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सरकार को शरजील इमाम मामले में मिला शिवसेना का साथ

नई दिल्ली 23 फरवरी 2020 । हिंदुस्तान के टुकड़े करने की बात करने वाले शरजील इमाम को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। नागरिकता कानून के विरोध में शरजील नाम के सांप ने जो फुफकार मारी थी उसके कारण देशभर के आंदोलनों की बदनामी हुई। नागरिकता कानून के विरोध में देशभर में प्रदर्शन और आंदोलन शुरू है। लेकिन इस पूरे आंदोलन के दौरान किसी ने भी देश विरोधी वक्तव्य नहीं दिया था। इन सब आंदोलनों पर ‘टांग’ ऊपर करने का काम शरजील इमाम ने दिया। शरजील के भाषण सिर्फ भड़काऊ ही नहीं, बल्कि देश विरोधी भी थे। ‘चिकन नेक’ मुस्लिमों का ही है। हम एक हो गए तो देश का ईशान्य क्षेत्र हिंदुस्तान से तोड़ सकते हैं। असम को हिंदुस्तान से काट सकते हैं।’ ऐसे वक्तव्य देकर शरजील ने देश के मुस्लिम समाज का सिर कलम कर दिया है। शिवसेना ने सामना में कहा कि शाहीनबाग सहित देशभर में जो आंदोलन शुरू हैं, उसमें से हर किसी ने शरजील के वक्तव्य का निषेध व्यक्त किया है और कहा है कि इस देशद्रोही को गिरफ्तार करो। इसलिए देश के गृहमंत्रालय को इस मामले में राजनीति न करते हुए इस कीड़े को खत्म करना चाहिए।

‘चिकन नेक’ अर्थात मुर्गी की गर्दन। ईशान्य के राज्यों को हिंदुस्तान से जोड़नेवाले 22 किलोमीटर के महामार्ग को ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। इस चिकन नेक की गर्दन काटने के सपने देखनेवाले शरजील का हाथ उखाड़कर चिकन नेक महामार्ग पर टांगना चाहिए। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के शाहीनबाग परिसर में इस इमाम ने भाषण दिए। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में मुसलमानों द्वारा देशभर में चक्का जाम करने की अभद्र भाषा भी इस युवक ने प्रयोग की। फिलहाल दिल्ली विधानसभा चुनाव का प्रचार शुरू है और शरजील के वक्तव्य के कारण भारतीय जनता पार्टी को प्रचार के लिए बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है। शरजील का वक्तव्य अलगाववादी व देशद्रोही है। दिल्ली में किसी की भी सरकार होती तो उसने शरजील को बेड़ियां पहना दी होतीं इसलिए शरजील को गिरफ्तार करके हाथी की गिरफ्तारी का भ्रम पालनेवाले भक्तगणों को इससे बाहर निकलना चाहिए।

देश में कानून का राज है इसलिए कानून अपना काम करता है। उल्टे शरजील पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई होती तो कानून पर सवाल खड़े किए जाते। शाहीनबाग सहित देशभर में जो आंदोलन शुरू हैं, उसमें से हर किसी ने शरजील के वक्तव्य का निषेध व्यक्त किया है और कहा है कि इस देशद्रोही को गिरफ्तार करो। इसलिए देश के गृहमंत्रालय को इस मामले में राजनीति न करते हुए इस कीड़े को खत्म करना चाहिए। गृहमंत्री अमित शाह सभा से पूछते हैं, ‘तुमने शरजील की वीडियो देखी क्या? कन्हैया कुमार के शब्दों से भी वे अधिक घातक हैं। शरजील ने असम को हिंदुस्थान से तोड़ने की बात की है। हालांकि उसकी सात पीढ़ियों तक भी ये संभव नहीं है।’ हम केंद्रीय गृहमंत्री के इस जोरदार वक्तव्य से सहमत हैं। गत पांच वर्षों में देश तोड़ने की बात क्यों बढ़ रही है और ऐसा बोलनेवालों में पढ़े-लिखे नौजवानों की संख्या ज्यादा क्यों है? ये शोध का विषय है।

शरजील ‘जेएनयू’ से ‘पीएचडी’ कर रहा है और आईआईटी मुंबई का पूर्व छात्र है। ऐसे युवकों के दिमाग में जहर कौन बोल रहा है। इस पर प्रकाश डालना होगा। सवाल एक शरजील या दूसरे कन्हैया कुमार का नहीं है। ये अलगाववादियों द्वारा विद्रोही चिंगारी फेंककर देश के युवकों को आतंकी प्रवाह में धकेलने का प्रयास है। महाराष्ट्र के ‘यलगार’ मामले में गिरफ्तार सभी लोग समाज के नामी-गिरामी विद्वान और विचारक हैं और उन पर भी शरजील की तरह देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। देश की सामाजिक और धार्मिक एकता लगभग समाप्त हो गई है। मुसलमान और हिंदुओं में कलह बढ़े, इराक, अफगानिस्तान की तरह कभी समाप्त न होनेवाली अराजकता, नागरी युद्ध चलता रहे इस प्रकार के प्रयास शुरू हैं। उसे खाद-पानी देने का धंधा ‘राजनीतिक प्रयोगशाला’ में चल रही है। ‘राष्ट्रीय एकात्मता’ नामक शब्द नष्ट करनेवाले प्रयोग यदि विद्रोह की चिंगारी पैदा कर रहे होंगे तो भविष्य आज ही समाप्त हो चुका है, ऐसा मानने में कोई गुरेज नहीं है। शहरी नक्सलवाद है ही। इसी के साथ उच्च वर्ग और उच्च शिक्षित लोगों में आतंकवाद बढ़ाने के लिए राजनीतिज्ञ जहर बो रहे होंगे तो और क्या होगा! एक शरजील को आज पकड़ा है। दूसरा शरजील नहीं बनने पाएगा, इसकी जिम्मेदारी भी सरकार की ही है।

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