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डीएवीपी विज्ञापन रैट में 50% का इजाफा और प्रिन्ट मिडिया बजट में 100 फिसदी की बढोतरी करे सरकार-INS

नई दिल्ली 16 अप्रैल 2020 । देश इस वकत कोरोना महामारी से लड रहा है. 21 दिन का लोकडाउन ओर 19 दिन बढा दिया गया है. 3 मई तक पूरा देश फिर एकबार लोकडाउन के तहत रहेंगा. हो सकता है कि 20 अपैल से कूछ छूटछाट मिले. सरकारों के साथ समभी मिडिया भी कोरोना से लड रहा है. प्रिन्ट मिडिया हो या टीवी मिडिया सभी अपनी जान जोखिम में डाल कर कोरोना संबंधित समाचार फिल्ड से लाकर घर घर तक पहुंचा कर अपना कर्तव्य निभा रहे है. देशश के अन्य सैक्टरो की तरह मिडिया सैकटर को भी कोरोना की असर पडी है. देश की जानीमानी न्यूज एजन्सी जीएनएस ने 30 मार्च को एक विशेष रिपोर्ट प्रकाषित कर तमाम मिडिया संगठनो से अनुरोध किया था कि वे अखबारो को बचाने के लिये सरकार से विशेष सहायता या पैकेज की मांग करे. अखबारो की सदैव चिंता करनेवाली जीएनएस की इस मुहिम ने मानो रंग लाया हो इस तरह आइएनएस(INS) संगठनने सरकार से पत्र लिख कर भारत के सभी छोटे बडे अखबारो को कोरोना की वजह से जो काफी नुकशान हो रहा है उससे उभारने के लिये सरकार के सन्मुख कुछ मांगे रखी है. जो अखबारो को बचाने के लिये बेहद ही जरूरी है. जीएनएस ने उठाया ये मुद्दा और अखबारो की मांगो को सरकार तक पहुंचाने के लिये जीएनएस आइएनएस-इन्डियन न्यूजपेपर्स सोसायटी-का शुक्रगूजार है.
आइनएस ने केन्द्र सरकार के सूचना एवम प्रसारण विभाग को लिखे एक पत्र में कोरोना की वजह से अखबारो की विज्ञापन आय कितनी कम हो गई है उसकी चिंता जताते हुये सरकार से अनुरोध किया है कि, न्यूज प्रिन्ट पर ली जानेवाली 5 प्रतिशशत कस्टम ड्युटी दूर करना, न्यूजपेपर्स एस्टाब्लिशमेन्ट को दो साल तक टैक्स होलिडे की रियायत देना तथा वर्तमान डीएवीपी रैट में तुरन्त ही 50 प्रतिशत की बढोतरी करना तथा प्रिन्ट मिडिया के बजट में 100 पिसदी की बढोतरी करने के साथ डीएवीपी में जिन अखबारो के विज्ञापन के बिल पेन्डींग है वह तुरन्त भूगतान के लिये रीलीझ करने की भा मांग की है.
जीएनएस को खुशी है कि जो जो मांगे प्रिन्ट मिडिया तथा अन्य को बचाने के लिये जीएनएस ने सुझाव दिये थे वे सभी का आइएनएस ने समाविष्ट कर सरकार तक पहुंचाया है तब अब सरकार अपना फर्ज निभाते हुये उस पर विचार करे और डीएवीपी विज्ञापन के रैट में तुरन्त ही 50 प्रतिशत का इजाफा करे ताकि अखबारो को इस मुशीबत में टिकने का आधार मिले.
जीएनएस ने जो रिपोर्ट 30 मार्च को प्रकाषित की थी वह इस प्रकार थी…..

जन जन तक खबर पहुंचानेवाले छोटे छोटे अखबार ही नहीं रहेगें तो खबरो की पूरी सप्लाय चेईन ही टूट सकती है…
कोरोना वोरियर्स डाक्टर-नर्स की तरह मिडियाकर्मीयों को भी 50 लाख का बीमा सुरक्षा कवच मिले…
जब प्रिन्ट मिडिया ही नहीं बचेगा तो कौन सा मिडिया बचेगा….?!
मिडियाकर्मी भी अपनी जान जोखिम में डाल कर कोरोना को हराने और लडाई जीतने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे है, सेल्यूट है ऐसे योध्धाओं को….
उद्योगो की तरह मिडिया के लिये भी आर्थिक पैकेज घोषित हौ अखबारो को बचाने के लिये…
अखबारो की ओर से प्रेस काउन्सिल इसकी अगुवाई करे, सरकार को पैकेज का प्रस्ताव दे..
डीएवीपी नई विज्ञापन पोलिसी बनाये. या वर्तमान पोलिसी में ही बदलाव कर राहत प्रदान करे…
हर अखबार जन जन तक खबर पहुंचा सके इतना आर्थिक बूस्टर मिले….

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