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ऐसे ही नतीजे रहे तो BJP हिंदी भाषी राज्‍यों में हार सकती है 100 लोकसभा सीटें

नई दिल्ली 13 दिसंबर 2018 । अचानक ही भारत के मानचित्र का रंग बदल गया है. अब कांग्रेस के साथ ही अन्य विपक्षी दलों के लिए भी अवसर दिखने लगे हैं. जम्मू-कश्मीर से लेकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात तक पूरे हिन्दी हार्टलैंड में लोकसभा की 273 सीटें हैं. इन 273 सीटों में से इस वक्त बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास 226 सीटें हैं.

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इस बार के नतीजे और आने वाले चुनाव में सपा और बसपा भी साथ आ जाती है तो फिर 2019 में बीजेपी के 80-100 सीटों पर हारने की पूरी संभावना है. तेलंगाना में भले ही बीजेपी के संभावित सहयोगी को सफलता मिली है और नॉर्थ ईस्ट, पश्चिम बंगाल अथवा तमिलनाडु में एनडीए की सीटें बढ़ती दिख रही है. लेकिन इससे बीजेपी को जो फायदा होगा वह हिंदी भाषी राज्‍यों में हारी हुई सीटों की भरपाई नहीं कर पाएगा.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सफलता सबसे चमकदार और स्पष्ट है. छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस के पास कोई मजबूत क्षत्रप नहीं था. हर वर्ग में स्वीकार्यता, ‘चावल वाले बाबा’ के तौर पर प्रसिद्धि, कई कल्याणकारी योजनाओं का कार्यान्वयन, नक्सली हिंसा के खिलाफ लड़ाई ने रमन सिंह को एक स्पष्ट विजेता बनाया था. हालांकि इस बार वोटर्स उनसे खुश नजर नहीं आए और उन्हें इसका दण्ड मिला.

जरा सोचिए अगर पूरे देश के वोटर्स छत्तीसगढ़ की तर्ज पर ही वोटिंग करें तो क्या होगा. हालांकि शायद ही ऐसा हो पाए. लेकिन जो लोग पूरी तरह एक व्यक्ति की सत्ता में विश्वास करते हैं उन्हें सावधान होने की जरूरत है.

ये विधानसभा परिणाम राहुल गांधी और कांग्रेस पर भी असर डाल रहे हैं. राहुल गांधी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में असाधारण जीत के साथ कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर अपना एक साल पूरा किया. बीजेपी उस वक्त हारी है जब यह सबसे मजबूत है, फिर चाहे बात चुनावी सफलता की हो अथवा संगठन की.

एक टीम लीडर के तौर पर राहुल गांधी को राजस्थान और मध्य प्रदेश में अपने दो भरोसेमंद लेफ्टिनेंट्स सचिन पायलट और कमलनाथ का शुक्रिया अदा करना है. दोनों के धैर्य और कड़ी मेहनत को सराहे जाने की जरूरत है. पायलट और नाथ दोनों ही मुख्यमंत्री पद के लिए काबिल दावेदार हैं.

यह याद रखना चाहिए कि अशोक गहलोत को हाल ही में एआईसीसी का महासचिव नियुक्त किया गया था. यह नियुक्ति अपने आप में अहम थी, क्योंकि भारत की सबसे पुरानी पार्टी में गांधी के बाद गहलोत को सबसे अधिक प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है. गहलोत को एक कार्य दिया गया है जिसकी परीक्षा 2019 में लोकसभा चुनावों के दौरान होगी.

16वीं लोकसभा के वरिष्ठ सदस्य कमल नाथ को मई में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया गया था. अपनी नियुक्ति के बाद उन्होंने एक पेशेवर की तरह काम किया. प्रदेश अध्यक्ष बनते ही नाथ सरकारी कर्मचारियों के 65 यूनियन, विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक समूहों से मुलाकात की. कुछ ने भोपाल के श्यामला हिल्स में आधी रात को उनसे मुलाकात की क्योंकि जिस घर में वे रहते हैं उसकी एक दीवार मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के घर से मिलती है.
कमलनाथ ने भोपाल के हुजूर निर्वाचन क्षेत्र से एक सिंधी उम्मीदवार को खड़ा किया, जिसका पहला परिणाम यह हुआ कि समुदाय के वोट बीजेपी से कांग्रेस की तरफ मुड़ गए. सोशल मीडिया के लिए 500 समर्पित कार्यकर्ताओं का वॉररूम बनाया गया. ये वॉर रूम राज्य कांग्रेस कार्यालय, इसकी चुनावी मशीनरी एवं सोशल मीडिया टीम से अलग था.

मोदी के शत्रु बोले-राहुल ने एक बार फिर अपना करिश्मा दिखाया, मोदी बताएं ‘पप्पू’ कौन और असली ‘फेंकू’ कौन

बॉलीवुड अभिनेता और भाजपा के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद बुधवार को ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। शत्रुघ्न ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘सर जी! अब कृपया बताएं कि कौन ‘पप्पू’ है और कौन असली ‘फेंकू’ बन गया। हमारे चार्मिंग राहुल गांधी ने एक बार फिर अपना करिश्मा लोगों को दिखा दिया। सर जी, ‘ताली कैप्टन को तो गाली भी कैप्टन को!’ राहुल गांधी आप ऐसा नहीं सोचते?’

शत्रुघ्न सिन्हा ने सवालिया लहजे में कहा है कि क्या आपको नहीं लगता कि राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी को आपकी ओर से बेकार तरीके से संबोधित किया गया था, जो असंवैधानिक, अनैतिक और अवैध है। ‘विधवा’ शब्द का प्रयोग अपमानजनक है और इसने एक बड़ा मुद्दा साबित कर दिया। इस शब्द की निंदा की गयी। किसी ने भी इसकी सराहना नहीं की है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने ट्वीट के माध्यम से कांग्रेस की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की दूरदर्शी टीम में प्रतिभाशाली रणदीप सिंह सुरजेवाला, शानदार शक्ति सिंह गोहिल, कानूनविद आरके आनंद के साथ-साथ वेणुगोपाल को अद्भुत इंसान और दोस्त बताते हुए अपेक्षित-प्रतीक्षित सफलता की बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ईवीएम, मनी पावर, मसल्स पावर और सूट-बूट की सरकार होने के बावजूद प्रमुख राज्यों में अपेक्षित सफलता की कहानी लिखी गयी है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने ट्वीट को स्पोर्ट्स भावना से लेने की अपील करते हुए लिखा है कि ‘आखिरकार, हमारे विरोधी हमारे दुश्मन नहीं हैं, बल्कि एक ही समाज-राष्ट्र से संबंधित हैं। लोकतंत्र जिंदाबाद’।

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