मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> सेबों को ओलों से बचाने पर 50 करोड़ रुपए खर्च करेगी हिमाचल सरकार

सेबों को ओलों से बचाने पर 50 करोड़ रुपए खर्च करेगी हिमाचल सरकार

नई दिल्ली 9 मार्च 2020 । फलों की टोकरी कहे जाने वाले पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के सेब और अन्य फलों को ओलों से बचाने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने एंटी हेलनेट की खरीद पर 50 फीसदी की सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। 6 मार्च को हिमाचल सरकार के बजट में कृषि उत्पाद संरक्षण (एंटी हेलनेट) योजना की शुरूआत करने की घोषणा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने की है।

इस योजना के तहत फलों को ओलों से बचाने के लिए एंटी हेलनेट की खरीद के साथ उसे लगाने के लिए बांस या स्टील के स्थाई स्ट्रक्चर को बनाने के लिए किसान-बागवानों को 50 फीसदी का अनुदान दिया जाएगा। इस योजना के कार्यान्वन के लिए मुख्यमंत्री ने इसके लिए 50 करोड़ रूपये के बजट का प्रावधान किया है।

गौरतलब है कि कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यतः पांच जिलों में सेब बागवानी बड़ी तेजी से बढ़ रही है और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में सेब बागवानी का चार हजार करोड़ रुपए का कारोबार है। बागवानी विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल हिमाचल में सेब की 4 करोड़ पेटियों का उत्पादन होने का अनुमान लगाया जाता है, जबकि ओलों के कारण हर साल सेब किसानों को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। वर्ष 2019 में 2.75 करोड़ सेब की पेटियों का उप्तादन हुआ है, जबकि वर्ष 2017 में ये 1.73 करोड और 2018 में 1.42 करोड़ सेब की पेटियों का उत्पादन हुआ है।

इसके अलावा बजट में सेब की स्टोरेज क्षमता को बढ़ाने के लिए बागवानी विकास परियोजना के तहत तीन कोल्ड स्टोर गुम्मा, जरोल टिक्कर और रोहडू को 2000 टने से बढ़ाकर 5700 टन करने का दावा गया है। सेब के साथ हिमाचल के बागवानों में अब चैरी की भी अहम भूमिका है। चैरी के लिए हाईड्रोकूलिंग की व्यवस्था करने के लिए पहली बार जरोल में आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। यदि कोई बागवान 1 हजार सेब की पेटी का उत्पादन करता है तो उसे अपने बगीचे को ओलों से बचाने के लिए लगभग 2 लाख रूपये के एंटी हेलनेट लगाने का खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में सरकार की ओर से शुरू की गई इस योजना से किसान-बागवानो को बहुत लाभ पहुंचेगा।

यंग एडं यूनाइटेड ग्रोवर ऐसोसिएशन हिमाचल प्रदेश के सचिव और प्रगतिशिल किसान प्रशांत सेहटा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में ओलावृष्टि से सबसे अधिक नुकसान सेब को होता है। ऐसे में सरकार की ओर से कृषि उत्पाद सरंक्षण योजना बहुत लाभदायक सिद्ध होगी। लेकिन इस योजना के तहत बजट का बहुत ही कम प्रावधान किया गया है। सेब बागवानों की सुविधा के लिए इसमें और अधिक वृद्धी करने की जरूरत है।

बागवानी विकास अधिकारी डाॅ किशोर शर्मा का कहना है कि सेब के पौधों पर ओलों का बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, सेब के पौधों को फ्लावरिंग स्टेज से लेकर हार्वेस्टिंग स्टेज तक ओलों से बचाने के लिए केवल एंटी हेलनेट से ही बचाया जा सकता है। ऐसे में सरकार की ओर से शुरू की गई इस योजना से फल उत्पादकों को बहुत लाभ मिलेगा।

इसके अलावा बजट में हिमाचल प्रदेश के हरित क्षेत्र को वर्ष 2030 तक 27.72 फीसदी बढ़ाकर 30 फीसदी तक करने के लिए पौधरोपण कार्यक्रम चलाने की बात कही गई है। वहीं, पिछले साल के मुकाबले कृषि में सिंचाई की व्यवस्था के लिए दिए जाने वाले बजट में 136 करोड़ रूपये की कटौती की गई है।

दूध-दही के लिए मशहूर प्रदेश की महिलाएं क्यों हैं अस्वस्थ

देशा में देश हरियाणा, जित दूध-दही का खाणा।’ यह देसी कहावत भले ही यहां के पुरुषों पर फिट बैठती हो, पर आंकड़े और सर्वे रिपोर्ट बताते हैं कि स्वास्थ्य के मामले में हरियाणा की लड़कियों और महिलाओं की स्तिथि किसी दूसरे पिछड़े प्रदेश से अच्छी नहीं है। इस प्रदेश की 40 प्रतिशत लड़कियों का वजन उम्र और कद, काठी के लिहाज से कम है और करीब 60 प्रतिशत महिलाएं अनीमिया यानी खून की कमी का शिकार हैं।

विश्व बैंक की एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के 66 फसादी बच्चे कुपोषित हैं, क्यों कि उनकी माताओं का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता। जब कि नीति आयोग के उपाध्यक्ष देश के 38 प्रतिशत बच्चों के कुपोषण और 50 प्रतिशत महिलाओं के एनीमिया से पीड़ित होने की बात कहते हैं।

प्लान इंडिया नामक एक संस्थान ने हाल में लैंगिक संवेदनशील के आधार पर एक सर्वे कर डेटा इकट्ठा किया था। इसके मुताबिक, हरियाणा की 40 प्रतिशत लड़कियों का वज़न कम पाया गया और 60 फीसदी महिलाएं खून की कमी से ग्रस्त मिलीं। खून की कमी के कारण महिलाओं का वजन कम हो जाता है। शरीर की व्रद्धि रुक जाती है। काम करते समय जल्द थक जाती हैं। मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं। आंखें धंस जाती हैं और नींद और पाचन क्रिया सही नहीं रहती।

भिवानी की डॉक्टर सुमन दहिया कहती हैं कि उनके यहां इलाज कराने आने वाली 30 प्रतिशत महिलाएं कुपोषित और 60 प्रतिशत खून की कमी का शिकार होती हैं। भिवानी के स्वास्थ्य विभाग ने जिले की 60 फीसदी महिलाओं को कुपोषित बताया है। प्लान इंडिया के सर्वे के अनुसार, हरियाणा देश में महिलाओं व लड़कियों की सुरक्षा के मामले 21वें, शिक्षा में 12 वें और स्वास्थ्य के मामले में 26 वें स्थान पर है। इस प्रदेश की 18.05 प्रतिशत लड़कियों का विवाह कानूनी उम्र से पहले हो जाता है।

केंद्र सरकार ने कुपोषित और रक्त की कमी से पीड़ित गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं का पोषण स्तर सुधारने के लिए 2017 में प्रधानमंत्री मातृ वेदना योजना शुरू किया गया था। योजना पर खर्च होने वाली धनराशि का 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकारें वहन करती हैं। 2017 से 2019 के बीच हरियाणा में योजना के तहत 3 लाख 55 हज़ार 739 लाभार्थियों का पंजीकरण कराया गया, जिन्हें 152. 72 करोड़ रुपये वितरित किए गए। लाभार्थी महिलाओं को 5000 हज़ार रुपये के तीन किस्तों में भुगतान किया गया।

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का कहना है कि खान, पान पर विशेष ध्यान नहीं देने, प्रदूषण और बदलती जीवन शैली के कारण महिलाएं खून की कमी और लड़कियां कम वजन का शिकार हो रही हैं। उनमें जागरूकता पैदा करने के लिए विश्व महिला दिवस पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर गुरुग्राम की महिला कॉलेज से प्रदेश स्तरीय पोषण अभियान शुरू करेंगे। अभियान के तहत प्रदेश की महिलाओं और बच्चियों को खान, पान को लेकर सजग करने के अलावा उन्हें ऐसी सरकारी योजनाओं के बारे में भी बताया जाएगा जिससे वो अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख सकेंगी।

फिर से मौसम की मार से आहत किसान, ओले और भारी बारिश से हुआ नुकसान

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद के किसान रिंकू कटियार ने 96 बीघा आलू की खेती की थी। अब तक 54 बीघा आलू की खुदाई हो गई थी, लेकिन अभी भी 30 बीघा आलू खेत में पड़ा है। 5-6 मार्च को भारी बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से यह आलू खराब हो जाएगा। सुल्तानपुर जनपद के कूरेभार ब्लॉक के लोकेपुर गांव के किसान अंजनी वर्मा के खेतों में खड़ी गेहूं, सरसों और मटर की फसल को नुकसान हुआ है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता राकेश टिकैत का अनुमान है कि दो दिन की बारिश और ओलावृष्टि से लगभग 40 फीसदी खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है।

वहीं, बारिश और ओले की वजह से हरियाणा के 18 जिलों में सरसों और गेहूं के फसल को नुकसान हुआ है। गिरदावरी के आदेश के बाद जुटाई प्रथमिक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 517 गांवों में 50318 हेक्‍टेयर (करीब 1.24 लाख एकड़) में लगी फसल 50 से 75 फीसदी तक प्रभावित हुई है।

मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 मार्च से 5 मार्च के बीच देश के कुल 683 मौसम क्षेत्रों में से 222 में से भारी बारिश हुई। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, सामान्य से 60 फीसदी अधिक बारिश होने को भारी बारिश की श्रेणी में रखा जाता है। इसके विपरीत 265 जिलों में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई, जिससे पता चलता है कि देश के बड़े हिस्से में या तो बहुत ज्यादा बारिश हुई या फिर बारिश नहीं हुई।

यह एक ऐसा पैटर्न है जो पिछले कुछ वर्षों से लगातार बना हुआ है। जहां बारिश हो रही है तो सामान्य से बहुत अधिक बारिश हो रही है और कहीं बिल्कुल भी बारिश नहीं हो रही है। मानसून के मौसम में जब देश में अधिकांश बारिश होती है तो इस पैटर्न की वजह से एक ही क्षेत्र में एक साथ बाढ़ और सूखा पड़ता है जिससे लोगों और उनकी आजीविका के लिए समस्या पैदा होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुख्य रूप से ग्लोबल वार्मिंग प्रेरित जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है, जो मौसम संबंधी एजेंसियों के मौसम की भविष्यवाणी करना मुश्किल बना रहा है।

पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और कर्नाटक में बेमौसमी भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई। यूपी में 75 में से 37 जिलों में भारी बारिश हुई, उनमें से 29 में बारिश नहीं हुई। मध्यप्रदेश में कुल 51 जिलों में से 23 में बहुत ज्यादा बारिश हुई, जबकि 20 में बिल्कुल भी नहीं हुई। कर्नाटक में 20 जिलों में बहुत अधिक बारिश हुई, लेकिन 6 जिलों में नहीं हुई। दिल्ली में 6 जिलों में बहुत अधिक बारिश हुई, लेकिन 3 जिलों में बिल्कुल नहीं हुई।

हरियाणा के मेवात, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, रोहतक, सोनीपत, भिवानी,दादरी, झज्‍जर जिले में अधिक प्रभाव पड़ा है। रेवाड़ी जिले के 67 गांवों में 23250 एकड़, रोहतक में करीब 100 गांवों में 11500 एकड़, मेवात के 19 गांवों में 6800 एकड़, महेंद्रगढ़ जिले के 87 गांवों में 19206, सोनीपत के 45 गांवों में 4870 एकड़ में लगी सरसो और गेहूं की फसल 75 फीसदी तक बर्बाद हो गई है। इसके अलावा इन जिलों में करीब एक लाख हेक्‍टेयर में लगी फसल को 25 से 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है।

राजस्‍व एवं आपदा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विधानसभा सत्र चलने की वजह से गिरदावरी के आदेश के बाद प्राथमिक रिपोर्ट ली गई थी। अभी फाइनल रिपोर्ट आने में एक सप्‍ताह का समय और लगेगा। इसमें स्थिति और सामने आएगी। बता दें कि वर्ष 2020 में जनवरी से अब तक 45 एमएम बारिश हो चुकी है। जनवरी-फरवरी में 29.8 एमएम बारिश हुई थी तो मार्च के शुरुआती दिनों में ओलावृष्टि के साथ 14.8 एमएम बारिश हुई है।

उत्तर प्रदेश के बरेली में कृषि विभाग, तहसील स्तर के कर्मचारी और बीमा कंपनी के संयुक्त सर्वे में रबी फसलों को 36 फीसद नुकसान का आकलन किया गया है। शाहजहांपुर जिले में सिर्फ आठ फीसद फसलों को नुकसान हुआ। जबकि पीलीभीत और बदायूं से फसल बर्बाद की रिपोर्ट अब तक मंडल में नहीं आ सकी है। फसल के जमीन पर गिरने की वजह से गेहूं के दाने काले पड़ चुके हैं। इससे उत्पादन कम होने की आशंका है। खराब गेहूं की बिक्री भी कम दाम पर होगी। जो गेहूं 1735 से 1785 रुपए प्रति कुंतल बिकना चाहिए वो 1000 से 1200 रुपए तक रह जाएगा। करीब दस साल पहले भी फाल्गुन में मौसम ने ऐसे ही करवट बदली थी। 15 दिनों में तीन बार भारी बारिश हो चुकी है।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

राहुल ने जारी किया श्वेतपत्र, बोले- तीसरी लहर की तैयारी करे सरकार

नई दिल्ली 22 जून 2021 । कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस …