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भ्रष्ट आईएएस अफसरों पर शिकंजा कसने की तैयारी में सरकार

भोपाल 24 जुलाई 2019 । प्रदेश सरकार एक बार फिर उन दागी आईएएस-आईपीएस अफसरों की फाइल खोलने जा रही है, जिनके भ्रष्टाचार या अन्य गड़बडिय़ों से जुड़े मामले कई सालों से फाइलों में दबे हुए हैं। इनमें प्रदेश के 48 आईएएस अफसर ऐसे हैं, जिनके खिलाफ विभिन्न मामलों में 85 जांच चल रही हैं। जबकि कई आईएएस अधिकारी ऐसे हैं, जो रिटायर्ड हो चुके हैं और जिनके खिलाफ जांच लंबित है। इनमें सबसे ज्यादा 27 मामले आईएएस अधिकारी रमेश थेटे के विरुद्ध हैं।
विधानसभा में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जिन अफसरों के खिलाफ जांच चल रही है उनमें आरडी अहिरवार, आरके गुप्ता, सीबी सिंह, ओआर तिवारी, रमेश थेटे, अखिलेश श्रीवास्तव, प्रकाश जांगरे, एनबीएस राजपूत, विनोद शर्मा, वेदप्रकाश, एमके सिंह, प्रमोद अग्रवाल, डॉ एम गीता, विवेक पोरवाल, निसार अहमद, मुक्तेश वार्ष्णेय, अरुण तोमर, डॉ. जे विजय कुमार, अजीत केसरी, पीएल सोलंकी, मनीष श्रीवास्तव, मनीष सिंह, पीएस सोलंकी, मनोज श्रीवास्तव, अशोक शाह, प्रवीण अढायच, गोपाल चंद्र डाढ, एमसी चौधरी, रजनीश श्रीवास्तव, मनोज पुष्प, मनु श्रीवास्तव, अविनाश लवानिया, मुकेश शुक्ल, एनएस परमार, अरुणा शर्मा, उर्मिला शुक्ला, आरपी मंडल, एम कुजूर, डीपी तिवारी, सत्यप्रकाश वर्मा, अशोक वर्मा, एमए खान, महेंद्र सिंह भिलाला, अंजु सिंह बघेल, लक्ष्मीकांत द्विवेदी, स्वतंत्र कुमार सिंह, श्रीनवास शर्मा, विनोद कुमार शर्मा शामिल हैं।
खुलेगी इनकी भी फाइल
जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार एक बार फिर से उन दागी अधिकारियों की फाइल खोलने जा रही है जिनके केस वर्षों से दबे हुए हैं। लोकायुक्त ने जहां सरकार से अधिकारियों के खिलाफ चालान पेश करने की अनुमति मांगी है, वहीं दूसरी ओर संगठन ने ऊपरी दबाव में साक्ष्य का अभाव बताकर 25 से ज्यादा मामलों में खात्मा लगा दिया था। इनमें एमए खान, एके श्रीवास्तव, होशियार सिंह, आरके गोयल, जगत स्वरूप, राकेश बंसल, एलएन मीणा, रामजी दांडेकर, आईसीपी केसरी, मोहन गुप्ता, बीआर नायडू, बीएल खरे, एके जैन, मोहम्मद सुलेमान और शहजाद खान शरीक हैं। इनमें से कुछ अब इस दुनिया में नहीं जबकि कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसा फायदा अन्य दागी अधिकारियों को न मिले इसके लिए एक बार फिर से पुरानी फाइलें खोले जाने की तैयारी चल रही है। मध्यप्रदेश लोकायुक्त वर्तमान में प्रदेश के लगभग 36 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ जांच कर रहा है। लोकायुक्त संगठन के अलावा अन्य जांच एजेसियों में अफसरों के खिलाफ लंबित मामलों की लंबी फेहरिस्त है। मप्र के लगभग 25 आईएएस अधिकारियों की जांच मप्र आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो कर रहा है।
सीबीआई ने मांगी जानकारी
सूत्र बताते हैं कि वर्षों से लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में भ्रष्टाचार के जो मामले लंबित हैं, उनकी जानकारी सीबीआई ने भी मंगाई है। जिन अधिकारियों का केस उनके पास पहुंचा है, उनमें उनका नाम है जिनके खिलाफ लोकायुक्त में वर्ष 2009 से भ्रष्टाचार की जांच चल रही है। इस सूची में प्रदेश के तीन दर्जन आईएएस अफसरों के नाम शामिल थे। इनमें कुछ अफसरों को लोकायुक्त क्लीनचिट दे दी है।

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