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जिस शहर में सत्ता में लौटने को चिंतन कर रही कांग्रेस, वहां से साफ हो चुका है पार्टी का सूपड़ा

नयी दिल्ली 11 मई 2022 । राजस्थान के जिस शहर में कांग्रेस सत्ता में लौटने का मंथन कर रही है, उसी शहर में 1998 के बाद से कांग्रेस का कोई विधायक नहीं जीत सका। 30 सालों में सिटी म्युनिसिपल कार्पोरेशन में कांग्रेस का बोर्ड तक नहीं बन सका। इस शहर में कांग्रेस के ऐसे हालात आज नहीं हुए हैं, कभी यहां कांग्रेस का डंका बजा करता था। आधुनिक राजस्थान के निर्माता कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया जो 17 साल तक मुख्यमंत्री रहे, इसी शहर से लगातार तीन बार विधायक और एक बार सांसद चुने गए। सुखाड़िया के बाद कांग्रेस नेता डॉ. गिरिजा व्यास उदयपुर से तीन बार लोकसभा व एक बार विधानसभा का चुनाव जीत चुकी है। कांग्रेस की गुटबाजी और विधानसभा सीट पर प्रत्याशी के गलत चयन का नतीजा है कि कांग्रेस लगातार चार बार विधानसभा और दो बार लोकसभा चुनाव हार चुकी है। म्युनिसिपल कार्पोरेशन में 1995 से लेकर अब तक 6 चुनावों में कांग्रेस एक बार भी अपना बोर्ड नहीं बना सकी। आजादी के बाद से जैसे जैसे कांग्रेस में गिरावट आई, उसी तरह उदयपुर में कांग्रेस का वर्चस्व खत्म होता गया। इसके बाद यहां भाजपा ने अपने किले को इतना मजबूत कर लिया है कि कांग्रेस के लिए उसको भेदना नामुमकिन लगता है।

कांग्रेस का ऐसे रहा वर्चस्व
आजादी के बाद उदयपुर लोकसभा सीट से 11 बार सांसद चुने गए। पांच बार भाजपा ने इस सीट पर जीत हासिल की। एक बार जनसंघ और एक बार जनता पार्टी लोकसभा का चुनाव जीती थी। विधानसभा में यहां 2003 से लगातार चार चुनाव भाजपा जीत रही है। 1952 में पहली बार विधानसभा चुनाव यहां रामराज्य परिषद जीती थी। इसके बाद पांच बार कांग्रेस के विधायक चुने गए। इनमें तीन बार मोहनलाल सुखाड़िया जीते। एक बार गिरिजा व्यास व एक बार त्रिलोक पूर्बिया विधायक बने। विधानसभा में भाजपा छह बार अपने विधायक उदयपुर शहर से बना चुकी है। क्यों ढहा कांग्रेस का किला
उदयपुर शहर विधानसभा सीट से भाजपा लगातार चार चुनाव जीत रही है, लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने आज तक चुनाव जीतने की कोई प्लानिंग नहीं की है। भाजपा प्रत्याशी के सामने कांग्रेस प्रत्याशी का हमेशा छोटा रहा है। 2019 में कांग्रेस से डॉ. गिरिजा व्यास को टिकट मिला, लेकिन बेहतर प्लानिंग नहीं होने से जातिगत समीकरण में कटारिया बाजी मार गए। कांग्रेस ने शहर में कभी जमीनी स्तर पर काम नहीं किया। तीस सालों में छह निकाय चुनावों में कांग्रेस ने एक बार भी बहुमत के करीब भी नहीं पहुंच पाई। ऐसे में शहर में भाजपा ने कब्जा जमा लिया। मोहनलाल सुखाड़िया की तीसरी पीढ़ी आ गई, लेकिन उनके परिवार के किसी सदस्य को कांग्रेस में तवज्जो नहीं दी गई। कटारिया ने अपने दम पर जीते चार चुनाव
भाजपा के गुलाबचंद कटारिया लगातार अपने दम पर चार चुनाव जीते हैं। अपनी पार्टी में विरोध झेलने के बावजूद कटारिया पूरी चतुराई के साथ चुनाव लड़ते हैं। चुनाव आने से पहले वो अपनी पूरी टीम बदल देते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया और उनके कामों का जिक्र हर चुनाव में करते हैं। उदयपुर शहर विधानसभा सीट पूरी तरह से जैन डोमिनेंट है। लेकिन कांग्रेस ने पिछले छह चुनावों में किसी जैन को प्रत्याशी नहीं बनाया। जातिगत समीकरण बैठाने की भी कोशिश नहीं की। यही सब कारण हैं, जिससे कांग्रेस का किला ढह गया और भाजपा ने अपना महल खड़ा कर लिया।

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