथ धोना पड़ेगा। इसके साथ ही पृथक बलोचिस्तान, सिंध की मांगों के आगे भी पाकिस्तान को झुकना पड़ सकता है।

उधर बिना कहे ही मोदी का साथ देने आ गया तीसरा बड़ा देश

कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान की सियासी जंग अब आर-पार की होती नजर आ रही है। पाकिस्तान ने भारत के अनुच्छेद 370 हटाने के कदम के खिलाफ अपने सभी व्यापारिक संबंध तोड़ लिए हैं। वहीं राजनयिक संबंध भी निलंबित कर दिए हैं। वहीं अब ये सियासी जंग वैश्विक हो गई है और इमरान लगातार मदद मांगने के लिए विश्व के दूसरे बड़े नेताओं से बात कर रहे हैं। हालांकि वो बस मदद ही मांगते रह गए और इधर एक और बड़ा देश बिना कहे ही पीएम नरेंद्र मोदी का साथ देने चला आया।

अलग-अलग देशों से पाकिस्तान ने मांगा साथ
पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे को वैश्विक रंग देने की चाल चल रहा है और लगातार विश्व के बड़े-बड़े नेताओं से कश्मीर मसले पर साथ मांग रहा है। इमरान खान सरकार ने इसके लिए पहले तुर्की और मलेशिया से बात की। हालांकि दोनों ही देशों ने पाकिस्तान को टरका दिया। इसके बाद पाक ने ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉपोरेशन में भी इस मामले को रखा और मदद मांगी लेकिन उनको निराशा ही हाथ लगी। वहीं ब्रिटेन और अमेरिका से भी पाक को हताशा ही मिली।

बिना कुछ कहे ही मोदी का साथ देने आ गया ये देश
दूसरी ओर भारत किसी भी देश के पास मदद मांगने नहीं जा रहा है, फिर भी भारत को वैश्विक नेताओं का साथ मिलते जा रहा है। पहले यूएई और श्रीलंका ने भारत का साथ दिया था और कश्मीर मुद्दे को भारत का आंतरिक मामला बताया था। अब मालदीव भी अनुच्छेद 370 हटाने पर मोदी सरकार के साथ आ गया है। मालदीव ने भारत के इस फैसले का समर्थन कर दिया। मुस्लिम देश मालदीव ने कहा कि हर देश को अपने कानूनों में आवश्यकता के मुताबिक संशोधन करने का अधिकार है।

फारूक अब्दुल्ला की बढ़ी मुश्किलें, 7 करोड़ के लोन फ्रॉड में आया नाम

NCP के नेता और जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) के घोटाले की जांच के दौरान 7 करोड़ रुपये के कथित लोन फ्रॉड के सबूत मिले हैं। ED के इस जांच के बाद जेऐंडके बैंक घोटाले के फर्जीवाड़े में मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और उनके कुछ करीबी सहयोगियों का नाम सामने आ रहा है।

‘फारूक अब्दुल्ला खुलवाए फर्जी खाते’

ED के सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जांच में ये बात सामने आई है कि फारूक अब्दुल्ला ने अपने कुछ करीबी सहयोगियों की मदद से (JKCA) में कुछ फर्जी खाते खुलवाए। एक खाता फारूक अब्दुल्ला के सहयोगी अहसान मिर्जा के नाम पर था। जिसमें मिर्जा को चेक पर दस्तखत करने का अधिकार दिया गया था। ED ने दावा जांच में मिले सबूतों के आधार पर किया है।

ED ने फारूक अब्दुल्ला से की पूछताछ

ED ने फारूक अब्दुल्ला को बुधवार को चंडीगढ़ स्थित अपने दफ्तर में बुलाया। JKCA का ये घोटाला 2010 का है। तब जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने JKCA में कथित 112 करोड़ रुपए के घोटाले का मामला CBI को सौंपा था। जिस पर CBI ने पिछले साल जनवरी में अब्दुल्ला से पूछताछ की थी। ED के सूत्रों ने आगे कहा कि JKCA में मिर्जा कोई चयनित अधिकारी नहीं थे, फिर भी JKCA के प्रेजिडेंट अब्दुल्ला ने उन्हें असोसिएशन का ट्रेजरर (खजांची) नियुक्त कर दिया। उसके बाद JKCA के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ मिलीभगत से असोसिएशन के सामानंतर खाते खुलवा लिए गए।

बिना पर्याप्त दस्तावेज के खुलवाए गए खाते

ED ये पता लगा रही है कि क्या उन्होंने अब्दुल्ला के कई खाते बिना पर्याप्त दस्तावेज के खुलवाए थे। मिर्जा ने इन बैंक अकाउंट्स में लोन लिए और मनी लॉन्ड्रिंग के मकसद से अपने पर्सनल अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए। ED ने मिर्जा के बयान के आधार पर 31 जुलाई को भी फारूक अब्दुल्ला से पूछताछ की थी।

BCCI ने दिए थे 112 करोड़ रूपये

CBI ने JKCA में खातों में अनियमितताएं और गबन के सिलसिले में फारूक अब्दुल्ला और तीन अन्य के खिलाफ श्रीनगर की एक अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। CBI ने आपराधिक साजिश और विश्वासघात के आरोप भी लगाए थे। CBI ने कहा था कि BCCI ने 2002 से 2011 के बीच JKCA को राज्य में क्रिकेट के विकास के लिए 112 करोड़ रुपए दिए थे। CBI ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने इस राशि में से 43.69 करोड़ रुपए का घोटाला कर लिया।

UNSC ने नहीं दिया ‘भाव’, अमेरिका बोला, ‘कश्‍मीर पर हमारी नीति में बदलाव नहीं’

जम्‍मू और कश्‍मीर से भारत सरकार द्वारा अनुच्‍छेद 370 हटाने के बाद पाकिस्‍तान बौखलाया हुआ है. पाकिस्‍तान ने इस मसले पर संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को एक पत्र लिखा है. लेकिन पाकिस्‍तान को इस मामले में यूएनएससी से झटका मिला है. यूएनएससी ने पाकिस्‍तान के इस पत्र पर अब तक कोई कमेंट नहीं किया है. संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की अध्‍यक्ष जोआना रोनेका ने भारत के इस ऐतिहासिक फैसले को यूएनएससी के प्रस्ताव का उल्लंघन बताने संबंधी पाकिस्‍तान के दावे पर कमेंट करने से इनकार किया है.

इसके साथ ही अमेरिका से भी पाकिस्‍तान को झटका लगा है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने साफतौर पर कहा है कि कश्‍मीर पर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं होगा. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्‍ता मॉर्गन ओर्टागस ने मीडिया के सवालों को जवाब देते हुए साफ किया कि कश्‍मीर में अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं होगा.

उन्‍होंने कहा कि हमारे भारत और पाकिस्‍तान के बीच कई सारे मामले हैं. उन्‍होंने यह भी कहा कि हाल ही में पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री इमरान खान अमेरिका आए. लेकिन व‍ह कश्‍मीर के लिए नहीं आए थे. कश्‍मीर एक ऐसा मुद्दा है जिसे हम काफी नजदीक से देख रहे हैं. लेकिन इसके अलावा भी कई सारे ऐसे मुद्दे हैं, जिनपर हम भारत और पाकिस्‍तान के साथ काफी नजदीक से काम कर रहे हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्‍ता मॉर्गन ओर्टागस ने कहा कि आने वाले कुछ दिनों में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के डिप्‍टी सेक्रेटरी भूटान और भारत का दौरा करेंगे. वह इस दौरान दोनों देशों के साथ अमेरिका के संबंधों और बेहतर बनाने पर बातचीत करेंगे. बता दें कि जम्‍मू-कश्‍मीर से भारत द्वारा अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्‍तान बौखलाया हुआ है और इस मामले को अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर ले जाने की फिराक में है. भारत इस रुख पर कायम है कि कश्मीर उसका आतंरिक मसला है.

इसी के तहत पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी आज चीन का दौरा करने वाले हैं. वह इस दौरान चीनी नेताओं से मिलेंगे और कश्‍मीर पर भारत के फैसले पर चर्चा करेंगे. कहा जा रहा है कि वह कश्‍मीर मुद्दे पर चीन से मदद मांगने वहां जा रहे हैं.

दरअसल, अदालत ने सुनवाई के दौरान पूछा था कि क्या रामजन्मभूमि भी गंगा की तरह एक इंसान हैं. जिसके जवाब में के. परासरण ने कई ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्यों का जिक्र किया था. रामलला के वकील से पहले निर्मोही अखाड़ा भी अपने तर्क अदालत के सामने रख चुका है.

इस मामले की सुनवाई CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ कर रही है. इस पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं.

जम्मू में खुले स्कूल, सड़क-बाजार-गलियों में लौटी रौनक -धारा 144 जारी

जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश बन गया है, लेकिन अभी राज्य में एक अजीब-सा सन्नाटा पसरा है. राज्य में धारा 144 लागू है और हर ओर सुरक्षाबल तैनात हैं. इस बीच आज जम्मू क्षेत्र में स्कूल-कॉलेज दोबारा खुले हैं. अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद जम्मू के सांबा से ऐसी तस्वीरें आई हैं, जो हालात सामान्य होने की ओर इशारा करती हैं. सांबा में स्कूल खुल गए हैं और बच्चे एक बार फिर बस्ता उठाकर पढ़ने को निकले हैं. गुरुवार को ही प्रशासन ने फैसला किया था कि जम्मू के उधमपुर और सांबा में सरकारी-प्राइवेट स्कूल और कॉलेज को शुक्रवार से खोला जाएगा. ये सभी स्कूल इस हफ्ते बंद रहे थे. उधमपुर के डिप्टी कमिश्नर पीयूष सिंगला ने कहा कि धारा 144 अभी भी लागू है लेकिन कुछ जगहों पर छूट दी गई है. हम हर इलाके पर नज़र बनाए हुए हैं, बाजारों को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक के लिए खुला रखा गया है. गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश है और लद्दाख को अलग प्रदेश बनाया गया है. राज्य में किसी तरह का हंगामा ना हो और अलगाववादी प्रदर्शन ना कर सकें, इसके लिए सरकार ने हजारों की संख्या में अतिरिक्त सुरक्षाबल को तैनात किया था. एक तरफ जम्मू जिले में स्कूल खुल गए हैं, तो दूसरी ओर श्रीनगर में अभी भी हालात तनावपूर्ण हैं. लोगों को रोजमर्रा का सामान खरीदने के लिए बाजार में जाने की अनुमति है. बाजार में फल, सब्जी, मेडिकल की दुकानें खुली हैं. अभी भी कश्मीर घाटी में मोबाइल फोन, इंटरनेट, टीवी-केबिल बंद हैं.स्कूल, कॉलेज खुलने के अलावा सरकारी अफसरों को भी ऑफिस आना का निर्देश दिया गया था. ऐसे में शुक्रवार को कई सरकारी अफसर अपने दफ्तर पहुंचे.

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