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मेरे पास शिवराज सिंह चौहान हैं

भोपाल 3 अगस्त 2018 । २०१८ विधानसभा चुनाव की तैयारी में भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, बसपा, गोंगपा सहित जब अन्य सभी पार्टियां जब जुट चुकी हैं तो जाहिर है कि सभी दलों के लोग राजनीति ही करेंगे, घास नहीं छीलेगें। संगठन की मजबूती के प्रयास होंगे, कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाएगा, मतदाताओं को लुभाने,खुश करने की तमाम कोशिश होगी। ऐसा लगभग हर चुनाव मे होता है ,अब भी हो रहा है, आईंदा भी होता रहेगा। सरकार बनाने के लिये, सत्ता मे काबिज होने के लिये विकास के दावे होंगे, जाति — धर्म के पांसे फेके जाएगें, मतलब निकालने के लिये घोडों के साथ गधों — खच्चरों को अपना बाप बनाया ,बताया जाएगा। ऐसा अब तक होता रहा है, होता रहा होगा। समय बदला है,लोगों की आवश्यकताएं,मानसिकता बदल रही है। अब न तो गरीबी हटाओ के नारे के नाम पर लोगों को बहलाया जा सकता है,न ही सडक- बिजली – पानी ही मात्र लोगों की मूलभूत आवश्यकता रह गयी है।
विगत कुछ वर्षों मे म प्र में शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने के बाद विकास के साथ आम जनता के जीवन स्तर को ऊपर उठाने की दिशा मे कार्य किया गया। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास, बिजली, खेती सबमे गुणात्मक सुधार हुआ है। आजीविका मिशन, जन अभियान परिषद स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को, लोगों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। अब लोग सरकार से नाराज नही हैं, निरन्तर सत्ता मे भाजपा मे होने के बावजूद स्थायित्व होने के बाद भी नकारात्मक परिवर्तन की चाह जनता मे नही अपितु कांग्रेस में एवं उससे जुडे कुछ असंतुष्ट लोगों मे जरुर है। जो दल समय के अनुरुप स्वयं को नही ढालता वह कांग्रेस, बसपा, सपा, कम्युनिस्ट पार्टी बन जाता है।
बहरहाल १ अगस्त, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जन आशीर्वाद यात्रा के लिये कोतमा आए। मंचीय आयोजन के पश्चात वे ग्राम देवगंवा पहुंचे, जहां उन्होंने लोगों को संबोधित किया। यहाँ से वे केशवाही, शहडोल के लिये रवाना हो गये। देवगंवा जन आशीर्वाद प्रभारी व कोतमा के पूर्व मण्डी अध्यक्ष विनोद सराफ (४२) ने कार्यक्रम समाप्त होने के बाद घबराहट के बाद, लोग कुछ समझ पाते, सहायता कर पाते इससे पहले ही ह्रदयाघात के शिकार हो गये। उनकी दुखद मौत की सूचना क्षेत्र मे जंगल मे आग की तरह फैल गयी। लोग स्तब्ध, शोक संतप्त हो गये। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को रात्रि मे किसी वक्त इसकी जानकारी दी गयी तो उन्होंने तत्काल आधी रात को प्रदेश महामंत्री वी डी शर्मा व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र शुक्ला को विनोद सराफ के घर कोतमा भेज दिया। वे दोनो शोक संतप्त परिवार से रात्रि मे ही मिले,उन्हे ढांढस दिया। 2 अगस्त की सुबह शहडोल के सभी कार्यक्रम निरस्त कर मुख्यमंत्री श्री चौहान, श्रीमती साधना सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा के साथ कोतमा वापस गये। वे स्व सराफ की धर्मपत्नी, बच्चों, उनके परिवार से मिलकर श्रद्धांजलि अर्पित कर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए आश्वस्त किया कि सभी दुखी परिवार के साथ हैं।
एक कार्यकर्ता के आकस्मिक निधन उपरांत मुख्यमंत्री श्री चौहान का सपत्नीक उसके घर जाना उनकी संवेदनशीलता, सरलता व कार्यकर्ताओं के प्रति अगाध स्नेह, कार्यकर्ताओं के प्रति उनकी चिंता को रेखांकित करता है। ईश्वर न करे कि किसी कार्यकर्ता को इसकी जरुरत पडे लेकिन आपदा अचानक बिना बतलाए आती है। ऐसे मे सरकार के मुखिया का, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियो का साथ आ खडा होना हम जैसे आम कार्यकर्ता को बडा संबल देता है। दो अगस्त की घटना मुझ जैसे भाजपा के लाखों कार्यकर्ताओं का मनोबल बढाने के लिये संजीवनी का कार्य करेगा। अनुज विनोद सराफ की दुखद मॊत से हम सभी विचलित हैं, बहुत दुखी हैं, चिन्तित हैं। लेकिन श्री चौहान का इस असीम दुख मे कार्यकर्ता के परिवार के साथ खडा होना हमारे मन मे यह विश्वास जगाता है कि भाजपा से जुड कर,उस पर भरोसा कर प्रदेश की जनता ने कोई गलती नहीं की। मुझ जैसा आम कार्यकर्ता आश्वस्त है कि उसके पास उसका लाडला अभिभावक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान है। यही हमे अन्य दलों से अलग बनाती है। यही जनता का हम पर भरोसा बनाए रखने का बडा कारण भी है।

मुख्‍यमंत्री शिवराज के ट्रंप कार्ड से कांग्रेस खेमे में ख़लबली

मध्य प्रदेश में विधान सभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्ववारा की जा रही बैठकें बता रही हैं कि कांग्रेस में खलबली है. मामला मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद रैली और उससे भी बढ़कर उस बिजली माफ़ी योजना से जुड़ा है, जो चुनावी ट्रंप कार्ड के बतौर शिवराज सिंह खेल चुके हैं.
कांग्रेस हाईकमान तक पहुंची ग्राउंड रिपोर्ट बता रही है कि पिछले एक महीने में चुनावी फिज़ा बदल गई है. वजह है- मुख्यमंत्री संबल योजना, जिसमें प्रदेश के पौने दो करोड़ बीपीएल और असंगठित मज़दूर परिवारों के साढ़े पांच हज़ार करोड़ के बकाया बिल माफ कर दिए गए हैं. इसके साथ ही उनके लिए हर महीने 200 रु. न्यूनतम बिल सीमा तय कर दी गई है. एक झटके में उदारता से की गई इस बिजली बिल माफ़ी ने चुनावी माहौल को ना सिर्फ गरमा दिया है, बल्कि पॉलिटिकल सेंसेक्स में नीचे की ओर लुढ़क रहे शिवराज के ग्राफ में ज़बर्दस्त उछाल भी ला दिया है. अंदरूनी सूत्र बता रहे हैं कि जुलाई के पहले सप्ताह में खेले गए इस ट्रंप कार्ड ने सिर्फ 25 दिन में रिजल्ट दिखाना शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री की जनआशीर्वाद रैली में बढ़ती भीड़ इसी का परिणाम है. मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद रैली के साथ शुरू हुआ यह सिलसिला अब ज़ोर पकड़ने लगा है, क्योंकि जो हितग्राही हैं, उनकी भीड़ बढ़ रही है. कांग्रेस इसे प्रशासन की प्रायोजित भीड़ बता रही है, लेकिन शिवराज ने अपनी जगह-जगह हो रही आम सभा में इसका लाभ उठाना शुरू कर दिया है. वे सीधे संवाद साध कर जनता को बता रहे हैं कि किस तरह सरकार ने अपनी मुश्किलों की परवाह किए बिना गरीबों की चिंता की है. वे उन्हीं की तरह गरीब परिवार से हैं. कोई राजे – महाराजे नहीं . वोटर्स को सीधा फायदा पहुंचाने वाली इन स्कीम्स का कांग्रेस के पास फिलहाल कोई तोड़ दिखाई नहीं दे रहा है

क्या मामा -मामी ही चुनाव लड़ते रहेंगे -अनूप मिश्रा पर भी साधा निशाना

)बिधान सभा चुनाव की गहमा -गहमी के साथ बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व साडा अध्यक्ष जय सिंह कुशवाह ने एक बड़ा सबाल उठाते हुए कहा है कि क्या मंत्री माया सिंह (मामी ) और पूर्व मंत्री ध्यानेंद्र सिंह (मामा ) ही चुनाव लड़ते रहेंगे ,क्या कभी मुरार -थाटीपुर के स्थानीय कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलेगा .७० साल कि उम्र पार कर रहे इन नेताओं को स्वयं नहीं लगता कि कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए .उन्होंने कहा कि पिछले ४३ वर्षों से लगातार दोनों ११ वार चुनाव लड़ चुके हैं. वर्ष १९७१ में सेवड़ा से मामा चुनाव हारे ,इसके बाद १९८० में मुरार -ग्वालियर से चुनाव हारे . वर्ष १९८५ और १९९० में मुरार से चुनाव जीते .इसके वाद वर्ष १९९३ और १९९८ में चुनाव हारे .साथ ही २००३ में मुरार से चुनाव जीते .उन्होंने कहा कि श्रीमती माया सिंह वर्ष १९८३ में नगर निगम में उप सभापति रहीं .इसके वाद वर्ष २००२ और वर्ष २००८ में राजयसभा सदस्य रहीं और अब मंत्री हैं .बीजेपी नेता श्री सिंह ने कहा कि मामा तो वर्ष २००८ में भोपाल के जम्मूरि मैदान में बीजेपी कि सभा में चुनाव न लड़ने का एलान कर चुके हैं.अब मामी भी ७० के पास हैं .उन्हें भी चुनाव न लड़ने का एलान करना चाहिए .ताकि कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने का मौका मिले .
अनूप मिश्रा पर साधा निशाना ;बीजेपी नेता जय सिंह कुशवाह ने मुरैना सांसद अनूप मिश्रा पर निशाना साधा और कहा कि क्षेत्र बदलकर चुनाव लड़ने कि इनकी आदत से अन्य कार्यकर्त्ता चुनाव ही नहीं लड़ पाते हैं .इनको हर बार टिकिट चाहिए .मंत्री – सांसद रहने के बाद अब फिर टिकिट के लिए हाथ-पैर मर रहे हैं .अब इन तीनों को मतदाता स्वीकार नहीं करेंगे .

सिंधिया ,दिग्विजय और कमलनाथ को ऐसे घेरते हैं शिवराज

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों जन आशीर्बाद यात्रा के माध्यम से प्रदेश के दोरे पर हैं .श्री चौहान इस दौरान कुछ घोस्नाएं करते हैं ,बहीं अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हैं .इसके साथ ही कांग्रेस नेताओं को हमलाबर अंदाज में घेरते हैं .कांग्रेस नेताओं पर इस तरह की चुटकियां लेते हैं .
ज्योतिरादित्य सिंधिया ; मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान श्री सिंधिया के बारे में कहते हैं की बे बताएं की कांग्रेस ने क्या विकास किया .बे महाराज हैं मेरे जैसे साधारण आदमी पर झूंठे आरोप लगते हैं.
दिग्विजय सिंह ;इनके बारे में श्री चौहान कहते हैं की राजा को छपास का रोग हैं .इस कारण अनर्गल आरोप मेरे ऊपर लगते हैं .दिग्विजय ने मुख्यमंत्री रहते प्रदेश की हर ब्यबस्था को चौपट कर दिया था .
कमलनाथ ; इनको लेकर शिवराज कहते हैं की केंद्र में मंत्री रहे पर प्रदेश के विकास के लिए कुछ नहीं किया .बरहाल शिवराज पूरी कांग्रेस पर भारी पढ़ रहे हैं और कोंग्रेसी अपने -अपने वर्चस्व को बनाये रखने में ही उलझे हुए हैं .एहि कारण हैं की कांग्रेस जनता में अपनी उपस्तिथि दर्ज नहीं करा पा रही है .

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