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अगर सब पर हो जाए कार्रवाई तो कांग्रेस में छा जाएगा सन्नाटा

नई दिल्ली 24 अगस्त 2019 । कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री रहे पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद अब कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दर्ज सभी पुराने मामले चर्चा में आ गए हैं। कांग्रेस भले ही केंद्र सरकार की इस लोकतंत्र की हत्या बता रही है लेकिन यह भी सच है कि अगर कार्रवाई हो जाए तो कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं से खाली होने की नौबत आ जाएगी। कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी हों या पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अथवा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत या अहमद पटेल, सबके सब किसी ना किसी मामले में बेल (जमानत) पर हैं। कांग्रेस में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरने वाले पी.चिदंबरम अकेले नेता नहीं हैं। दिल्ली से लेकर हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक के बड़े कांग्रेस नेता सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी जैसी एजेंसियों के निशाने पर हैं। अब यह भी माना जा रहा है कि पी.चिदंबरम के बाद अब केंद्रीय जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार में फंसे अन्य कांग्रेस नेताओं पर भी शिकंजा कस सकती हैं। इस आशंका से कांग्रेस के कई नेता सहमे हुए हैं। अगर केंद्रीय जांच एजेंसियों ने एक साथ सचमुच कांग्रेस के सभी आरोपी नेताओं पर कार्रवाई कर दी तो कांग्रेस में सन्नाटा छा जाएगा।

सोनिया गांधी व राहुल गांधी :- नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेता फंसे हैं। आरोप है कि कांग्रेस के पैसे से 1938 में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी खड़ी की गई, जो नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और क़ौमी आवाज नामक तीन अखबारों का संचालन करती थी। एक अप्रैल 2008 को सभी अखबार बंद हो गए। इसके बाद कांग्रेस ने 26 फरवरी 2011 को इसकी 90 करोड़ रुपये की देनदारियों को अपने जिम्मे ले लिया था। फिर 5 लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बाद में घालमेल कर यंग इंडियन के कब्जे में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी को कर दिया गया। फिर कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ का लोन भी माफ कर दिया। भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का आरोप है कि यह सब दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 16 सौ करोड़ रुपए की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया।

अहमद पटेल और रतुल पुरी :- अगस्ता वेस्टलैंड वीआइपी हेलीकॉप्टर खरीद घोटाला 2013 में सामने आया। कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर इतालवी चॉपर कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से कमीशन लेने के आरोपों की सीबीआई आदि केंद्रीय एजेंसियां जांच कर रही हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी भी फंसे हैं। अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी से 36 अरब रुपए में 12 वीआईपी हेलिकॉप्टर ख़रीदे जाने थे। भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया इस वीआईपी चॉपर खरीद के पीछे अहम भूमिका निभा रही थीं।

जगदीश टाइटलर :- कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय जगदीश टाइटलर भी भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हैं। मामला वर्ष 2009 का है। टाइटलर पर आरोप है कि उन्होंने बिजनेसमैन अभिषेक वर्मा के साथ मिलकर तत्कालीन गृह राज्यमंत्री अजय माकन के फर्जी लेटर हेड का इस्तेमाल कर तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर एक चीनी टेलीकॉम कंपनी के अफसरों को वीजा के नियमों में छूट देने की सिफारिश की थी। जगदीश टाइटलर और अभिषेक वर्मा के खिलाफ फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र सहित भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं में आरोप तय हो चुके हैं।

अशोक गहलोत :- राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मामला 2010 से लेकर 2013 तक एनआरएचएम के तहत एंबुलेंस खरीदने में हुई धांधली का है। एंबुलेंस खरीदने के लिए जो टेंडर जारी किया गया, उसमें गड़बड़ी की गई थी। वसुंधरा राजे की भाजपा सरकार ने मामला सीआईडी को सौंप दिया गया था। इस मामले में 31 जुलाई 2014 को जयपुर के अशोक नगर थाना में पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदम्बरम के पुत्र कार्ति चिदम्बरम, अशोक गहलोत, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एए खान, श्वेता मंगल, शफी माथेर और निदेशक एन आर एच एम के विरूद्ध मामला दर्ज किया गया था। प्रवर्तन निदेशालय अब तक 12 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुका है।

डीके शिवकुमार :- कर्नाटक में कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति दर्ज करने का मामला चल रहा है। 2017 में आयकर विभाग ने डीके शिवकुमार के 64 ठिकानों पर जबर्दस्त छापेमारी की थी। उस दौरान डीके शिवकुमार और अन्य कांग्रेस नेताओं ने राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया था।

वीरभद्र सिंह :- हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह के खिलाफ भी केंद्रीय एजेंसियों की जांच चल रही है। सितंबर 2015 में उनकी बेटी की शादी के दिन सीबीआई ने छापेमारी कर खलबली मचा दी थी। वीरभद्र सिंह पर आय से अधिक संपत्ति जुटाने का आरोप है।

हरीश रावत :- उत्तराखंड के दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी सीबीआई जांच की जद में हैं। उनके खिलाफ अप्रैल 2016 में सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले बागी विधायकों को समर्थन के लिए घूस की पेशकश करने का आरोप है।

रात में अकेले डर लगता है चिदंबरम को…

पूरे नाटकीय घटनाक्रम के बाद सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को उनके आवास से गिरफ्तार किया। सीबीआई उन्हें वहाँ से अपने मुख्यालय लेकर गई, जहाँ उनसे कई सवालों के जवाब तलब किए गए। इस दौरान चिदंबरम काफी अनमने ढंग से जवाब देते दिखे। कुछ सवालों पर तो उन्होंने जवाबी सवाल भी किया।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद पूरी रात वह ज्यादातर शाँत रहे। बड़ी मुश्किल से उन्होंने सीबीआई अधिकारियों और डॉक्टरों से बात की। उन्हें इस बीच डिनर के लिए भी पूछा गया लेकिन उन्होंने खाना खाने से भी इनकार कर दिया।

डॉक्टरों ने उनसे इस दौरान उनकी तबीयत के संबंध में कुछ सवाल पूछे। डॉक्टरों ने पूछा कि क्या उनका किसी तरह का इलाज चल रहा है? जिसके बाद उनका ब्लड प्रेशर और बाकी नब्ज की जाँच हुई। सीबीआई अधिकारियों ने उनसे पूछा कि क्या वो सहज हैं? इस पर भी उनका जवाब बहुत छोटा और चुप्पी से भरा हुआ था।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने रात में अकेले डर लगने का हवाला देकर जेल जाने से मना कर दिया और सीबीआई के साथ उनके कमरे में ही रुके रहे। उन्हें 5 नंबर के सुईट में सीबीआई के 2 अधिकारियों और सीसीटीवी लगे कमरे में रखा गया। इस दौरान उनसे कई सीधे सवाल पूछे गए, मसलन FIPB के नियमों में बदलाव का विरोध क्यों नहीं हुआ? कार्ति और इंद्राणी मुखर्जी की मुलाकात कैसे हुई थी? घूसकांड का पैसा कहाँ से कहाँ गया? आदि।

जानकारी के मुताबिक पी चिदंबरम को अब EOU (ईकॉनोमिक ऑफेंस यूनिट) ले जाया गया है, जहाँ उनसे आधिकारिक रूप से पूछताछ की शुरुआत होगी। पूछताछ के बाद उन्हें दिल्ली की राउज ऐवेन्यू कोर्ट में पेश किया जाएगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि सीबीआई पूर्व वित्त मंत्री की 14 दिन की हिरासत माँग सकती है। वहीं ईडी भी कोर्ट में चिदंबरम की हिरासत की माँग कर सकता है।

आगे की राह और मुश्किल: 70 हजार करोड़ की विमान डील समेत 6 केस में फंसे हुए हैं चिदंबरम

INX मीडिया केस में गिरफ्तार कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की गर्दन कई और मामलों में फंसी है. आने वाले वक्त में उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. कहा जा रहा है कि आईएनएक्स मीडिया मामला तो सिर्फ शुरुआत भर है. उनके खिलाफ सबसे बड़ा मामला एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस की ओर से 70 हजार करोड़ रुपये के विमानों की खरीद में हुए घोटाले का है. इस सौदे को उनकी अध्यक्षता में बने मंत्रियों के समूह ने हरी झंडी दी थी. चिदंबरम अपने खिलाफ छह बड़े मामलों में जांच की आंच झेल रहे हैं. मनमोहन सरकार में हुए बहुचर्चित विमान घोटाले में 23 अगस्त को पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय पूर्व में ही चिदंबरम को नोटिस जारी कर चुका है.

1-क्या है एयर इंडिया घोटाला

मनमोहन सरकार में जब एनसीपी कोटे से प्रफुल्ल पटेल उड्डयन मंत्री थे तो यह चर्चित घोटाला हुआ था. 2011 की रिपोर्ट में सीएजी ने इसका खुलासा किया था. इस मामले की ईडी जांच कर रही है. इस घोटाले में फंसे एविएशन मिनिस्टर प्रफुल्ल पटेल ने दावा किया था कि विमान सौदे को हरी झंडी चिदंबरम की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के उच्चाधिकार प्राप्त समूह( EGOM) ने दिया था. जिसके बाद जांच एजेंसी ने चिदंबरम को भी लपेटे में लिया. यह केस 2005 से 2007 के बीच हुए 43 एयरक्राफ्ट और 68 बोइंग की खरीद से जुड़ा है.

सरकारी एयरलाइंस की हालत पहले से खराब थी, ऐसे में 111 विमानों की खरीद से 70 हजार करोड़ का बोझ पड़ गया. जिससे आर्थिक हालत और खराब हो गई. कैग के खुलासे के बाद सीबीआई और ईडी इस मामले की जांच कर रही है. इस मामले में एक लॉबीस्ट दीपक तलवार को सीबीआई गिरफ्तार भी कर चुकी है. मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने विमान घोटाले की जांच के लिए सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था.

2-एयरसेल-मैक्सिस मामला

वित्त मंत्री रहते हुए पी चिदंबरम पर एयरसेल-मैक्सिस निवेश मामले में भी घपला करने का आरोप है. फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) से जुड़ा यह केस है. जांच एजेंसियों के मुताबिक एयरसेल मैक्सिस में महज 180 करोड़ रुपये के निवेश की अनुमित थी. तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम अपने स्तर से महज 600 करोड़ तक निवेश की अनुमति दे सकते थे, मगर उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए एयरसेल-मैक्सिस डील में 3500 करोड़ की एफडीआई की मंजूरी दी. जबकि इतनी धनराशि को सिर्फ कैबिनेट कमेटी के स्तर से हरी झंडी दी जा सकती थी. आरोप है कि चिदंबरम ने बेटे कार्ति को फायदा पहुंचाने के लिए इस डील को हरी झंडी दी थी.

3-INX मीडिया केस

चिदंबरम पर आईएनएक्स मीडिया केस में फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) से गैरकानूनी तौर पर मंजूरी दिलाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप है. इस केस में अब तक चिदंबरम को 20 से ज्यादा बार गिरफ्तारी से राहत मिल चुकी है, लेकिन इस बार उन्हें कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली. ये मामला 2007 का है, जब पी. चिदंबरम यूपीए-2 सरकार में वित्त मंत्री थे. उस समय आईएनएक्स मीडिया समूह ने 305 करोड़ रुपये का विदेशी फंड हासिल किया था.

4-कालाधन मामला

वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके परिवार के खिलाफ कालाधन का मामला भी चल रहा है. हालांकि पिछले साल नवंबर में मद्रास हाई कोर्ट ने आयकर विभाग की ओर से चिदंबरम, उनकी पत्नी नलिनी, बेटे कार्ति और बहू श्रीनिधि कार्ति के खिलाफ काला धन (अघोषित विदेशी आय एवं संपत्ति) एवं कराधान अधिनियम 2015 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी को रद्द कर दिया था. फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

5-शाह को फंसाने के लिए रिकॉर्ड से हेरफेर

मनमोहन सरकार में जब पी चिदंबरम गृह मंत्री थे, तब उनके खिलाफ इशरत जहां एनकाउंटर केस से जुड़े एक हलफनामे में छेड़छाड़ करने का आरोप है. दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह को फंसाने के आरोप हैं. यह मामला फिलहाल दिल्ली पुलिस के पास लंबित है.

6-होटल पर कब्जे का मामला

पी चिदंबरम की हनक का इस्तेमाल कर उनके एक रिश्तेदार पर तमिलनाडु में होटल कब्जा करने का भी मामला है. आरोप है कि रिश्तेदार ने इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) के अफसरों की मिलीभगत से होटल हड़प लिया. इस मामले में भी चिदंबरम के खिलाफ शिकायत है.

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