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आतंकवाद पर इमरान का बड़ा खुलासा, पाकिस्‍तान ने 1980 में जेहादियों को किया तैयार, अमेरिका ने दिया पैसा

नई दिल्ली 14 सितम्बर 2019 । प्रधानमंत्री इमरान खान एक के बाद एक पाकिस्‍तान की नापाक करतूतों को कबूल कर रहे हैं। इमरान खान ने अब कबूल किया है कि 1980 में अफगानिस्‍तान में रूस (तत्‍कालीन सोवियत संघ) के खिलाफ लड़ने के लिए पाकिस्‍तान ने जेहादियों को तैयार किया था। उन्‍हें ट्रेनिंग दी गई थी। रूस के अंग्रेजी न्‍यूज चैनल RT को दिए इंटरव्‍यू में इमरान खान ने यह कबूल किया है। इस इंटरव्‍यू में इमरान अमेरिका पर भी भड़के। उन्‍होंने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि शीतयुद्ध के उस दौर में रूस के खिलाफ पाकिस्‍तान ने अमेरिका की मदद की थी। जेहादियों को रूसियों के खिलाफ लड़ने के लिए ट्रेनिंग दी थी, लेकिन इसके बावजूद अब अमेरिका, पाकिस्‍तान पर आरोप लगा रहा है। पाकिस्‍तान पर अब आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लग रहा है। 70 हजार लोगों की जिंदगी गंवाई
इंटरव्‍यू में इमरान खान ने कहा कि यह सोचकर बड़ा अजीब लगता है कि हमने इस समूह का साथ देकर क्‍या पाया है। मुझे लगता है कि पाकिस्तान को इससे अलग रहना चाहिए था, क्योंकि अमेरिका का साथ देकर हमने इन समूहों को पाकिस्तान के खिलाफ कर लिया। हमने इस दौरान बड़ी संख्‍या में कुर्बानी दी। लगभग हमने 70 हजार लोगों की जिंदगी गंवाई। साथ ही इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को 100 अरब डॉलर से ज़्यादा का नुकसान हुआ है।

जेहादियों को तैयार करने का पैसा सीआइए ने दिया
इमरान खान ने बताया कि 1980 के दशक में पाकिस्तान मुजाहिद्दीन लोगों को ट्रेनिंग दे रहा था, ताकि जब सोवियत यूनियन, अफगानिस्तान पर कब्जा करेगा तो वो उनके खिलाफ जेहाद का एलान करे देंग। इन लोगों को ट्रेनिंग देने के लिए पाकिस्तान को पैसा अमेरिका की एजेंसी सीआइए द्वारा दिया गया था। हालांकि, अमेरिका का नजरिया एक दशक बाद बिल्‍कुल बदल गया। अमेरिका, अफगानिस्तान में आया तो उसने उन्हीं समूहों को जो पाकिस्तान में थे, जेहादी से आतंकवादी होने का नाम दे दिया। अब इसे क्‍या कहा जा सकता है। आतंकी संगठन पर खर्च किए करोड़ों रुपये
हाल ही में पाकिस्तान के मंत्री ने भी उसके चेहरा से पर्दा उठाते हुए बताया कि पाकिस्तान ने आतंकी संगठन जमात-उद-दावा पर करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। राष्ट्रीय टेलीविजन पर देश के आंतरिक मंत्री ब्रिगेडियर (आर) एजाज अहमद शाह ने खुलासा किया है। शाह ने कहा कि इमरान सरकार ने आतंकी संगठन को मुख्यधारा से जुड़ने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। पाकिस्तानी पत्रकार नदीम मलिक से बात करते हुए समाचार चैनल हम न्यूज़ पर प्रसारित एक टॉक शो के दौरान मंत्री ने ये बात कही। उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन के सदस्यों को मुख्यधारा में लाने की जरूरत है। इससे पहले, जुलाई में संयुक्त राज्य अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कबूल किया था कि उनके देश में अभी भी 30,000 से 40,000 आतंकवादी मौजूद हैं। जिन्हें अफगानिस्तान और कश्मीर के हिस्सों में ट्रेनिंग दी गई।

पाकिस्तान में धर्म की स्वतंत्रता का बहुत महत्वपूर्ण और लंबा मुद्दा
पाकिस्‍तान अब मानवाधिकार के मुद्दे पर अतंरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर घिरता नजर आ रहा है। जिनेवा में अनरिप्रेजेंटेड नेशन्स एंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (यूएनपीओ) के महासचिव राल्फ बुनचे ने कहा, आज मैं पाकिस्तान, खासकर सिंध में धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में बोल रहा था। मैंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पाकिस्तान में धर्म की स्वतंत्रता का बहुत महत्वपूर्ण और लंबा मुद्दा रहा है। राल्फ बुनचे ने बताया कि पिछले साल नवंबर में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियमों के तहत विशेष चिंता वाले देश के रूप में नामित किया, जो इसे धार्मिक स्वतंत्रता के संदर्भ में कुछ बेहद गंभीर राज्यों की साथ में रखता है। इसमें कहा गया कि धार्मिक अतिवाद और पाकिस्‍तान में हो रहे उत्पीड़न के मामलों की अनदेखी नहीं की जा सकती है।

इमरान खान ने Pok के लोगों को उकसाया, कहा- ‘बंदूक उठाने का वक्त आ गया है’

पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran khan) ने फिर से जम्मू कश्मीर के लोगों को बरगलाने की कोशिश की है. वह पाकिस्तान (Pakistan) के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों को LOC पर जाने के लिए उकसाते दिखे. उन्होंने लोगों से बंदूक उठाने की अपील की. इमरान खान (Imran khan) ने शुक्रवार को पीओके (Pok) के मुजफ्फराबाद में कश्मीर ‘एकजुटता’ रैली को संबोधित किया. यहां उन्होंने कहा, ‘कश्मीर इंसानियत का मामला है. मोदी को पैगाम देना चाहता हूं. एक बुजदिल ही ऐसा काम करता है. 40 दिनों से बंद किया हुआ है. जिसमें इंसानियत होती है ऐसा कभी नहीं कर सकता.’ पाकिस्तान (Pakistan) पीएम ने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) का नाम लेकर भी हमले किए.

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और आरएसएस (RSS) जो कश्मीर में कर रही है, वह गलत है. मोदी आपको पैगाम देना चाहता हूं कि आप जितना जुल्म कर लें आप कभी कामयाब नहीं होंगे. आप उनको शिकस्त नहीं दे सकते. नरेंद्र मोदी बचपन से RSS के मेंबर हैं. RSS वह जमात है जिसमें मुस्लिम के लिए नफरत भरी है. आपको बता दें कि पिछले एक महीने में इमरान खान का पीओके में तीसरा दौरा है.

यहां आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान (Pakistan) को दुनिया में हर जगह मुंह की खानी पड़ी है. उसे हर जगह से दुत्कार मिली है. इसके बाद पाकिस्तान (Pakistan)ी प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran khan) और उनकी पूरी कैबिनेट भाषणों में ऐसे-ऐसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं कि कश्मीर में अशांति फैल जाए. हालांकि कश्मीर की जनता के सामने वे यहां भी नाकाम हो रहे हैं. यहां आपको बता दें कि भारत ने जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को रद्द कर दिया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया है. इसे लेकर इस्लामाबाद मगरमच्छ के आंसू बहा रहा है और वैश्विक स्तर पर इस मुद्दे को उजागर करने की लगातार कोशिश कर रहा है.

जियो न्यूज के अनुसार, पाकिस्तान (Pakistan)ी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके (Pok)) की राजधानी मुजफ्फराबाद में ‘एकजुटता’ रैली, कूटनीतिक अभियान का हिस्सा है, जो ‘इतिहास के सबसे खराब दौर से गुजर रहे कश्मीर और भारतीय सेना से प्रताड़ित व सरकारी-आतंकवाद का सामना कर रहे कश्मीरियों की ओर दुनिया का ध्यान आर्कषित करने के लिए है.’

खान ने बुधवार को ट्विटर पर पोस्ट के जरिए कहा था, ‘भारतीय सेना की ओर से कश्मीर की घेराबंदी के बारे में दुनिया को संदेश देने के लिए शुक्रवार, 13 सितंबर को मुजफ्फराबाद में एक बड़ा जलसा करने जा रहा हूं और इसके जरिए ही कश्मीरियों को यह दिखाना चाहता हूं कि पाकिस्तान (Pakistan) उनके साथ खड़ा है.”कश्मीर मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में नहीं उठा सकते’
आमसभा या सुरक्षा परिषद में उठाया जाना चाहिए जिससे इसे निर्धारित तरीकों से आईसीजे में ले जाया जा सके. मंत्रालय ने कहा कि अभी भारत और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच कश्मीर मुद्दे को आईसीजे में ले जाने पर कोई करार नहीं है. संघीय सरकार ने कानून मंत्रालय से पूछा था कि कश्मीर मसले को आईसीजे में ले जाने के मानदंड क्या हैं. इस पर मंत्रालय ने अपना जवाब दिया है.

इससे पहले पाकिस्तान (Pakistan) के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि सरकार ने कश्मीर मामले को आईसीजे में ले जाने का फैसला किया है. आश्चर्य की बात यह है कि उन्होंने तब यह दावा भी किया था कि सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह फैसला लिया गया है.

उन्होंने कहा कि ‘कश्मीर मामले में पाकिस्तान (Pakistan) का कानूनी पक्ष मजबूत है. नियमों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासभा या सुरक्षा परिषद मानवाधिकार उल्लंघन के मामले को आईसीजे में भेज सकती है.’ लेकिन, उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमानुसार किसी देश की सरकार यो कोई एनजीओ या कोई अकेला व्यक्ति सीधे मामले को आईसीजे में नहीं उठा सकता. किसी मामले के दोनों पक्ष अगर सहमत हों तो ही मामले को आईसीजे में उठाया जा सकता है. कश्मीर मामले में भारत और पाकिस्तान (Pakistan) में ऐसी कोई सहमति नहीं है, इसलिए इसे आईसीजे में नहीं उठाया जा सकता.

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