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कल से सस्ता गोल्ड बेचेगी सरकार

नई दिल्ली 3 मार्च 2020 । सरकार सॉवरेन गोल्ड बांड 2019-20 (सीरीज-10) कल यानी 2 मार्च 2020 से जारी कर रही है। गोल्ड खरीदने के लिए 6 मार्च 2020 तक मौका रहेगा। इस दौरान लोग सस्ते में गोल्ड खरीद सकते हैं। सस्ते में गोल्ड बेचने की यह सरकार की अंतिम गोल्ड सीरीज होगी। शनिवार को गोल्ड का बंद भाव 42,870 रुपये प्रति दस ग्राम था। वहीं सरकार सॉवरेन गोल्ड बांड 2019-20 (सीरीज-10) के तहत 42,600 रुपये प्रति दस ग्राम के रेट पर बेच रही है। ऐसे में लोगों के पास 270 रुपये प्रति दस ग्राम सस्ते में सोना खरीदने का मौका है। यही नहीं अगर आप ऑनलाइन पेमेंट करें तो आपको 50 रुपये प्रति ग्राम की अतिरिक्त की छूट भी मिलेगी। निवेशक न्यूनतम 1 ग्राम गोल्ड बांड खरीद सकता है।

सॉवरेन गोल्ड बांड 2019-20 (सीरीज-10) के तहत गोल्ड बांड का इश्यू प्राइस 4,260 रुपये प्रति ग्राम निर्धारित किया गया है। निवेश करने वालों को 11 मार्च 2020 को गोल्ड बांड आंवटित किया जाएगा। आरबीआई ने यह जानकारी दी है।

ऑनलाइन भुगतान पर मिलेगी 50 रु प्रति ग्राम की छूट
सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बांड 2019-20 (सीरीज-10) में निवेश कर गोल्ड खरीदने वालों को अतिरिक्त छूट देने का भी फैसला किया है। गोल्ड बांड के लिए ऑनलाइन आवेदन और भुगतान करने वालों को प्रति ग्राम 50 रुपये की अतिरिक्त छूट भी दी जाएगी। इस प्रकार अगर कोई निवेशक 10 ग्राम गोल्ड बांड खरीदता है तो उसे 500 रुपये की बचत होगी। इस सीरीज में छूट के बाद गोल्ड बांड का इश्यू प्राइस प्रति ग्राम गोल्ड के लिए 4,210 रुपये हो जाएगा।

सॉवरिन गोल्ड बांड के 5 बड़े फायदे
-किसी तरह का लोन लेने के दौरान गोल्ड बांड को कोलैक्ट्रल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

-गोल्ड बांड में निवेश करने पर टीडीएस नहीं काटा जाएगा।

-गोल्ड बांड में 999 शुद्धता वाला सोना होता है।

-5 साल बाद गोल्ड बांड को जरूरत पड़ने पर कैश कराया जा सकता है।

-गोल्ड बांड में निवेश पर जीएसटी नहीं देना होता है, जबकि बाजार से गोल्ड की खरीद पर 3 फीसदी जीएसटी कटता है।

निवेश पर ब्याज अगल से मिलेगा
सॉविरन गोल्ड बांड में निवेश करने वालों को मोदी सरकार ब्याज भी देती है। यह ब्याज सालाना 2.5 फीसदी होता है। यह ब्याज साल में दो बार में दिया जाता है। वहीं जहां तक टैक्स की बात है तो सॉवरिन गोल्ड बांड के मैच्योर होने पर मिलने वाला पैसे को कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलती है। यह गोल्ड बांड 8 साल के होते हैं। लेकिन बीच में पैसा निकालने की छूट होती है।

कब हुई थी गोल्ड बांड की शुरुआत
मोदी सरकार ने सन 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना की शुरुआत की थी। इस स्कीम के तहत साल में कई बार गोल्ड में निवेश का मौका दिया जाता है। लेकिन गोल्ड का रेट हर बार बाजार के हिसाब से तय किया जाता है। यह कीमत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से तय की जाती है। गोल्ड बांड में कोई भी भारतीय व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 500 ग्राम तक के गोल्‍ड बॉन्ड खरीद सकता है। यह गोल्ड बॉन्ड में न्यूनतम निवेश 1 ग्राम का होता है।

सॉवरेन गोल्ड बांड से पैसा निकलने का नियम
सॉवरेटन गोल्ड बॉन्ड को बाजार में सोने की मौजूदा कीमतों पर कैश कराया जा सकता है। इन बॉन्ड को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट कराया जाता है। वहां पर इनकी ऑनलाइन ट्रेडिंग होती है। इसलिए जब भी चाहें पैसा निकाला जा सकता है।

क्या सॉवरेन गोल्ड बांड पर चुकाना पड़ेगा टैक्स
मैच्योरिटी तक होल्ड करने पर एसजीबी पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है। हालांकि, मैच्योरिटी से पहले स्टॉक एक्सचेंज के जरिए बेचने पर यह छूट लागू नहीं होती है। अगर निवेश के 3 साल के भीतर गोल्ड बॉन्ड को बेचा दिया जाता है, तो इसे शॉर्ट टर्म गेंस माना जाता है। इस तरह के गेन को निवेशक की आमदनी के साथ जोड़ा दिया जाता है। बाद में इस आमदनी पर टैक्स लगता है।

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