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कितनी संपत्ति छोड़ गए हैं अटल बिहारी वाजपेयी

नई दिल्ली 17 अगस्त 2018 । पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे. उन्होंने एम्स में गुरुवार को 5 बजकर 5 मिनट पर अंतिम सांस ली. 93 साल के वाजपेयी लंबे वक्त से बीमार थे और 2009 से व्हीलचेयर पर थे. उनके पिता पंडित कृष्णबिहारी वाजपेयी टीचर थे और मां कृष्णा देवी घरेलू महिला थीं.

अटल जी के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा तीन बड़े भाई अवधबिहारी, सदाबिहारी और प्रेमबिहारी वाजपेयी और तीन बहनें थीं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिक्षा मंदिर, बाड़ा में हुई. इसके अलावा अटल जी के ग्वालियर में कई रिश्तेदार हैं. इनमें भतीजी कांति मिश्रा और भांजी करुणा शुक्‍ला हैं. वहीं, ग्वालियर में अटल जी के भतीजे दीपक वाजपेयी और भांजे सांसद अनूप मिश्रा हैं.

हालांकि, अटल बिहारी वाजपेयी आजीवन अविवाहित रहे. लेकिन, 1998 में जब वे 7, रेसकोर्स रोड में रहने पहुंचे तो उनकी दोस्त राजकुमारी कौल की बेटी और उनकी दत्तक पुत्री नमिता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य का परिवार भी साथ रहने आया. राजकुमारी कौल के बारे में बताया जाता है कि जब अटल प्रधानमंत्री थे तब कौल वाजपेयी के घर की सदस्य थीं. उनके निधन के बाद वाजपेयी के आवास से जो प्रेस रिलीज जारी की गई थी, उसमें उन्हें वाजपेयी के घर का सदस्य संबोधित किया गया था.

साल 2004 के लोकसभा चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी की तरफ से जमा किए गए शपथ पत्र के अनुसार अटल के नाम कुल चल संपत्ति 30,99,232.41 रुपये थी. वहीं पूर्व प्रधानमंत्री होने के नाते 20,000 रुपये की मासिक पेंशन और सचिवीय सहायता के साथ 6000 रुपये का कार्यालय खर्च भी मिलता था.

जब अटल ने कहा था, ‘राजीव गांधी की वजह से ही जिंदा हूं, उनका विरोध कैसे करूं’

भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष में शुमार रहे अटल बिहारी वाजपेयी की हालत बेहद नाजुक है. एम्स में पिछले 9 सप्ताह से भर्ती पूर्व पीएम वाजपेयी की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है. पिछले 24 घंटे से वेंटिलेटर हैं और उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया है. अ‍टल बिहारी वाजपेयी भारत राजनीति का ऐसा नाम है जो पूरब से लेकर पश्चिम तक, उत्तर से लेकर दक्षिण तक स्वीकार्य है.

क्या आपको पता है कि जब आर्थिक तंगी से जूझ रहे वाजपेयी किडनी की समस्या से पीड़ित थे, तब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उनका इलाज कराया था. ये इलाज अमेरिका में हुआ था. दरअसल, वाजपेयी कीचड़ उछालने की राजनीति में विश्वास नहीं रखते थे. यही वजह है कि आजादी के बाद लंबे समय तक उनके रिश्ते गांधी परिवार से मधुर रहे. हालांकि वह कांग्रेस की विचारधारा के साथ नहीं थे.

बात 1987 की है. राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे और अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष के नेता थे. वाजपेयी किडनी की समस्‍या से ग्रसित थे. उस वक्‍त इस बीमारी का इलाज अमेरिका में ही हो सकता था. आर्थिक तंगी के कारण वाजपेयी अमेरिका नहीं जा पा रहे थे. उस दौरान भारते के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे. उन्हें कहीं से वाजपेयी की बीमारी के बारे में पता चला. उन्‍होंने वाजपेयी को मिलने का बुलावा भेजा. राजीव ने वाजपेयी को बताया कि आपको संयुक्‍त राष्‍ट्र में न्‍यूयॉर्क जाने वाले भारत के प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया जा रहा है. यह भी कहा कि उम्‍मीद है कि आप वहां पर अपना इलाज भी करा सकेंगे.

इस घटना का जिक्र प्रसिद्ध पत्रकार करण थापर ने हाल में प्रकाशित अपनी किताब ‘द डेविल्‍स एडवोकेट’ में किया है. थापर ने लिखा है कि 1991 में जब राजीव गांधी की हत्‍या हो गई तब अटल बिहारी वाजपेयी ने उनको याद करते हुए इस बात को सार्वजनिक किया था. उन्‍होंने करण थापर से कहा था, ”मैं न्‍यूयॉर्क गया और इस वजह से आज जिंदा हूं.”
उन्होंने आगे कहा, “आज मैं विपक्ष में हूं और लोग मुझसे एक विपक्षी की तरह बोलने की अपेक्षा करते हैं लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता. मैं केवल उसके बारे में बात करना चाहता हूं जो उन्होंने (राजीव ने) मेरे लिए किया है.”

दरअसल, न्‍यूयॉर्क से इलाज कराकर जब वाजपेयी भारत लौटे तो उन्होंने अपने इलाज का किसी से जिक्र नहीं किया. राजीव तो जिक्र करने वाले थे नहीं. दोनों एक दूसरे के खिलाफ विपक्षी की तरह वर्ताव करते रहे. हालांकि वाजपेयी ने एक पोस्टकार्ड के जरिये धन्यवाद ज्ञापित किया था. राजीव गांधी की मौत के बाद इस घटना के बारे में खुद अटल बिहारी वाजपेयी ने करण थापर ये बात बताई. वाजपेयी ने राजीव को अपना छोटा भाई बताया.

ऐसा है अटल का परिवार, जानिए कौन हैं उनकी दत्तक पुत्री

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे. उन्होंने एम्स में 5 बजकर 5 मिनट पर अंतिम सांस ली. 93 साल के वाजपेयी लंबे वक्त से बीमार थे और 2009 से व्हीलचेयर पर थे. वे शादीशुदा नहीं थे. उन्होंने शादी नहीं की. उनकी दत्तक पुत्री नमिता हैं. उनके परिवार के बाकी लोग मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रहते हैं.अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर के शिंदे का बाड़ा मोहल्ले में हुआ था. उनके पिता पंडित कृष्णबिहारी वाजपेयी टीचर थे और मां कृष्णा देवी घरेलू महिला थीं. अटल के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा तीन बड़े भाई अवधबिहारी, सदाबिहारी और प्रेमबिहारी वाजपेयी और तीन बहनें थीं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिक्षा मंदिर, बाड़ा में हुई. इसके अलावा अटल के ग्वालियर में कई रिश्तेदार हैं. इनमें
भतीजी कांति मिश्रा और भांजी करुणा शुक्‍ला हैं. वहीं, ग्वालियर में अटलजी के भतीजे दीपक वाजपेयी और भांजे सांसद अनूप मिश्रा परिवार सहित दिल्ली पहुंचे हैं. बाड़ा से ही उन्होंने आठवीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त की. बाद में ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में उनका दाखिला हुआ. यहां से उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की. कॉलेज जीवन में ही उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया था. फिर ग्वालियर से स्नातक उपाधि प्राप्त करने के बाद वे कानपुर चले गए. यहां उन्होंने डीएवी कॉलेज में प्रवेश लिया. हालांकि, राजनीति में जाने के बाद अटल अविवाहित रहे. हालांकि, 1998 में जब वे 7, रेसकोर्स रोड में रहने पहुंचे तो उनकी दोस्त राजकुमारी कौल की बेटी और उनकी दत्तक पुत्री नम्रता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य का परिवार भी साथ रहने आया.राजकुमारी कौल के बारे में बताया जाता है कि जब अटल प्रधानमंत्री थे तब कौल वाजपेयी के घर की सदस्य थीं. उनके निधन के बाद वाजपेयी के आवास से जो प्रेस रिलीज जारी की गई थी, उसमें उन्हें वाजपेयी के ‘घर का सदस्य’ संबोधित किया गया था.

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