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‘हिजाब आवश्यक धार्मिक परंपरा नहीं:’ हाईकोर्ट में बोली कर्नाटक सरकार, ‘इसे शैक्षणिक संस्थानों से बाहर रखा जाना चाहिए

नयी दिल्ली 21 फरवरी 2022 ।  कर्नाटक सरकार ने सोमवार को उच्च न्यायालय से कहा कि हिजाब एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है और इसे शैक्षणिक संस्थानों से बाहर रखा जाना चाहिए। इस मामले पर पिछले कई दिनों से सुनवाई चल रही है और सुनवाई कल दोपहर 2.30 बजे फिर से शुरू होगी। हिजाब मामले की सुनवाई कर रहे कर्नाटक उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ से राज्य के महाधिवक्ता प्रभुलिंग नावडगी ने कहा, ‘‘हमारा यह रुख है कि हिजाब एक आवश्यक धार्मिक परंपरा नहीं है। डॉ. भीम राव आंबेडकर ने संविधान सभा में कहा था कि ‘हमे अपने धार्मिक निर्देशों को शैक्षणिक संस्थानों के बाहर रख देना चाहिए।’’

ऑनलाइन वेबसाइट लाइव लॉ के अनुसार, बसवराज बोम्मई सरकार की ओर से पेश होते हुए महाधिवक्ता प्रभुलिंग नावडगी ने अदालत में तर्क दिया, “यह निर्धारित करने के लिए तीन टेस्ट हैं कि क्या कोई प्रथा आवश्यक धार्मिक प्रथा है। क्या यह मूल विश्वास का हिस्सा है? क्या यह प्रथा उस धर्म के लिए मौलिक है? यदि उस प्रथा का पालन नहीं किया जाता है, तो क्या धर्म का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा? अदालत ने पूछा सीधा सवाल, इजाजत है या नहीं?

मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया, ‘‘आपने दलील दी है कि सरकार का आदेश नुकसान नहीं पहुंचाएगा और राज्य सरकार ने हिजाब को प्रतिबंधित नहीं किया है तथा ना ही इस पर कोई पाबंदी लगाई है। सरकारी आदेश में कहा गया है कि छात्राओं को निर्धारित पोशाक पहनना चाहिए। आपका क्या रुख है– हिजाब को शैक्षणिक संस्थानों में अनुमति दी जा सकती है, या नहीं? ’’नावडगी ने जवाब में कहा कि यदि संस्थानों को इसकी अनुमति दी जाती है तब यह मुद्दा उठने पर सरकार संभवत: कोई निर्णय करेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी आदेश का सक्रिय हिस्सा इस संबंध में निर्णय लेने के लिए संस्थानों पर छोड़ देता है। उन्होंने कहा, “सरकारी आदेश संस्थानों को यूनिफॉर्म तय करने की पूरी स्वायत्तता देता है। कर्नाटक शिक्षा अधिनियम की प्रस्तावना एक धर्मनिरपेक्ष वातावरण को बढ़ावा देना है।”

धार्मिक परंपरा को लेकर क्या कहता है संविधान? पूर्ण पीठ में मुख्य न्यायाधीश रितुराज अवस्थी, न्यायमूर्ति जे एम खाजी और न्यायामूर्ति कृष्ण एम दीक्षित शामिल हैं। महान्यायवादी के मुताबिक, सिर्फ आवश्यक धार्मिक परंपरा को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षण मिलता है, जो नागरिकों को अपनी पसंद के धर्म का आचरण करने की गारंटी देता है। अदालत की कार्यवाही शुरू होने पर मुख्य न्यायाधीश अवस्थी ने कहा कि हिजाब के बारे में कुछ स्पष्टीकरण की जरूरत है।

हिजाब को लेकर क्या है ताजा विवाद?

उल्लेखनीय है कि हाल में राज्य के उडुपी में एक कॉलेज की छह छात्राएं कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में शामिल हुई थीं। इसका आयोजन, कक्षा में हिजाब पहन कर प्रवेश की अनुमति देने से कॉलेज प्रशासन के मना करने के विरोध में किया गया था।

इस घटना से चार दिन पहले, उन्होंने प्राचार्य से हिजाब पहन कर कक्षा में आने देने की अनुमति मांगी थी। लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई। कॉलेज के प्राचार्य रुद्रे गौड़ा ने कहा था कि अब तक छात्राएं हिजाब पहन कर परिसर में पहुंचती थीं लेकिन कक्षाओं में जाने से पहले उसे हटा देती थीं।

प्राचार्य ने कहा था ‘‘संस्थान की, हिजाब पहनने के बारे में कोई व्यवस्था नहीं है क्योंकि पिछले 35 साल से कक्षा में कोई छात्रा हिजाब नहीं पहनती। यह मांग करने वाली छात्राओं को कुछ बाहरी तत्वों का समर्थन है।’’

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