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नए अवतार में मोदी सरकार, शुरुआती 100 दिनों में कर सकती है ये बड़ा एलान

नई दिल्ली 26 मई 2019 । मोदी सरकार की सत्ता में दोबारा वापसी प्रचंड बहुमत के साथ हो चुकी है. इतना बड़ा जनादेश मिलने के बाद निश्चित तौर पर सरकार की जिम्मेदारी बढ़ जाती है. अब सरकार की प्राथमिकताएं वैसे योजनाओं के लिए होंगी जिसके लिए पिछले कार्यकाल में आलोचनाओं का समना करना पड़ा था. अब सरकार के सामने रोजगार, कृषि नीतियों, निजी निवेश, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और आईबीसी जैसे लक्ष्य को पूरा करने की चुनौती है.

जानकारों की मानें तो अगले 100 दिनों में मोदी सरकार उपरोक्त योजनाओं पर जोर दे सकती है. इसके अलावा मोदी की महत्वाकांक्षी स्टार्टअप स्कीम को बढ़ावा देने के लिए एक स्पेशल फंड का निर्माण कर सकती है जिसकी शुरुआती राशि 1 हजार करोड़ रुपये तक होगी.

कृषि उत्पादों पर मिल सकता है इंसेटिव्स

किसानों के खाते में सलाना 6000 आर्थिक सहायता देने की घोषणा मोदी सरकार ने अपने अंतरिम बजट में की थी. अब किसानों को समृद्ध करने के लिए कृषि निर्यात नीति में बदलाव आ सकता है और किसानों की समस्या दूर करने के लिए निर्यात पर इंसेटिव्स बढ़ाया जा सकता है. पीएम-आशा जैसी प्रॉक्यूरमेंट पॉलिसी का रिव्यू किया जा सकता है.

नई औद्योगिक नीति को मिल सकती है मंजूरी

मोदी सरकार पर अक्सर ये आरोप लगते रहे हैं कि रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार नई औद्योगिक नीति को शुरुआती दिनों में ही मंजूरी दे सकती है. इसके तहत मैनुफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को बढ़ावा देने के लिए इंसेटिव्स को प्रमोट किया जा सकता है. नई औद्योगिक नीति के तहत वार्षिक 6.93 लाख करोड़ रुपये की FDI निवेश देश में आ सकती है जबकि पिछले साल एफडीआई 4.16 लाख करोड़ रुपये था.

नई सरकार में बड़े पद पर होंगे नितिन गडकरी, संघ ने दिए संकेत

दो घंटे चली बैठक– लगभग दो घंटे चली इस बैठक में बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद थे, जिन्होंने मीडिया से कहा कि कई सरकारी योजनाओं पर चर्चा हुई| जबकि एक कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि एग्जिट पोल अंतिम निर्णय नहीं हैं, लेकिन ये संकेत देते हैं कि बार फिर एनडीए सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों के दम पर बीजेपी के सत्ता में आने के संकेत हैं| एक सवाल के जवाब में गडकरी ने कहा कि एग्जिट पोल में जो बात सामने आई है कमोबेश नतीजों में वही झलकती दिखाई दे रही है| केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश के लोग एक बार फिर भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पिछले पांच सालों में हमारे द्वारा किए गए कार्यों का समर्थन कर रहे हैं..और एग्जिट पोल एक संकेत हैं|

JDU होगी मोदी सरकार में शामिल, मांगा रेल और सड़क मंत्रालय!

भाजपा के रात्रिभोज में पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने कहा है कि राजग की सरकार बनती है, तो जदयू उसमें शामिल होगी. हालांकि उन्होंने किसी खास मंत्रालय के सवाल पर कहा कि पहली प्राथमिकता केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूत सरकार बनाने की है. हालांकि जदयू ने यह संकेत भी दिए कि वह बिहार में ढांचागत विकास को गति देने वाले रेलवे और भूतल परिवहन व राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय में अपनी हिस्सेदारी चाहेगी.

शिवसेना ने भी सरकार में शामिल होने की इच्छा जाहिर की है साथ ही यह संकेत दिए हैं कि वह इस बार प्रमुख मंत्रालयों में हिस्सेदारी चाहेगी. 2014 की राजग सरकार में टीम मोदी में शिवसेना को तरजीह नहीं दिए जाने पर भारी नाराजगी जताई थी और कई दिनों तक उसके सांसद अपने आवंटित मंत्रालय में नहीं पहुंचे थे.

बिहार साधने का प्लान जदयू ने रेलवे और सड़क परिवहन व राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की इच्छा जाहिर कर बिहार विधानसभा चुनाव में बड़े राजनीतिक लक्ष्य को साधने की प्लानिंग शुरू कर दी है. क्योंकि नीतीश कुमार बिहार की कमान संभालने से पहले अलट बिहारी वाजपेयी की सरकार में रेल मंत्रालय संभाल चुके हैं और उनका वह स्वर्णिम दौर आज भी राज्य में याद किया जाता है.

बिहार जाने के लिए रेल गाडि़यों की कमी है ऐसे में अगर जदयू को रेलवे मंत्रालय मिलता है, तो वह एक नई रेल गाड़ी चलाकर तथा दूसरी ओर बिहार को अलग शहरों से जोड़ने वाले नए राजमार्गों की शुरुआत कर बड़े राजनीतिक लक्ष्य साधने में सफल हो सकता है.

क्या है BJP का ‘मिशन 2022’, जिसे मोदी-शाह ने डिनर पर NDA को समझाया

लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले ही बीजेपी नेतृत्व ने मिशन 2022 पर काम शुरू कर दिया है. जब समूचा विपक्ष ईवीएम को बड़ा मुद्दा बनाने में जुटा था, तब अशोका होटल की डिनर पार्टी में एनडीए के सहयोगियों को नरेंद्र मोदी और अमित शाह 2022 का एजेंडा समझा रहे थे. नतीजों के बहाने बुलाई गई इस डिनर पार्टी के जरिए बीजेपी ने न केवल सहयोगियों को साधा, बल्कि यह भी बता दिया कि अगले चार से पांच साल उन्हें किस ट्रैक पर चलना है.

इससे पहले दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पर हुई एनडीए की बैठक में कई प्रस्ताव भी पारित हुए. इसमें से कुछ प्रस्ताव मिशन 2022 से जुड़े रहे. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समय से पहले की प्लानिंग बीजेपी की उस रणनीति का हिस्सा है, जो वह विपक्ष के मुकाबले के लिए दो कदम आगे का दांव चलने के लिए जानी जाती है. अशोका होटल में डिनर के लिए कई टेबल लगे थे. एनडीए के सबसे वरिष्ठ नेताओं के लिए मोदी-शाह के साथ बैठने की व्यवस्था थी. इसमें सबसे वरिष्ठ नेता अकाली दल प्रमुख प्रकाश सिंह बादल थे.

क्यों खास है वर्ष 2022

दरअसल, 2022 में देश की आजादी के 75 साल पूरे होने जा रहे हैं. ऐसे में बीजेपी ने अपनी कई महत्वाकांक्षी योजनाओं को इस वर्ष तक पूरा करने का टारगेट तय किया है. 2022 को सरकारी उपलब्धियों के जरिए बीजेपी ने यादगार बनाने की योजना बनाई है. मंगलवार को बीजेपी मुख्यालय पर हुई मीटिंग में पारित हुए प्रस्ताव का यह हिस्सा मौजू है-हम संकल्प करते हैं कि 2022 में, भारत जब आजादी के 75 साल पूरे करेगा, हमारा प्रयास है कि हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस मजबूत, समृद्ध, विकसित और समावेशी भारत का सपना देखा हम उन सपनों को पूरा करें और उन्हें आकार दें. प्रस्ताव के इस हिस्से से पता चलता है कि बीजेपी के प्लान में 2022 की कितनी अहमियत है.

क्या है आगे का प्लान

एनडीए के प्रस्ताव में आधारभूत संसाधनों के विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 100 लाख करोड़ की पूंजी निवेश किए जाने का प्रस्ताव पास हुआ. कहा गया कि 25 लाख करोड़ रुपये खेत और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए खर्च होंगे. मकसद है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इको-सिस्टम बन जाए. इन कदमों के साथ भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर होगा. एक बार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के प्रस्ताव पर मुहर लगी.

एनडीए को यकीन- सरकार हमारी ही बनेगी

लगभग सभी एग्जिट पोल ने देश में दोबारा बहुमत से मोदी सरकार बनने के अनुमान व्यक्त किए हैं. एनडीए को भी बहुमत से जीत की पूरी आस है. मोदी-शाह की ओर से बुलाई गई एनडीए की बैठक में पारित हुए प्रस्ताव में यह स्पष्ट लिखा है- हमारी समर्पित कार्यशैली एवं दृष्टिकोण के आधार पर, एनडीए परिवार को यकीन है कि भारत के लोग एक बार फिर से देश का नेतृत्व करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आशीर्वाद देंगे, जिसका वह पूरी तरह से हकदार हैं.

इन मुद्दों पर एनडीए ने जताई चिंता

एनडीए ने इस दौरान न केवल पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हुई हिंसा पर गहरी चिंता जताई, बल्कि कैग, चुनाव आयोग, पुलिस, सुरक्षा बलों और न्यायपालिका से लेकर अन्य संस्थानों पर विपक्ष पर हमला करने का आरोप लगाया. कहा कि संस्थाओं पर व्यवस्थित हमले से हम समान रूप से चिंतित हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जाति-पाति नहीं बल्कि गरीबी ही सबसे बड़ी नैरेटिव है. एनडीए एक राजनीतिक गठबंधन से अधिक है. यह विकास और समृद्धि के एक बड़े राष्ट्रीय चित्र के साथ क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा कर रहा है. वोटबैंक की राजनीति और विपक्ष की पुरानी राजनीतिक सोच के खिलाफ एनडीए की ऊंची दीवार है. 20वीं सदी की राजनीति 21 वीं सदी के युवा मतदाताओं को खास प्रभावित नहीं कर सकी.

जीत के कारण भी बताए

एनडीए की बैठक महज 2019 के लोकसभा चुनाव और 2022 के एजेंडे तक ही नहीं सिमटी, बल्कि अतीत पर भी चर्चा हुई. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और एनडीए की जीत के कौन से कारण रहे, इस पर भी बैठक में नेताओं ने चर्चा की. एनडीए को विकास के एजेंडे के साथ विविधता का गठबंधन बताते हुए कहा गया कि 2014 में एनडीए की सरकार इसलिए बनी, क्योंकि यूपीए सरकार में देश भ्रष्टाचार, क्रोनी कैपिटलिज्म और आर्थिक रुकावटों से घिरा हुआ था. जनता में बीजेपी और एनडीए ने आशा का संचार किया. यही जीत की वजह रही.

पहली बार संसद पहुंचेंगी सबसे ज्यादा महिलाएं, कौन हैं प्रमुख चेहरे

17वीं लोकसभा चुनाव में जहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शानदार जीत के बाद उत्साह का माहौल है वहीं बाकी पार्टियां अपने निराशाजनक परिणामों से काफी दुखी नजर आ रही हैं लेकिन इन सभी चुनावी खबरों के बीच एक अच्छी खबर यह है कि पहली बार ऐसा हुआ है जब लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ी संख्या में महिला प्रत्याशियों की जीत हुई है। इस चुनाव में कई तरह के रिकॉर्ड भी बन गए हैं जिन्हें इतिहास में याद किया जाएगा। जैसे कि नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता, एनडीए को 300 से ज्यादा सीटें, तकरीबन डेढ़ दिन तक रुझान, बंगाल में बीजेपी और भगवा का प्रभाव आदि। मगर इन सब के बीच जो रिकॉर्ड सबसे यादगार रहा वो है सर्वाधिक 76 महिलाओं का संसद पहुंचना।

महिलाएं तो पहले भी संसद में जाती रही हैं लेकिन इस बार खास इसलिए है क्योंकि देश के दो अहम राज्यों ने भी अपनी आबादी और क्षेत्रफल से आगे बढ़कर ज्यादा महिलाओं को संसद भेजा। ये दो राज्य पश्चिम बंगाल और ओडिशा हैं। बंगाल में टीएमसी और ओडिशा में बीजेडी का राज है। बीजेडी ने 41 फीसदी और टीएमसी ने 33 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया। वहीं, बीजेपी और कांग्रेस ने भी महिलाओं को संसद पहुंचाया लेकिन टीएमसी और बीजेडी का नाम इसलिए अहम है क्योंकि बंगाल और ओडिशा से महिलाओं की भागीदारी इन पार्टियों के चलते बढ़ गई है। आइए, जानते हैं इन महिलाओं के नाम-

उत्तर प्रदेश से लोकसभा सीट जीतने वाली 10 महिलाओं में रायबरेली से कांग्रेस की सोनिया गांधी और इसके अलावा राज्य से 9 विजयी महिलाएं भाजपा की हैं।

– सोनिया गांधी (कांग्रेस)

– स्मृति ईरानी (अमेठी)

– रीता बहुगुणा जोशी (प्रयागराज)

– संघमित्रा मौर्य (बदायूं)

– रेखा वर्मा (घौरहरा)

– संगीता आजाद (लालगंज)

– हेमा मालिनी (मथुरा)

– केशरी देवी पटेल (फूलपुर)

– मेनका गांधी (सुल्तानपुर)

– साध्वी निरंजन ज्योति (फतेहपुर)

ओडिशा में जीत दर्ज करने वाली बीजू जनता दल (बीजेडी) की 5 विजेता

– प्रमिला बिसोयी (आस्का)

– मंजुलता मंडल (भद्रक)

– राजश्री मलिक (जगतसिंहपुर)

– सर्मिष्ठा सेठी (जजपुर)

– चांदरानी मुरमु (केओनझार)

पश्चिम बंगाल में लोकसभा सीट जीतने वाली महिलाएं

– काकोली घोषदस्तिदार (बारासात)

– अपरूपा पोद्दार (आरामबाग)

– नुसरत जहां रूही (बशीरहाट)

– सताब्दी रॉय (बीरभूम)

– मिनी चक्रबॉर्ती (जादवपुर)

– प्रतिमा मंडल (जॉयनगर)

– माला रॉय (कोलकाता दक्षिण)

– महुआ मोइत्रा (क्रिश्नानगर)

– सजदा अहमद (उलुबेरिया)

आंध्र प्रदेश से लोकसभा सीट जीतने वाली महिलाएं

– गोड्डेति माधवी (अरुकु)

– चिंता अनुराधा (अमलापुरम)

– बी वी सत्यवथी (अनकापल्ली)

– वन्गा गीथा विस्वनाथ (काकिनाडा)

असम से जीतने वाली महिलाएं

– बोबीता शर्मा (गुवाहाटी)

– रम्या हरिदास (अलथुर)

– महबूबाबाद से कविथा मलोथु (टीआरएस)

उत्तराखंड की अकेली महिला

– टीरी गढ़वाल से माला राज्यलक्ष्मी शाह

हरियाणा

– हरियाणा में 10 सीटों में सिरसा सीट से भाजपा की सुनीता दुग्गल ने जीत दर्ज कर ली है।

मेघालय

– मेघालय से अगाथा संगमा और त्रिपुरा वेस्ट से भाजपा की प्रतिमा भौमिक ने लोकसभा सीट जीत ली है।

कर्नाटक लोकसभा में जीत दर्ज करने वाली महिलाएं

– शोभा करंडलाजे (चिकमंगलूर)

– अंबरीश सुमनलता (निर्दलीय)

झारखंड लोकसभा से सीट जीतने वाली महिलाएं

– अन्नपूर्णा देवी (कोडरमा)

– गीता कोरा (सिंहभूम)

पंजाब लोकसभा से सीट जीतने वाली महिलाएं

– हरसिमरत कौर (बठिंडा)

– प्रिनीत कौर (पटियाला)

तमिलनाडु से लोकसभा सीट जीतने वाली महिलाएं

– जोथिमनि एस (करुर)

– सुमथि (चेन्नई साउथ)

– कनिमोई (तूतीकोरिन)

राजस्थान से विजेता बनी महिला प्रत्याशी

– रंजीता कोली (भरतपुर)

– जसकौर मीना (दौसा)

– दिया कुमारी (राजसमंद)

छत्तीसगढ़ से लोकसभा सीट जीतने वाली महिलाएं

– ज्योत्सना चरनदास महंत (कोरबा)

– गोमती साई (रायगढ़)

– रेणुका सिंह (सरगुजा)

बिहार से लोकसभा सीट जीतने वाली महिलाएं

– मिशा भारती (पाटलीपुत्र)

– रामा देवी (शेओहर)

– कविता सिंह (सिवान)

– वीणा देवी (वैशाली)

मध्य प्रदेश में लोकसभा सीट जीतने वाली महिलाएं

– संध्या राय (भिंड)

– साध्वी प्रज्ञा सिंह (भोपाल)

– हिमाद्री सिंह (शहडोल)

– रीति पाठक (सीधी)

गुजरात से लोकसभा सीट जीतने वाली महिलाएं

– भारती शियाल (भावनगर)

– पूनमबेन मादम (जामनगर)

– शारदाबेन पटेल (मेहसाणा)

– दर्शना जरदोश (सूरत)

– रंजनाबेन भट्ट (वडोदरा)

महाराष्ट्र में लोकसभा सीट जीतने वाली महिलाएं

– सुप्रिया सुले (बारामती)

– डॉ. भारती प्रवीण पवार (डिंडोरी)

– पूनम महाजन (मुंबई नॉर्थ सेंट्रल)

– डॉ. हीना विजयकुमार गवित (नंदुरबार)

– रक्षा खड़से (रावेर)

1977 में सबसे कम 19 महिलाओं ने जीता था चुनाव

देश में पहले लोकसभा चुनाव से ही महिलाएं ने राजनीति में भाग लेना शुरू कर दिया था, वक्त के साथ-साथ इस तादाद में बढ़ोत्तरी होती गई। पहली लोकसभा में 22 महिलाएं चुनकर आईं थीं, 1977 में ये आंकड़ा सबसे कम रहा, 1977 में केवल 19 महिलाएं ही चुनाव जीतीं थीं। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं की संख्या बढ़कर 11 प्रतिशत तक पहुंची। इस चुनाव में 62 महिलाएं जीतीं जबकि इस बार 2019 में सर्वाधिक 76 महिलाएं निर्वाचित हुई हैं। इस प्रकार देश में पहली लोकसभा से लेकर अब तक 19 महिला सांसदों से बढ़कर आंकड़ा 76 तक पहुंचा है।

17वीं लोकसभा चुनाव में एनडीए को 2014 की तुलना में मिली अधिक सीटें

2019 के लोकसभा चुनाव की 2014 के चुनाव से तुलना करें तो एनडीए की सीटें 336 से बढ़कर 352 हो गई। इस तरह उसे 16 सीटों का फायदा हो रहा है। एनडीए के सबसे बड़े घटक दल भाजपा को 21 ज्यादा सीटें मिली हैं। उसे कुल 303 सीटें मिल रही हैं। पिछली बार उसे 282 सीटें मिली थीं। भाजपा के सहयोगी दलों में शिव सेना को 22 और जनता दल युनाइटेड को 18 सीटों पर सफलता मिली है।

यूपीए की सीटें बढ़कर 96 हुई

यूपीए की सीटें 60 से बढ़कर 96 हो गईं। उसे 36 सीटों को फायदा हुआ। कांग्रेस की सीटें 44 से बढ़कर 52 हो गईं। उसे आठ सीटें ज्यादा मिलीं हैं। इसके बावजूद वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद का दावा नहीं कर सकेगी क्योंकि उसके लिए उसकी सीटें कम रह गईं। नेता प्रतिपक्ष का पद पाने के लिए विपक्षी दल को कम से कम दस फीसदी सीटें मिलनी चाहिए।

साध्वी प्रज्ञा को देख मोदी ने फेरा मुंह, फिर आगे बढ़ने का किया इशारा!

सेंट्रल हॉल में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी एनडीए की बैठक के बाद सभी नए सांसदों से मिल रहे थे। इस दौरान सभी सांसद एक-एक कर उन्हें बधाई दे रहे थे। जब साध्वी प्रज्ञा पीएम के पास पहुंची तो उऩ्होंने मुंह फेर लिया और आगे बढ़ने का इशारा कर दिया।

दरअसल, एनडीए के सभी सांसद एक-एक कर पीएम मोदी को शुभकामना दे रहे थे। पीएम भी सबको गर्मजोशी के साथ स्वागत कर रहे थे। साध्वी से पहले मध्यप्रदेश से ही बीजेपी सांसद प्रह्ललाद पटेल का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। उसके बाद कई सांसद आएं, जिन पर पीएम ने खूब प्यार बरसाया।

इसके साथ ही साध्वी प्रज्ञा से पहले महिला सांसद के रूप में निरंजन ज्योति थीं, उनका भी पीएम ने अभिवादन किया। निरंजन ज्योति के बाद एक और महिला सांसद थीं, उनका भी प्रणाम पीएम ने स्वीकार किया। इसके ठीक बाद भोपाल से बीजेपी की सांसद साध्वी प्रज्ञा थीं। वो जैसे ही पीएम के सामने हाथ जोड़े आईं तो उन्होंने मुंह फेर लिया।

साध्वी हाथ जोड़ीं तो पीएम मोदी ने भी हाथ जोड़ मुंह फेर लिया। उसके बाद उन्होंने हाथ से इशारा करते हुए आगे बढ़ने का इशारा किया। पीएम इस दौरान थोड़े असहज भी दिखे। वहीं, साध्वी की बॉडी लैंग्वेज भी कुछ ऐसा ही था। वो आगे बढ़ गईं, उसके बाद जो भी सांसद आएं पीएम मोदी ने उनसे प्यार से मिले।

गौरतलब है कि साध्वी प्रज्ञा ने गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था। उसके बाद पार्टी की बहुत किरकिरी हुई थी। फिर साध्वी ने माफी मांग ली थी। साथ ही पार्टी ने उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा था। पीएम मोदी ने अपनी आखिरी चुनावी रैली के बाद एमपी के ही खरगोन में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि उन्होंने माफी तो मांग ली हैं, लेकिन मैं उनके इस बयान के लिए कभी उन्हें दिल से माफ नहीं करूंगा।

वहीं, सेंट्रल हॉल में पीएम ने भी संबोधन में बड़बोले नेताओं को नसीहत दी है। छपास और दिखास के चक्कर में कुछ भी न बोल दें। आप कुछ बोलते हैं, उससे आपको तो परेशानी होती ही हैं, साथ में दूसरे लोगों की परेशानी भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में इन चीजों से बचिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जहां कहीं आपसे मीडिया वाले कुछ पूछने लगें तो आप कहिए कि मुझे जानकारी नहीं। एक घंटे बाद पता कर बताऊंगा।

30 मई को शाम 4 बजे शपथ लेंगे मोदी, लेकिन ज्योतिषियों ने बोल दी बड़ी बात

भारत के अगले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 मई को शाम 4 बजे शपथ लेंगे। जब गण प्रमुख या राजा पदभार लेते है तो भारतीय ज्योतिष के अनुसार शपथ या पदभार के समय की कुंडली देखी जाती है। इसी से देश के अगले वर्ष का भविष्य तय होता है। 30 मई को तुला लग्न में पीएम के रुप में मोदी की शपथ होगी, लेकिन शपथ के समय रेवती नक्षत्र रहेगा। ये बात रतलाम के अलग-अलग प्रसिद्ध ज्योतिषियों ने कही है। पत्रिका ने रतलाम के ज्योतिषियों से इस बारे में जानकारी ली की शपथ के समय की कुंडली भारत के लिए क्या बोलती है।

केरल की प्रसिद्ध तंडी ज्योतिष विद्या के जानकार वीरेंद्र रावल के अनुसार तुला लग्न में शपथ होगी। लग्न के दौरान लग्नेश शुक्र मेष राशि में रहेगा व लग्न पर उसकी नजर रहेगी। इस अनुसार मजबूत कदम देश के लिए उठाए जाएंगे। नवम भाव में मंंगल के साथ राहु का होना व इस पर शनि के साथ केतु की दृष्टि आमजन को विचलीत करती रहेगी, लेकिन धर्म के मामलों में ये सरकार तेजी से निर्णय लेगी। कोर्ट से अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का विवाद भी सकारात्मक तरीके से होगा। देश में आतंकी घटनाएं बढेग़ी, भूकंप से लेकर ज्वालामुखी फटने की घटनाएं होगी। बाढ़ व तबाही होगी।

रतलाम के पूर्व राज परिवाार के ज्योतिषी रहे अभिषेक जोशी के अनुसार चुनाव या संसद का कारक तीसरा व पंचम भाव रहता है। तीसरे भाव में देवगुरु की राशि धनु है। पंचम भाव का स्वामी शनि है। इसका मतलब साफ है, अब तक जिन अपराधियों को दंड नहीं मिला, उनको अगले तीन वर्ष में कड़ा दंड मिलेगा। कड़ा दंड इसलिए, क्योकि शनि पर मंगल की दृष्टि है। बड़ी बात नहीं, पड़ोसी राष्ट्र का विभाजन हो व भारत के बडे़ अपराधियों को मृत्यु दंड भी मिले, क्योकि जननायक या जनता के कारक शनि के साथ केतु की उपस्थिति है। शपथ के समय बुध की महादशा व 30 मई 2021 तक उसमे गुरु की अंतरदशा है। ये समय जरूर कुछ हद तक भारत के लिए परेशान करने वाला रहेगा, लेकिन इस समय के बीच ही भारत बड़ी कार्रवाई हर मोर्चे पर करेगा।

रतलाम के एक अन्य ज्योतिषी एनके आनंद के अनुसार एकदशी तिथि के दिन शपथ होना ही शुभ है। लेकिन इस समय रात 11 बजकर 3 मिनट तक रेवती नक्षत्र का होना आगामी समय में किसी बडे़ नेता को गंभीर बीमारी होने का संकेत दे रहा है। संभवत ये बीमारी बंगाल से जुडे़ नेता को होगी। इसके अलावा दोपहर 3 बजकर 35 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 29 मिनट तक दुष्ट मुहूर्त रहेगा। इसका साफ मतलब है की जो लोग दुष्ट प्रवृति के है वो अनेक तरह की योजना बनाकर भारत सरकार की राह में रोड़ा बनने का असफल प्रयास करेंगे।

बड़ी बात ये है की इस दिन वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर व मीन राशि वालों के लिए समय बेहतर है। पीएम मोदी की कुंडली में भी तुला लग्न है व दूसरे भाव में मंगल व चंद्रमा की उपस्थिति है। ये योग भारत के लिए अगले पांच वर्ष में आर्थिक से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आंतरिक व बाहरी सुरक्षा के मामलों में उम्मीद से अधिक बेहतर रहेगा।

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