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अंबाला जेल की मिट्टी से बनी गोडसे की मूर्ति ग्वालियर में होगी स्थापित

नई दिल्ली 17 नवंबर 2021 । 30 जनवरी 1948 की वो तारीख जब 5 बजकर 16 मिनट पर बिरला भवन के पास हमेशा की तरह एक तरफ आभा और दूसरी तरफ मनुबेन का सहारा लिए महात्मा गांधी प्रार्थना के लिए निकले थे। मनुबेन को धक्का देकर नीचे गिराते हुए नाथूराम गोडसे ने नमस्ते बापू कहते हुए महात्मा के सीने में उतार दी तीन गोली। जिसके बाद 15 नवंबर को नाथूराम गो़डसे को फांसी दी गई थी। लेकिन इसके 72 साल बाद हिन्दू महासभा की तरफ से नाथूराम गोडसे का बलिदान दिवस मनाया गया। इसतके साथ ही हरियाणा के अंबाला सेंट्रल जेल से लाई मिट्टी से महात्मा गांधी के हत्यारों नाथूराम गोडसे और नारायण आपटे का तिलक किया। हिंदू महासभा की ओर से कहा गया है कि हरियाणा की अंबाला सेंट्रल जेल से लाई गई मिट्टी से नाथूराम गोडसे की मूर्ति बनाई जाएगी जहां 1949 में महात्मा गांधी के हत्यारे को फांसी दी गई थी। हर राज्य में बलिदान धाम का होगा निर्माण

संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ जयवीर भारद्वाज ने संवाददाताओं से कहा कि महासभा के कार्यकर्ता पिछले हफ्ते अंबाला जेल से मिट्टी लेकर आए थे जहां गोडसे और नारायण आप्टे को फांसी दी गई थी। इस मिट्टी का उपयोग गोडसे और आप्टे की मूर्तियां बनाने के लिए किया जाएगा और उन्हें ग्वालियर में महासभा के कार्यालय में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महासभा के कार्यकर्ताओं ने 15 नवंबर को मेरठ (उत्तर प्रदेश) में ‘बलिधान धाम’ में गोडसे और आप्टे की प्रतिमाएं स्थापित कीं। हम हर राज्य में ऐसे बलिदान धाम का निर्माण करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि ग्वालियर जिला प्रशासन ने 2017 में महासभा के कार्यालय में स्थापित गोडसे की प्रतिमा को जब्त कर लिया था, इसे अभी तक वापस नहीं किया गया। देश के विभाजन के लिए कांग्रेस जिम्मेदार

भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि देश के विभाजन (1947 में) के लिए कांग्रेस जिम्मेदार थी, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या हुई। ग्वालियर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र सिंह तोमर ने हिंदू महासभा द्वारा किसी भी प्रकार के सार्वजनिक कार्यक्रम की खबरों से इनकार करते हुए कहा कि अब तक कोई प्रतिमा नहीं लगाई गई है और पुलिस संगठन की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है।

30 जनवरी 1948 की वो तारीख जब 5 बजकर 16 मिनट पर बिरला भवन के पास हमेशा की तरह एक तरफ आभा और दूसरी तरफ मनुबेन का सहारा लिए महात्मा गांधी प्रार्थना के लिए निकले थे। मनुबेन को धक्का देकर नीचे गिराते हुए नाथूराम गोडसे ने नमस्ते बापू कहते हुए महात्मा के सीने में उतार दी तीन गोली। जिसके बाद 15 नवंबर को नाथूराम गो़डसे को फांसी दी गई थी। लेकिन इसके 72 साल बाद हिन्दू महासभा की तरफ से नाथूराम गोडसे का बलिदान दिवस मनाया गया। इसतके साथ ही हरियाणा के अंबाला सेंट्रल जेल से लाई मिट्टी से महात्मा गांधी के हत्यारों नाथूराम गोडसे और नारायण आपटे का तिलक किया। हिंदू महासभा की ओर से कहा गया है कि हरियाणा की अंबाला सेंट्रल जेल से लाई गई मिट्टी से नाथूराम गोडसे की मूर्ति बनाई जाएगी जहां 1949 में महात्मा गांधी के हत्यारे को फांसी दी गई थी। हर राज्य में बलिदान धाम का होगा निर्माण

संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ जयवीर भारद्वाज ने संवाददाताओं से कहा कि महासभा के कार्यकर्ता पिछले हफ्ते अंबाला जेल से मिट्टी लेकर आए थे जहां गोडसे और नारायण आप्टे को फांसी दी गई थी। इस मिट्टी का उपयोग गोडसे और आप्टे की मूर्तियां बनाने के लिए किया जाएगा और उन्हें ग्वालियर में महासभा के कार्यालय में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महासभा के कार्यकर्ताओं ने 15 नवंबर को मेरठ (उत्तर प्रदेश) में ‘बलिधान धाम’ में गोडसे और आप्टे की प्रतिमाएं स्थापित कीं। हम हर राज्य में ऐसे बलिदान धाम का निर्माण करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि ग्वालियर जिला प्रशासन ने 2017 में महासभा के कार्यालय में स्थापित गोडसे की प्रतिमा को जब्त कर लिया था, इसे अभी तक वापस नहीं किया गया। देश के विभाजन के लिए कांग्रेस जिम्मेदार

भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि देश के विभाजन (1947 में) के लिए कांग्रेस जिम्मेदार थी, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या हुई। ग्वालियर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र सिंह तोमर ने हिंदू महासभा द्वारा किसी भी प्रकार के सार्वजनिक कार्यक्रम की खबरों से इनकार करते हुए कहा कि अब तक कोई प्रतिमा नहीं लगाई गई है और पुलिस संगठन की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है।

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