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आ गया हमसफर एक्सप्रेस का दूसरा रैक, 13 सितंबर से चलेगी डेली

नई दिल्ली 12 जुलाई 2019 । इलाहाबाद जंक्शन से आनंद विहार जाने वाली हमसफर एक्सप्रेस का दूसरा रेक भी यहां आ गया है। इसे सूबेदारगंज रलवे स्टेशन पर खड़ा किया गया है। नई दिल्ली दुरंतो एक्सप्रेस बंद होने के बाद हमसफर एक्सप्रेस का संचालन हर रोज होता है। इसी वजह से रेलवे बोर्ड ने उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन को हमसफर एक्सप्रेस का नया रेक भेज दिया है।
दरअसल नई दिल्ली दुरंतो एक्सप्रेस का संचालन 12 सितंबर तक ही होना है। अभी यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलती है। इसी तरह हमसफर एक्सप्रेस भी इलाहाबाद जंक्शन से आनंद विहार टर्मिनल के बीच सप्ताह में तीन दिन चलती है। अब 13 सितंबर से हमसफर एक्सप्रेस नियमित रूप से चलेगी। खास बात ये कि अभी तक शुक्रवार के दिन हमसफर और दुरंतो दोनों ही नहीं चलती थी। जबकि 13 सितंबर से प्रयागराज के अलावा जंक्शन से चलने वाली हमसफर एक्सप्रेस दूसरी ऐसी ट्रेन होगी जो नियमित रूप से दिल्ली जाएगी। सप्ताह में सोमवार, बुधवार एवं शनिवार को ये ट्रेन आनंद विहार तक एवं रविवार, मंगलवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को हमसफर एक्सप्रेस नई दिल्ली तक जाएगी। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के सीपीआरओ अजीत कुमार सिंह का कहना है कि हमसफर का नया रेक आ गया है। इसमें कुल 21 कोच है। उसमें 18 कोच थर्ड एसी एवं तीन कोच पावर कार के हैं।
फ्लेक्सी फेयर हटाने के लिए बोर्ड को लिखा गया है पत्र
दुरंतो एक्सप्रेस बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी स्लीपर कोच में सफर करने वाले यात्रियों को होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि दुरंतो एक्सप्रेस में जहां एक ओर स्लीपर, थर्ड एसी, एसी टू एवं एसी फर्स्ट के कोच हैं तो वहीं हमसफर एक्सप्रेस में सभी कोच थर्ड एसी श्रेणी के ही हैं। दुरंतो में स्लीपर श्रेणी की 720 बर्थ है। वहीं दूसरी ओर हमसफर एक्सप्रेस की बात करें तो उसमें थर्ड एसी श्रेणी की 1296 बर्थ है। फ्लेक्सी फेयर होने की वजह से हमसफर का न्यूनतम किराया 1115 एवं अधिकतम 1625 रुपये है। ऐसे में स्लीपर के जो यात्री दुरंतो में अब तक सफर के दौरान न्यूनतम 415 एवं अधिकतम 605 रुपये देते थे, उन्हें मजबूरी में हमसफर एक्सप्रेस का ही सहारा लेना पड़ेगा। यूं तो प्रयागराज एक्सप्रेस में भी स्लीपर का विकल्प है लेकिन, उसमें अमूमन लंबी प्रतीक्षा ही रहती है। दुरंतो एक्सप्रेस बंद होने के बाद प्रयागराज एक्सप्रेस में प्रतीक्षा सूची का ग्राफ बढ़ना तय है। इसी वजह से एनसीआर प्रशासन रेलवे बोर्ड को हमसफर एक्सप्रेस से फ्लेक्सी फेयर हटाने के लिए पत्र भेजा है। फ्लेक्सी फेयर हटने के बाद उसका एक निश्चित किराया भी हो जाएगा।

पश्चिम रेलवे के कर्मचारी आज से केंद्र सरकार की निति के खिलाफ हड़ताल पर चले गए है
रेलवे के निजी करने को लेकर कर्मचारियों की नाराजगी है जो देश भर के रेलवे स्टेशन पर कर्मचारियों की हड़ताल के रूप में देखने को मिल रही है रेलवे के कर्मचारी 10 से 12 जुलाई तक हड़ताल पर रहेंगे।

केंद्र की मोदी सरकार के द्वारा रेलवे के निजी करण किये जाने के मामले को लेकर रेल विभाग के कर्मचारियों ने देश भर में एक साथ हड़ताल कर दी है , केंद्र सरकार अब रेलवे को भी निजी हाथो में सोपने की तेयारी कर रही है जिसको लेकर अभी से कर्मचारियों ने विरोध करना शुरू कर दिया है आज से रेलवे विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए है और मोदी सरकार से रेलवे को निजी हाथ में ना सोपने की मांग कर रहे है ,उज्जैन में भी कर्मचारियों की हड़ताल और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।

रेल मंत्री ने खड़े किए हाथ, कहा- अब ना नई ट्रेन ना ही नया स्टॉपेज
निकट भविष्य में ना तो ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी और ना ही ट्रेनों का स्टॉपेज बढ़ाने की मांग की स्वीकार की जाएगी। लोकसभा में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने खराब बुनियादी ढांचा का हवाला देते हुए कहा कि फिलहाल रेलवे ऐसी मांगों को पूरा करने में बिल्कुल असमर्थ है। गोयल ने बृहस्पतिवार से रेलवे पर होने वाली चर्चा में भी सांसदों से इस तरह की मांगें न करने की अपील की।
प्रश्नकाल के दौरान गोरखपुर के सांसद रविकिशन के सवाल के जवाब में गोयल ने कहा कि आजादी के बाद 65 वर्षों में रेलवे के बुनियादी ढांचे में मजबूती पर ध्यान नहीं दिया गया। इस दौरान बुनियादी ढांचे में महज 30 फीसदी ही बढ़ोत्तरी हुई। हालत यह है कि वर्तमान पटरी पर इससे अधिक ट्रेन चलाना संभव ही नहीं है। जितनी ट्रेनें चलाई जा रही है, उसी को चलाए रखना बड़ी चुनौती है।
रेल मंत्री ने कहा कि हमें पता है कि देश में नई ट्रेनों की जरूरत है, मगर हम चाह कर भी इस तरह की मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। इस दौरान गोयल ने कहा कि ट्रेनों का स्टॉपेज बढ़ाने पर भी लेटलतीफी सहित कई तरह की समस्या खड़ी होती है। ऐसे में रेलवे नई ट्रेनें और स्टॉपेज बढ़ाने जैसी मांगों को पूरी करने की स्थिति में नहीं है। गोयल ने सांसदों से इस तरह की मांग न करने की अपील करते हुए कहा कि सदन में होने वाली चर्चा में भी सभी बुनियादी ढांचे में सुधार पर ही अपना सुझाव दें।

निवेश से ही बदलेगी तस्वीर
रेल मंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव के बिना रेलवे की स्थिति में बदलाव मुश्किल है। अब 12 सालों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इस निवेश से बुनियादी ढांचे में मजबूती ला कर रेलवे की कार्यप्रणाली में आमूल चूल बदलाव लाया जाएगा।

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