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राहुल का मंत्र लेकर पंजाब जा रहे हरीश रावत, क्या सुलझा पाएंगे सिद्धू-अमरिंदर का झगड़ा?

नई दिल्ली 31 अगस्त 2021 । पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान के समाधान तलाशने पार्टी प्रभारी हरीश रावत मंगलवार को दो दिवसीय दौरे पर चंडीगढ़ पहुंच रहे हैं. हालांकि, हरीश रावत ने पंजाब रवाना होने से एक दिन पहले सोमवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ डेढ़ घंटे पंजाब के सियासी हालात पर चर्चा की है, जिसके बाद अब वो सीएम कैप्‍टन अम‍रिंदर और पंजाब कांग्रेस अध्‍यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच विवाद को भी खत्‍म करने की कवायद कराएंगे.

पंजाब के कांग्रेस के चार मंत्रियों और करीब दो दर्जन विधायकों द्वारा सीएम कैप्‍टन अमरिंदर का विरोध करने से पैदा हालात पर हरीश रावत चंडीगढ़ जाने से पहले राहुल गांधी के साथ चर्चा की है. राहुल के मैसेज को लेकर रावत चंडीगढ़ के लिए रवाना हो चुके हैं. वो सिद्धू और कैप्टन के मची सियासी संग्राम को भी खत्म करने के लिए वह दोनों नेताओं के साथ बैठक करेंगे.

सिद्धू से बात करेंगे रावत

सिद्धू ने पार्टी के आलाकमान को फैसले लेने की छूट न देने पर ईंट से ईंट बजा देने की चेतावनी दी थी. माना जा रहा है कि इस बयान पर सिद्धू से रावत बात करेंगे, क्योंकि राहुल गांधी से मिलने से पहले उन्होंने मीडिया को दिए बयान में कहा कि सभी का अपना बात करने का तरीका होता है. रावत ने कहा था कि उन्होंने पूरी स्थिति से राहुल गांधी को अवगत करवा दिया है.

पंजाब के पूरे मामले पर हरीश रावत ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को विस्‍तृत रिपोर्ट दी और पंजाब कांग्रेस में स्थिति के बारे में जानकारी दी. माना जा रहा है कि आलाकमान द्वारा रावत को चंडीगढ़ जाकर मामले का समाधान करने का निर्देश मिला है. रावत ने कहा कि सिद्धू और कैप्टन से भी मुलाकात कर उनसे बात करेंगे.

बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन के बीच चल रहे सियासी घमासान के बीच पिछले दिनों पंजाब के चार कैबिनेट मंत्रियों तृप्‍त राजिंदर बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया और चरणजीत सिंह चन्‍नी ने करीब दो दर्जन विधायकों के साथ बैठक कर मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावत कर दी थी. उन्‍होंने कैप्‍टन अमरिंदर में विश्‍वास न‍हीं होने की बात करते हुए सीएम को बदलने की मांग तक कर दी थी.

इन मंत्रियों ने हरीश रावत से मिलने देहरादून गए थे और इसके बाद तीन बागी मंत्री व कुछ विधायक राहुल गांधी व कांग्रेस की कार्यवाहक राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष सोनिया गांधी से मिलने दिल्‍ली गए थे, लेकिन उनको मिलने का समय नहीं दिया गया और वे निराश होकर चंडीगढ़ वापस आ गए. हालांकि, उसी के बाद रावत ने साफ कर दिया था कि 2022 में पंजाब के मुख्यमंत्री का चेहरा कैप्टन ही होंगे.

पंजाब प्रभारी हरीश रावत के रुख से साफ है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर विश्वास न होने का दावा कर शुरू की गई बगावत को कांग्रेस हाईकमान ने मान्यता नहीं दी है. सिद्धू व उनके गुट के नंबर इस घटनाक्रम से कम ही हुए हैं, क्योंकि हाईकमान ने बागी मंत्रियों व विधायकों से मुलाकात करना भी सही नहीं समझा. यह सिद्धू के लिए भी झटका है, क्योंकि मुख्यमंत्री का विरोध ही पार्टी में सिद्धू ताकत बन रही थी.

कांग्रेस का एक वर्ग सिद्धू को न सिर्फ कैप्टन के विकल्प के रूप में देख रहा था, बल्कि उन्हें भरोसा था कि हाईकमान सिद्धू के साथ है. हालांकि, हाईकमान ने लगातार दो बार झटका देकर सिद्धू कैंप को यह संदेश दे दिया है कि अमर्यादित आचरण को वह बढ़ावा नहीं देने वाला. हरीश रावत की सख्त प्रतिक्रिया के बाद कैप्टन कैंप अपनी स्थिति मजबूत मान रहा है.

कैप्टन और सिद्धू के गुट अब रावत के पंजाब आने का इंतजार कर रहे हैं. रावत मंगलवार को पंजाब पहुंचेंगे और कैप्टन गुट और सिद्धू खेमे से मिलेंगे. कैप्टन गुट को लगता है कि अगर वे दिल्ली के बजाय पंजाब में आकर कड़ा रुख अपनाते हैं, तो पार्टी में नीचे तक संदेश जाएगा जबकि सिद्धू खेमे को इस बात का इंतजार है कि कांग्रेस हाईकमान ने क्या संदेश दिया और अब क्या फैसला होता है.

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