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कश्मीर और लद्दाख में कैसे पांव पसार रही है बीजेपी

नई दिल्ली 21 नवम्बर 2019 । अनुच्छेद 370 और धारा 35 ए को निरस्त किए जाने के 100 से ज़्यादा दिनों के बाद भी कश्मीर घाटी में पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का मुख्यालय बंद पड़ा हुआ है.

श्रीनगर के लाल चौक इलाके में चिनार के पेड़ों के नीच पार्टी मुख्यालय का दरवाज़ा नुकीले तारों के बीच बंद है. वहां तैनात पैरामिलिट्री के जवान हमारी मौजूदगी से सक्रिय होते हैं. बंकर में बनी एक छोटी सी खिड़की से आवाज़ आती है, “पत्रकार हो?”

उनकी बंदूक की नली सामने सड़क की ओर तनी हुई है. जब उन्होंने हमारी पहचान सुनिश्चित कर ली तो कहा, “आपको यहां नहीं होना चाहिए. इमारत की तस्वीर मत लो.”

हालांकि थोड़ी देर मनाने के बाद उन्होंने हमें न्यूज़ स्टोरी के लिए कुछ विजुअल बनाने की इजाज़त दे दी.

पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रवक्ता ताहिर सईद बताते हैं, “जब पार्टी के सभी सदस्य कथित तौर पर नजरबंद हों तो कोई कार्यालय कैसे काम कर सकता है.”

मोदी सरकार का बड़ा फैसला- दिल्ली की अवैध कॉलोनियां नियमित होंगी, 40 लाख लोगों को होगा फायदा
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली की अवैध कॉलोनियां को नियमित करने का फैसला लिया है. पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 40 लाख लोगों को मालिकाना हक देने वाले बिल को मंजूरी दी गई है. कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी घोषणा की. कैबिनेट बैठक में इसके अलावा सरकार ने वित्तीय संकट से जूझ रही दूरसंचार कंपनियों को राहत देते हुए उनके लिए स्पेक्ट्रम किस्त का भुगतान दो साल के लिए टालने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दे दी. निर्मला सीतारमण ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि दूरसंचार कंपनियों को 2020-21 और 2021-22 दो साल के लिए स्पेक्ट्रम किस्त भुगतान से छूट दी गई है. सूत्रों ने बताया कि सरकार के इस फैसले से दूरसंचार कंपनियों भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और रिलायंस जियो को 42,000 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी.बता दें कि केंद्र सरकार ने दिवाली से ठीक पहले दिल्ली (Delhi) की अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने का फैसला किया था. दिल्ली में कुल 1797 अनियमित कॉलोनी हैं. बता दें कि कॉलोनियों को नियमित करने के दौरान सर्कल रेट का कुछ प्रतिशत रेग्यूलरेजाइशेन फ़ीस के तौर पर लिया जाएगा. दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले को सियासी तौर पर मास्टर स्ट्रोक कहा जा रहा है. केजरीवाल सरकार ने पहले ही इन कॉलोनियों में विकास कार्य शुरू करा दिया था. अब केंद्र ने कॉलोनियों को नियमित करने का फैसला लिया. बता दें कि 29 अक्टूबर को इस बारे में गजट नोटिफिकेशन भी जारी किया जा चुका है.इससे पहले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने यह दावा किया था कि मोदी सरकार इसके लिए बिल नहीं लाएगी? संजय सिंह ने एक ट्वीट कर कहा था, ‘भाजपा सरकार का झूठ पकड़ा गया धोखेबाजी सामने आ गई. देखिए ये है संसद सत्र में आने वाले बिल की सूची. दिल्ली वाले भाइयो देख लीजिए इसमें अनाधिकृति कॉलोनियों को पक्का करने का कोई बिल नहीं. धोखा नहीं रजिस्ट्री दो.’

महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ कांग्रेस-NCP की सरकार बनाने पर अभी फैसला नहीं, पृथ्वीराज चव्हाण का बयान

महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ मिलकर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सरकार बनाने को लेकर अभी फैसला नहीं हुआ है। बुधवार को कांग्रेस पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं के बीच हुई बैठक के बाद हुई साझा प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि सरकार बनाने को लेकर कोई भी फैसला 1-2 दिन में हो जाएगा। हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि पूरी संभावना है कि हम मिलकर सरकार बनाने जा रहे हैं।

पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं के बीच हुई बैठक में सभी पहलुओं पर सकारात्मक बातचीत हुई, उन्होने कहा कि आगे भी बातचीत जारी रहेगी और पूरा विश्वास है कि हम जल्द ही महाराष्ट्र में एक स्थिर सरकार का गठन करेंगे। प्रेस वार्ता के बाद एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि कांग्रेस और एनसीपी की बैठक में यह तय हुआ है कि दोनो दलों को महाराष्ट्र में एक वैकल्पिक सरकार देने की कोशिश करनी चाहिए और कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना के एक साथ आए बिना यह वैकल्पिक सरकार संभव नहीं होगी। नवाब मलिक ने कहा कि सभी मुद्दों का हल निकालने का प्रयास किया जा रहा है और जल्द से जल्द महाराष्ट्र में एक वैकल्पिक सरकार मुहैया कराई जाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महाराष्ट्र के बड़े नेताओं के साथ अपने आवास पर चर्चा की, जिसके बाद एनसपी प्रमुख शरद पवार के निवास पर दोनों दलों के दिग्गजों की फौज जमा हुई। दोनों दलों की ये बैठक भी किसी अंजाम तक न पहुंच पाई। इस बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, जयराम रमेश, पृथ्वीराज चव्हाण, केसी वेणुगोपाल, बालासाहेब थोराट ने हिस्सा लिया। वहीं राकांपा की ओर से बैठक में सुप्रिया सुले, अजित पवार, जयंत पाटिल, नवाब मलिक शामिल हुए।

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