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शी जिनपिंग से नरेंद्र मोदी खुद बात करें तो सुलझेगा चीन से सीमा विवाद! क्या कहते हैं एक्सपर्ट

नयी दिल्ली 12 मई 2022 ।  भारत और चीन के बीच पिछले दो सालों से अधिक से लद्दाख क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कई स्तर पर कई राउंड की बातचीत हो चुकी है लेकिन मामला अब तक सुलझता नहीं दिखा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि जुलाई 2021 के बाद से डिसइंगेजमेंट और डी-एस्केलेशन को लेकर भी बात कुछ खास आगे नहीं बढ़ी है। दोनों देशों के बॉर्डर के करीब 50 हजार से अधिक जवानों को तैनात किया है। ऐसे में यह मसला कैसे सुलझ सकता है? लेफ्टिनेंट जनरल एच एस पनाग भारतीय सेना में कई सालों तक कई उच्चस्तरीय पदों पर रहे हैं। अब रिटायर हैं और उन्होंने भारत-चीन बॉर्डर मसले को लेकर दी प्रिंट में एक लिखा है। उन्होंने कहा है कि इस मसले को सुलझाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बैठक करनी चाहिए और मसले को शांतिपूर्ण तरीके सुलझाना चाहिए। आइए जानते हैं उन्होंने और क्या कहा है?

चीन से बातचीत को लेकर भारत ने रखी शर्त

भारत ने लगातार कहा है कि लद्दाख क्षेत्र में अप्रैल 2020 से पहले की यथास्थिति बहाल हो और चीन के साथ संबंधों को रिसेट करने के लिए भारत ने इसे एक पूर्व शर्त बना दिया है। पनाग का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संबंध, भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन को घेरने को लेकर और एशिया में चीन के प्रभुत्व को चुनौती देने को लेकर चीन बॉर्डर पर नियमों का उल्लंघन कर रहा है। इतना ही नहीं, धारा 370 को निरस्त किए जाने के बाद अक्साई चिन को वापस लेने जैसी बातें भी बीजिंग को नागवार गुजरी है। भारत ने की यह बड़ी गलती?

पनाग का मानना है कि मोदी सरकार ने जब देपसांग, गलवान, चांग चेनमो घाटी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे पर जोर-शोर से काम करना शुरू किया तो चीन ने इसे खतरे के तौर पर लिया। भारत ने चीन से लगते बॉर्डर क्षेत्रों में पिछले कुछ सालों में कई सड़क बनाए हैं लेकिन पनाग का कहना है कि भारत ने यहां एक गलती कर दी। संवेदनशील क्षेत्रों में सड़कों को विकसित करने से पहले सैनिकों को तैनात नहीं कर भारत ने बड़ी गलती की।

तो अब आगे क्या रास्ता है?

पनाग ने लिखा है कि चीन ने अप्रैल और मई 2020 में कई संवेदनशील क्षेत्रों में घुसपैठ करने की कोशिश की और कुछ हद तक कामयाब रहे। चीन का इन क्षेत्रों से हटने का कोई इरादा नहीं था लेकिन अगस्त में भारतीय सेना ने जब कैलाश रेंज पर नियंत्रण कर लिया तो चीन को बातचीत के टेबल पर आना पड़ा और उसके बाद से बातचीत जारी है। पनाग का मानना है कि चीन के साथ बॉर्डर मसले को लेकर एक अंतरिम समझौते को लेकर मंच तैयार है। सैन्य और कूटनीतिक वार्ता ने अपना काम कर दिया है और मामले को आगे ले जाने के लिए नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच एक शिखर सम्मेलन की जरूरत है।

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