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Cheque कोई भी भरे, Signature मौजूद तो खाताधारक की मंजूरी मानी जाएगी

नई दिल्ली 24 अगस्त 2019 । जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने नेगोशिएबल इंस्टूमेंट एक्ट (Negotiable Instruments Act) के एक मामले में स्पष्ट कर दिया है कि अगर Cheque पर स्वामी के signature हैंं लेकिन उसे भरा किसी ने भी हो तो ऐसे में इस Cheque पर दर्ज राशि की निकासी के लिए खाताधारक की मंजूरी मानी जाएगी। खाताधारक के signature ही उसे वैध बनाने के लिए काफी है।

हाई कोर्ट ने याची की उस दलील को भी नकार दिया कि जिसमें उसने कहा था कि Cheque उसने नहींं भरा, पर signature उसके हैं। ऐसे में इस भुगतान के लिए उसकी मंजूरी नहीं थी। मामला एक Cheque Bounce केस का था। याची के अनुसार एक Cheque जिस पर उसके signature थे, उसे क्लीयरेंस के लिए लगाया गया था।

Cheque Bounce होने के चलते बूटा सिंह नामक व्यक्ति जिसने Cheque लगाया था, उसके खिलाफ शिकायत दी गई और ट्रायल चल रहा था। ट्रायल कोर्ट में उसने मांग की थी कि Cheque जिस Hand writing में भरा गया है और याची की Hand writing का मिलान कराया जाए। ट्रायल कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद एडीशनल सेशन जज के पास रीविजन दाखिल की गई जिसे खारिज कर दिया गया। अब याची ने हाई कोर्ट की शरण ली है।

हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि Cheque पर जारीकर्ता के signature ही उसकी मंजूरी का प्रमाण हैं। Cheque उसने नहीं भरा यह दलील देकर जारीकर्ता अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है। यदि ऐसा प्रावधान कर दिया जाए कि Cheque जारीकर्ता द्वारा भरा जाना अनिवार्य है तो लोग इसे हथियार बना लेंगे। पहले से किसी और से Cheque भरवा कर खुद signature कर देंगे और बाद में दलील देंगे कि Cheque उन्होंने नहीं भरा और ऐसे में उनकी कोई जिम्मेदारी नहींं है।

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